कांच के वर्क से निखरा सिद्धनाथ महादेव मंदिर और महाशिवरात्रि पर लगेगा मेला

Dungarpur News - क्षेत्र के प्राचीन ऐतिहासिक सिद्धनाथ महादेव मंदिर को कांच के वर्क से सजाया जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि पर...

Feb 15, 2020, 11:15 AM IST
Sagwara News - rajasthan news siddharnath mahadev temple and mahashivratri fair will be developed with glass work

क्षेत्र के प्राचीन ऐतिहासिक सिद्धनाथ महादेव मंदिर को कांच के वर्क से सजाया जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि पर यहां आने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं को कुशल कारीगरों द्वारा कांच के वर्क से सुसज्जित मंदिर में भगवान महादेव के दर्शन का लाभ मिलेगा।

सिद्धनाथ महादेव सेवा संस्थान के तत्वावधान में पिछले करीब 5 सालों से मंदिर के बाहरी स्वरूप में संगमरमर के पत्थर का काम होने से निखार आ गया। इसमें कारीगरों ने मंदिर के शिल शास्त्र के अनुसार संगमरमर को तराश कर पुरानी ईंटों की जगह पर लगाकर मंदिर को इसके पुराने स्वरूप को बरकरार रखते हुए एक तरह से नया रूप दिया। ट्रस्ट ने अब मंदिर के भीतरी स्वरूप को आकर्षक बनाने का बीड़ा उठाया है। इसमें दानदाताओं के सहयोग से मध्य प्रदेश और सलूंबर के कारीगरों द्वारा रंगीन कांच के कार्य से मंदिर को सजाया जा रहा है। गर्भगृह के सामने स्थित मंड के बीच में रतनजी वेलजी बिजावाड़ा की तरफ से रंगीन काच और लाइट से बना आकर्षक झूमर लगेगा। विश्वनाथ चौबीसा, महेश चौबीसा, प्रकाश सेवक, प्रवीण पंड्या, धीरज सिंह राजावत, देवीलाल मोरिया, सूर्यवीर सिंह, दिली भट्ट, भरत सोनी समेत कई श्रद्धालुओं के साथ ही भामाशाह गुप्त रूप से सहयोग कर रहे हैं।

585 साल पुराने सिद्धनाथ मंदिर में स्वयंभू रूद्राक्ष शिवलिंग


सागवाड़ा शहर से 13 किमी दूर डूंगरपुर मार्ग पर ठाकरड़ा गांव में गोमती नदी के तट पर स्थित सिद्धनाथ महादेव मंदिर लोगों की अटूट आस्था का केंद्र माना जाता है। बुजुर्ग बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण राजा गुहिल के वंशज खुमाण वंशी प्रतापसिंह के पुत्र महा रावल गोपीनाथ के शासन काल में मेघ-बडनगरा जाति के नागर ब्राह्मण ने कराया था। करीब 585 साल पुराने इस प्राचीन शिवालय में भगवान सिद्धनाथ का एक बड़ा स्वयंभू शिवलिंग है, जो ठीक रूद्राक्ष जैसा प्रतीत होता है। यहां हर सोमवार, एकादशी, पूर्णिमा और श्रावण मास में दर्शनार्थियों का तांता लग जाता हैं। वहीं शिवरात्रि और दीपावली पर बड़े स्तर पर मेले भरते हैं। पड़ोसी राज्य गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से भी श्रद्धालु सिद्धनाथ महादेव के दर्शन के लिए यहां आते हैं। इसे सिद्धेश्वर, काशी विश्वनाथ व हेज नाथ महादेव के नाम से भी जाना जाता है। सिद्धनाथ महादेव सेवा संस्थान के महामंत्री महेश चौबीसा ने बताया कि वर्ष 2013 में मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया था। संस्थान से जुड़े हकरजी कनोत, प्रेमशंकर वजीयोत, गणेश सुथार, जयदीप सिंह, खेमजी गुडेला, गौतम अणियोत, भरत सोनी, धूला कनोत, मोहन सहित भक्तों के सानिध्य में शिल्पी हरीश सोमपुरा के मार्गदर्शन में जीर्णोद्धार का कार्य हुआ। इसके बाद वागडिय़ा पाटीदार समाज चौखला ठाकरड़ा के सानिध्य में बडे स्तर पर शिखर प्रतिष्ठा हुई।

शिवरात्रि पर 21 फरवरी को होगा फलाहार वितरण

सिद्धनाथ महादेव मंदिर जीर्णोद्धार ट्रस्ट के अध्यक्ष इंद्रसिंह, महामंत्री महेश चौबीसा, प्रेमशंकर पाटीदार समेत पदाधिकारियों ने बताया कि शिवरात्रि पर मंदिर परिसर में विशाल मेला लगेगा। इसमें जिले के दूरदराज क्षेत्र के साथ ही अन्य जिलों और प्रदेशों के लोग दर्शन के लिए आते हंै। शिवरात्रि पर 21 फरवरी को प्रत्येक दर्शनार्थी को इस बार भी ठाकराडा के गौतम कचरू गुडिला की तरफ से फलाहार वितरित होगा।

सामने स्थित मंड के बीच में रतनजी वेलजी बिजावाड़ा की तरफ से रंगीन काच और लाइट से बना आकर्षक झूमर लगेगा। विश्वनाथ चौबीसा, महेश चौबीसा, प्रकाश सेवक, प्रवीण पंड्या, धीरज सिंह राजावत, देवीलाल मोरिया, सूर्यवीर सिंह, दिली भट्ट, भरत सोनी समेत कई श्रद्धालुओं के साथ ही भामाशाह गुप्त रूप से सहयोग कर रहे हैं।


धर्म समाज संस्था**

स्वयंभू रूद्राक्ष शिवलिंग।

सागवाड़ा. गुंबद के अंदर के हिस्से में किया कांच का हैंडीक्राफ्ट वर्क ।

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