वीर वह नहीं जो दूसरों को जीतता है और जो स्वयं के विकारों पर विजय प्राप्त करें, वही सच्चा वीर- आचार्य

Dungarpur News - आचार्य अनुभव सागर महाराज ने रविवार को मान स्तंभ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम मोक्ष कल्याणक दिवस पर...

Nov 18, 2019, 08:20 AM IST
Dungarpur News - rajasthan news the hero is not the one who conquers others and the one who conquers his own vices the same true hero acharya
आचार्य अनुभव सागर महाराज ने रविवार को मान स्तंभ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम मोक्ष कल्याणक दिवस पर धर्म सभा में कहा कि संसारी प्राणी जिसे अंतिम यात्रा कहता है वह तो मात्र आत्मा के एक शरीर से छूटने की यात्रा है किंतु आत्मा तो अनंत काल से यात्री ही है।

राग द्वेष मोह और कषाय के कारण इस आत्म यात्री ने संसार का अनंत बार परिभ्रमण किया है किंतु कभी मोह को जितने का पुरुषार्थ नहीं किया। हमारे प्रभु ने अपने अंदर के विकारों को जीता तभी तो महावीर कहलाए क्योंकि वीर वो नहीं जो दूसरे को जीतता है किंतु जो स्वयं के विकारों पर विजय प्राप्त करें वही सच्चा वीर हुआ करता है। वर्षा योग के प्रारंभ से लेकर अंत तक संपूर्ण समाज ने अपने प्रेम वात्सल्य से हमें अपने बालक की तरह रखा। एक शिक्षक की तरह हमसे धर्म शिक्षा को ग्रहण किया। कभी हमारे तीखे वचनों पर बच्चों की तरह उसे चुपचाप स्वीकार कर लिया। वर्षा योग की यही सफलता रही की सभी ने स्वाध्याय आदि क्रियाओं में सम्मिलित होकर आत्म जागृति का पुरुषार्थ किया। मोक्ष कल्याणक पर सभी जिन प्रतिमाओं को लाभार्थी परिवारों ने अपने मस्तक पर लेकर शोभायात्रा के साथ जिनालय तक पहुंचाया। जहां बाल ब्रह्मचारी पंडित ऋषभ ने मंत्रोच्चार के साथ मान स्तंभ पर जिन प्रतिमाओं को विराजमान किया। इससे पहले सुबह शांतिधारा का लाभ अजब लाल परिवार, निर्वाण लड्डू चढ़ाने का लाभ भरत नागदा परिवार, शिखर पर ध्वजा परिवर्तन का लाभ हितेंद्र केसरीमल कनबा परिवार ने लिया। मंदिर के मान स्तंभ के शिखर के ध्वजारोहण का लाभ देवीलाल, धनपाल, शांतिलाल, बसंतलाल परिवार वस्सी को प्राप्त हुआ।

धर्म समाज संस्था

डूंगरपुर. आचार्य संघ के सानिध्य में प्रतिमाओं को शोभायात्रा के साथ जिन मंदिर ले जाते हुए श्रद्धालु।

भास्कर संवाददाता|डूंगरपुर

आचार्य अनुभव सागर महाराज ने रविवार को मान स्तंभ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम मोक्ष कल्याणक दिवस पर धर्म सभा में कहा कि संसारी प्राणी जिसे अंतिम यात्रा कहता है वह तो मात्र आत्मा के एक शरीर से छूटने की यात्रा है किंतु आत्मा तो अनंत काल से यात्री ही है।

राग द्वेष मोह और कषाय के कारण इस आत्म यात्री ने संसार का अनंत बार परिभ्रमण किया है किंतु कभी मोह को जितने का पुरुषार्थ नहीं किया। हमारे प्रभु ने अपने अंदर के विकारों को जीता तभी तो महावीर कहलाए क्योंकि वीर वो नहीं जो दूसरे को जीतता है किंतु जो स्वयं के विकारों पर विजय प्राप्त करें वही सच्चा वीर हुआ करता है। वर्षा योग के प्रारंभ से लेकर अंत तक संपूर्ण समाज ने अपने प्रेम वात्सल्य से हमें अपने बालक की तरह रखा। एक शिक्षक की तरह हमसे धर्म शिक्षा को ग्रहण किया। कभी हमारे तीखे वचनों पर बच्चों की तरह उसे चुपचाप स्वीकार कर लिया। वर्षा योग की यही सफलता रही की सभी ने स्वाध्याय आदि क्रियाओं में सम्मिलित होकर आत्म जागृति का पुरुषार्थ किया। मोक्ष कल्याणक पर सभी जिन प्रतिमाओं को लाभार्थी परिवारों ने अपने मस्तक पर लेकर शोभायात्रा के साथ जिनालय तक पहुंचाया। जहां बाल ब्रह्मचारी पंडित ऋषभ ने मंत्रोच्चार के साथ मान स्तंभ पर जिन प्रतिमाओं को विराजमान किया। इससे पहले सुबह शांतिधारा का लाभ अजब लाल परिवार, निर्वाण लड्डू चढ़ाने का लाभ भरत नागदा परिवार, शिखर पर ध्वजा परिवर्तन का लाभ हितेंद्र केसरीमल कनबा परिवार ने लिया। मंदिर के मान स्तंभ के शिखर के ध्वजारोहण का लाभ देवीलाल, धनपाल, शांतिलाल, बसंतलाल परिवार वस्सी को प्राप्त हुआ।

कीर्ति स्तंभ,मुनि तरुण सागर महाराज की प्रतिमा का होगा लोकार्पण

प्रवक्ता मुकेश कोठारी व भावेश जैन ने बताया कि आचार्य ससंघ का मंगल विहार भव्य जिन प्रतिमाओं के साथ 7 बजे हाउसिंग बोर्ड की ओर होगा। जहां प्रतिमाएं मान स्तंभ पर विराजमान किए जाएंगे। दोपहर में 2 बजे बापू नगर चौराहे पर आचार्य श्री अनुभव सागर जी महाराज की प्रेरणा से श्री शांतिसागर जी महाराज के संयम शताब्दी वर्ष पर निर्मित कीर्ति स्तंभ एवं मुनि श्री तरुण सागर महाराज की प्रतिमा का लोकार्पण किया जाएगा। इसके बाद आचार्य नवाडेरा होते हुए नागफणी तीर्थ क्षेत्र के लिए ससंघ मंगल विहार होगा।

मानस्तंभ पर शिखर की स्थापना करते हुए श्रद्धालु।

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