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जिसने अपनी इंद्रियों को जीत लिया वो गोस्वामी है :मनसुखरामजी

2 वर्ष पहले
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परमात्मा के सामने जैसे हो वैसे ही रहो, पाखंड़ और दिखावा संसार के सामने किया जा सकता है, परमात्मा के सामने नहीं। यह बात कान्हडदास धाम रामद्वारा में बुधवार को संत मनसुखरामजी महाराज ने कही। संत ने कहा कि हनुमानजी लंका पहुंचे हंै तो वहां कड़ी सुरक्षा देखते हैं। घर की सुरक्षा के इंतजाम वहीं करता जिसके मन में किसी प्रकार का डर होता है। डर उसे लगता है जो भोग विलास में डूबा रहता है। नित्य परमात्मा का भजन करने वालों को डर नहीं लगता। संत ने कहा कि जो भी कार्य करो वो अपने साथ ही दूसरों के लिए भी हितकर हो इसका ध्यान रखना चाहिए।

रामायण में वर्णित लंका भ्रष्टाचार का रूप है। ऐसे में हनुमानजी एक बार फिर सूक्ष्म रूप बना कर लंका में प्रवेश करते हैं। कथा के बाद श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर रामद्वारा सेवा समिति के अध्यक्ष सुधीर वाडेल, नाथु परमार, मोहनलाल मोची, दीपिका आचार्य, राधा सोनी, कलावती भावसार, मंजुला भावसार, मीना भावसार, आशा सेवक, मीना सेवक, भानुमति सेवक आदि श्रद्धालु मौजूद थे।

संत मनसुखराम जी महाराज

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