पंचायत समिति ने बिना जांच किए ही पास कर दिए सभी 199 कामों के मस्टररोल

Dungarpur News - झौंथरी पंचायत समिति में मनरेगा में फर्जीवाड़े के मामले में एक के बाद खुलासे सामने आ रहे हैं। वाणिया तालाब व वासुआ...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:15 AM IST
Dungarpur News - rajasthan news the panchayat committee has passed all the 199 works of the master train
झौंथरी पंचायत समिति में मनरेगा में फर्जीवाड़े के मामले में एक के बाद खुलासे सामने आ रहे हैं। वाणिया तालाब व वासुआ में एक भी मस्टररोल की श्रमिक हाजरी कार्यकारी एजेंसी ने प्रमाणित नहीं की है। एक भी मस्टररोल पर जेटीए ने श्रमिकों की टास्क दर लिखकर हस्ताक्षर नहीं किए। समस्त 199 कार्यों की पत्रावलियों में संलग्न मस्टररोल पर एक भी मस्टररोल की कभी चैकिंग नहीं की गई।

ग्राम विकास अधिकारी, सरपंच, जेटीए, एईएन, बीडीओ, पटवारी, एएनएन, ग्राम रोजगार सहायक आदि में से किसी ने एक भी निरीक्षण नहीं किया। ऐसे में मनरेगा के तहत हुए विकास कार्यों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब कभी संदिग्ध लोगों की भूमिका की जांच होनी बाकी है। पड़ताल करने पर सामने आया है कि एक भी मस्टररोल पर पंचायत समिति के लेखा शाखा व बीडीओ ने कोई कार्रवाई प्रदर्शित नहीं की। जैसे श्रमिक हाजिरी का योग, टास्क दर चेक करना आदि। पंचायत समिति ने एमआर का कोई मूल्यांकन नहीं किया। जबकि समस्त एमआर के पीछे जेटीए व पंचायत समिति की ओर से की जाने वाली कार्रवाई के कॉलम छपे हुए हैं। एक भी वेज लिस्ट जांच की हुई नहीं पाई गई। एफटीओ से श्रमिक भुगतान करने से पहले पंचायत समिति ने एक भी वेज लिस्ट व एमआर की लेेखा जांच नहीं की। राज्य स्तरीय टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में तत्कालीन कार्यक्रम अधिकारी एवं विकास अधिकारी रघुवीर मीणा, सहायक अभियंता अमरा राम पटेल, जेटीए निकेश पंड्या, लेखा सहायक संदीप बडाला, कनिष्ठ लेखाकार पन्नालाल बरांडा दोषी को माना है। ऐसे कई मामले है जो अभी दबे हुए हैं। राज्य सरकार से जांच का आदेश मिलते ही कई ओर परतें खुलेंगी। जांच में सामने आया कि कुछ कार्यों में एमआर के श्रमिकों को ग्रुप वार दर दे रखी है। परंतु माप पुस्तिका के इंद्राज में ग्रुप वार टास्क गणना नहीं कर सीधे ही श्रमिकों को ग्रुप वार दर का निर्धारण कर दिया। बिना जांच किए श्रमिकों का भुगतान भी सीधे कर दिया है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं।

आखिर किसके इशारे पर मिला पीओ को बीडीओ का चार्ज : नियम के तहत विकास अधिकारी का चार्ज एईएम अमरा राम पटेल के पास होना चाहिए था, लेकिन पंचायत प्रसार अधिकारी रघुवीर मीणा को दिया गया। सिर्फ दो ग्राम पंचायत की दो वर्ष की जांच ने पंचायत समिति में होने वाले विकास कार्यों के फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके इशारे पर पीओ का पंचायत समिति का चार्ज दिया गया। पंचायत समिति में एईएन अमरा राम पटेल होने के बावजूद उपयोगिता प्रमाण पत्र व पूर्णता प्रमाण पत्र का मूल्यांकन नहीं कराया। विकास अधिकारी रघुवीर मीणा और लेखा सहायक संदीप बडाला, कनिष्ठ लेखाकार पन्नालाल बरंड़ा को दोषी माना है। हालांकि इस मामले के बाद जिले की झौंथरी पंचायत समिति में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। इस जांच रिपोर्ट से सामना करने की भी तैयारी की जा रही है।

डूंगरपुर. झौंथरी पंचायत समिति कार्यालय भवन।

12 जुलाई को प्रकाशित खबर

फर्जी हाजिरी की भी संभावना

समस्त कार्य जिनमें कारीगर का नियोजन किया गया है। उसकी हाजरी मस्टररोल के प्रथम दिवस से ही दर्शाई गई। जो कि संभव नहीं है। इस प्रकार फर्जी हाजरियों की पूर्ण संभावना है। माप पुस्तिका में एक भी कार्य के लिए उपयोग में ली गई सामग्री का विवरण दर्ज नहीं किया गया है। पत्रावलियों में लगे बिलों का माप पुस्तिका में इंद्राज नहीं किया। पत्रावलियों में स्थाई समिति की अनुशंसा नहीं है। सामग्री के बिलों का अनियमित तरीके से भुगतान किया गया। पंचायत समिति कार्यालय ने बिना एफवायसी बिल बनाकर सीधे ही एफटीओ से श्रमिकों का भुगतान कर वित्तीय अनियमितता में कोई कसर नहीं छोड़ी।

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