प्रेम विवाह से नाखुश समाज ने ठुकराया तो जीवन बेटियों को समर्पित किया

Dungarpur News - करीब दस साल पहले समाजसेवा के जुनून ने बीके भारतीय और नीता भारतीय को मिलवाया। प्रेम विवाह से नाखुश समाज के ठुकराने...

Jan 24, 2020, 08:06 AM IST
Dungarpur News - rajasthan news unhappy with love marriage society rejects it dedicates life to daughters
करीब दस साल पहले समाजसेवा के जुनून ने बीके भारतीय और नीता भारतीय को मिलवाया। प्रेम विवाह से नाखुश समाज के ठुकराने के बाद इस प्रेमी युगल ने अपना पूरा जीवन बेटियों को समर्पित कर दिया और अपने नाम के साथ सोमपुरा का सरनेम हटाकर भारतीय सरनेम जोड़ दिया। दपंती का कहना है कि अपने लिए जिए तो क्या जिए, जिंदगी मिली है तो इसे देश और समाज के हित में लगाया जाए।

शहर के युवा भारतीय दपंती शादी से पूर्व एक प्राइवेट स्कूल में जॉब करते हुए सोसायटी के लिए कुछ नया करने का सपना देखा। अलग-अलग शादी करने के बाद कहीं साथ काम करने का ये सपना टूट ना जाए, यही सोच के समाज के खिलाफ जाकर एक-दूसरे के जीवनसाथी बने। प्रेम विवाह की कीमत समाज से बाहर होकर चुकानी पड़ी। समाज से बहिष्कृत होने के बाद परिवार ने साथ दिया तो परिवार का भी हुक्का-पानी बंद।

खुद के किए की सजा परिवार को न भुगतनी पड़े, यही सोचकर परिवार से अलग होकर अपना निजी स्कूल शुरू किया। कोचिंग से परिवार की आजीविका चलाई और जुट गये अपने सपने को पूरा करने में। नीता भारतीय कहती है कि आज भी लड़कियों को अपनी जिन्दगी से जुड़े कई अहम फैसले लेने का अधिकार नहीं है।

बीके भारतीय और नीता भारतीय

बिना किसी सरकारी आर्थिक सहयोग के कर रहे हैं काम

भारतीय दपंती ने 2012 में एक एनजीओ बनाया। बीते 8 सालों में बिना किसी सरकारी मदद के अपने समाजसेवी संगठन हृदय संस्थान के माध्यम से 153 बेटी बचाओ कार्यशालाओं का आयोजन किया, 38 बाल विवाह रुकवाये, 72645 विद्यार्थियों को कन्या भ्रूण हत्या व लिंगभेद रोकने की शपथ दिलाई। 26 पारिवारिक मामलों का समाधान किया। 258 महिलाओं को स्वरोजगार प्रशिक्षण दिया। जिम्मेदारियों से मौका मिलते ही बेटियों के प्रति जागरूक करते हैं।



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