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रंग पंचमी पर भुवनेश्वर मेले में ढोल की थाप पर गेर में थिरके युवक और युवतियां
जिले के प्रसिद्ध भुवनेश्वर शिवालय में रंग पंचमी पर दो दिवसीय मेले का शनिवार को आगाज हुआ। बिछीवाड़ा पंचायत समिति के करोली ग्राम पंचायत के तहत लगे इस मेले में लोगो ने जमकर खरीदारी की। मेले का मुख्य आकर्षण का केन्द्र मंगलेश्वर पहाड़ी पर गेर नृत्य प्रमुख रहा। भुवनेश्वर मंदिर परिसर में भी लोगो ने गैर नृत्य का ढोल की थाप पर नाचने का आनंद किया।
हनुमानजी मंदिर में भक्तो की ओर से दिनभर भजन मंडली की गई। मेले में मेलार्थियों ने रोजमर्रा के कामों में आने वाली चीजें की खरीदारी की। किसानों ने खेती में काम आने वाली औजार व बांस के टाेपले जमकर खरीदे। महिलाओं की मनिहारी की दुकानों पर भीड़ देखने को मिली। होली के बाद क्षेत्र का पहला व सबसे बड़ा मेला होने के कारण लोगों पर कोरोना वायरस का कोई असर देखने को नहीं मिला।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना वायरस की सतर्कता को लेकर कोई भी इंतजाम व व्यवस्था देखने को नहीं मिली। इस अवसर पर मेला प्रभारी नारायणलाल कटारा, बिछीवाड़ा विकास अधिकारी हरिप्रसाद बरजोड, पीईओ पोपटलाल कटारा, करोली सरपंच बालशंकर मनात, ग्राम विकास अधिकारी बिपिन राज पॉल, पटवारी जय कीर्ति वरहात, कनबा चौकी प्रभारी छत्तर सिंह, प्रवीण यादव,महेश पटेल आदि उपस्थित थे।
मोवाई में गेर नृत्य में झलकी आदिवासी संस्कृति की झलक
पूंजपुर. मोवाई गांव के राउमावि के खेल मैदान परिसर में शनिवार को विशाल गेर नृत्य का आयोजन हुआ। इसमें ढोल की थाप पर विभिन्न गांवों से आए करीब पांच सौ से अधिक गेरियों ने गेर नृत्य किया। जिसे देखने बड़ी संख्या में सर्वसमाज के लोगों ने भाग लिया। सामाजिक समरसता व सौहार्द को लेकर सर्व समाज के तत्वावधान में गेर नृत्य का आयोजन हुआ। जिसमें सागोट व आसपास के गांवों के गेरियों ने पैरों में घुघरू, धोती कुर्ता पहने हाथों में लट्ठ व हथियारों के साथ ढोल व कुंडी की थाप पर जमकर गेर खेली। इस मौके पर आसपुर विधायक गोपीचंद मीणा ने भी जमकर गेर नृत्य खेला। इस अवसर पर दोवड़ा थानाधिकारी परमेश्वर पाटिदार, सरपंच कोकिला देवी, उपसरपंच भंवरलाल सुथार, पूर्व सरपंच राकेश मीणा, भरतलाल चौबीसा, ईश्वरलाल चौबीसा, फ्रांस की शोधार्थी केर्लिनो, ईश्वरसिंह राठौड़, रामलाल मीणा, रामलाल बुनकर, बनकोड़ा चौकी प्रभारी नेपालसिंह चौहान सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था, वहीं युवा वर्ग द्वारा भी पार्किंग, पेयजल आदि व्यवस्थाएं संभाली।
खजूर के पेड़ पर चढ़े रायसिंह उतारा फुतरा, बने शाैर्य पुरुष
ओबरी। रंगपंचमी पर शनिवार को फुतरा उतारने की परम्परा का निर्वहन किया गया। इस वर्ष के विजेता रायसिंह पंवार रहे। इन्हाेंने शाैर्यता दिखाते हुए िवराेध अाैर चित्काराें के बीच खजूर के पेड़ पर चढे अाैर फुतरा काे उतारने में सफल हुए। पूरे दिन गांव में उत्सवी माहाैल रहा अाैर ओबरी में मेले की रंगत रही। दोपहर बाद ताे बाजार में भीड़ ही भीड़ रही।
यहां दाेपहर बाद बस स्टैंड पर राजपूत चौराहे से ब्राह्मण युवाओं की टोली हर हर महादेव, जय वड़ी खंड के उद्घोष के साथ रवाना हुई। पुतले वाले खजूर की रक्षा और उसकी घेराबंदी अन्य समाज के लोगों ने की। इसके बाद राजपूत युवाओं की टाेली भगवान श्रीराम के जयकारे लगाते हुए रवाना हुइ। यहां राजपूत समाज के युवा परम्परा के तहत खजूर के पेड़ से फुतरा उतारने का प्रयास करने में जुट गए। वहीं ब्राह्मण व अन्य समाज के युवा ने इनकाे राेकने का प्रयास किया। करीब आधे घंटे तक चली खींचतान में माहाैल शाैर्य से जी उठा अाैर पूरा नजारा युद्ध सा नजर अाने लगा। दाेनाें अाेर से िचत्काराें अाैर हुंकाराें से पूरा माहाैल जाेश से भर उठा। इसी दरम्यान सबकाे चकमा देते हुए गांव के युवा रायसिंह पंवार ने अपना बल दिखाते हुए तेजी से खजूर के पेड़ पर चढना शुरू कर िदया। इनकाे राेकने का प्रयास िकया। इससे थाेड़ा असंतुलित हुए पर हिम्मत दिखाते हुए चढ़ना शुरू रखा अाैर अाखिरकार सफेद कपडे को उतारने में सफलता प्राप्त की। इसके बाद ग्रामीण रायसिंह काे कंधे पर उठाकर बस स्टैंड पर लए। जहां पर रायसिंह पंवार का सम्मान शाैर्य पुरुष के रूप में किया गया। इस मौके पर उम्मेद सिंह, भोपाल सिंह, पहाड़ सिंह देवड़ा, अरविन्द पुरोहित, सरपंच शंकरलाल, काशीनाथ पुरोहित, हीरालाल मोड पटेल सहित बड़ी संख्या में समाज जन मौजूद थे।
पीठ। भचडिय़ा ग्राम पंचायत में शनिवार को रंगपंचमी पर फुतरा छोडने की परम्परा निभाई गई। हर साल की भांति इस साल भी परम्परागत चाडिया मेला हुअा। ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों के साथ गेर नृत्य खेला। यहां पर करीब 20- 20 फीट ऊंचे तीन लकडिय़ों के ऊपर एक फुतरा बांधा गया। इसके बीच वाली लकड़ी को ऑइल से गिला कर शौर्य प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद फुतरा छोडने की रस्में निभाई गई। युवाओं ने एक दूसरे नीचे भी गिराने की काेशिश की। इस वर्ष फुतरा छोडने की रस्म निठाउवा निवासी भरत पुत्र रामा डामोर ने निभाई। मेले का संयोजन गटूसिंह डामोर, पवनसिंह डामोर ने निभाई।
पीठ. भचडिया में फुतरा उतारने की परम्परा निभाते युवा।
ओबरी. फुतरा उतारते रायसिंह।
पंूजपुर. मोवाई में खेली गई गैर नृत्य का विहंगम दृश्य व गैर खेलते गेरिये।
नवलश्याम. भुवनेश्वर शिवालय में रंग पंचमी पर मंगलेश्वर पहाड़ी पर गेर नृत्य करते ग्रामीण।