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किसान रिपोर्ट लिखाने चक्कर लगाते रहे, प्रशासन ने भी नहीं सुनी, कोर्ट के आदेश पर हुई एफआईआर

महाराष्ट्र के लोगों केे नाम जमीनों की रजिस्ट्रियां करने के मामले में जब पीड़ित लोग पुलिस के पास जाते हैं तो पुलिस...

Dainik Bhaskar

Feb 06, 2018, 02:20 AM IST
किसान रिपोर्ट लिखाने चक्कर लगाते रहे, प्रशासन ने भी नहीं सुनी, कोर्ट के आदेश पर हुई एफआईआर
महाराष्ट्र के लोगों केे नाम जमीनों की रजिस्ट्रियां करने के मामले में जब पीड़ित लोग पुलिस के पास जाते हैं तो पुलिस भी समय पर मामला दर्ज नहीं करती है। इसी का नतीजा है कि कोर्ट इस्तगासे के आधार पर लोगों को मामला दर्ज कराना पड़ता है।

अभी भालता और घाटोली थाने में महाराष्ट्र के लोगों के नाम रजिस्ट्रियां करवाने के मामले दर्ज हुए हैं। इसी तरह करीब छह साल पहले भी मनोहरथाना तहसील में भी इस तरह की रजिस्ट्रियां करवाने के मामले दर्ज होते रहे हैं। इनमें अधिकतर मामले इस्तगासे पर ही दर्ज हुए हैं। ताजा मामला घाटोली थाने का रहा है। पीड़ित दिसंबर में ही थाने गया था, लेकिन जब रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो उसने कोर्ट में इस्तगासा दायर किया। अब जाकर कोर्ट के आदेश पर यह मामला दर्ज हो पाया है। दरअसल महाराष्ट्र के लोगों के नाम दस गुना कम कीमत में रजिस्ट्रियां कराने के मामला में पूरी तरह से सेटिंग का खेल चला है। इस कारण दलाल का नेटवर्क भी मजबूत रहा है। इसी का नतीजा है कि इस मामले में सीधे तौर पर और समय पर रिपोर्ट दर्ज नहीं हो पाती है। महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर रजिस्ट्रियां करवाने का मामला करीब 6 साल पहले से मनोहरथाना तहसील से शुरू हुआ था। वहां भी इसी तरह बिल्कुल कम कीमत पर जमीनों की रजिस्ट्रियां महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर करवाई गईं। जब मामला काफी बढ़ा तो यह शिकायत जनप्रतिनिधियों और उच्चाधिकारियों तक पहुंची। इन्हीं के हस्तक्षेप से वहां पर रजिस्ट्रियां होना बंद हुईं। जब वहां पर रजिस्ट्रियां बंद हुईं तो उसी तहसील के नजदीकी अकलेरा तहसील में यह कारनामा शुरू हो गया। किसानों ने बताया कि थाने में उनकी रिपोर्ट समय पर दर्ज हो जाए तो उन्हें इस तरह कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़े। अकलेरा तहसील में पाटनीखेड़ा, भालता, बहेडीकलां, खोडीझर,ऊंचाखेड़ा, नीचाखेड़ा सहित अन्य गांवों में कई किसानों की जमीनें महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर दर्ज हो चुकी हैं।

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दलाल के ऑफिस पर ताला, तहसील में भी नहीं हो रही ऐसी रजिस्ट्रियां

अकलेरा तहसील में महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर रजिस्ट्रियां करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला दलाल बकायद यहां पर अपना आफिस संचालित करता रहा है। इस आफिस में कंप्यूटर भी लगे हुए हैं। यहीं पर स्टांप पर टाइप सहित अन्य सभी काम होते रहे हैं। जब से जमीन रजिस्ट्रियों के इस बड़े मामला का खुलासा हुआ है तब से दलाल के ऑफिस पर भी ताला लगा हुआ है। अब तहसील कार्यालय में भी इस तरह से महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर रजिस्ट्रियां नहीं हो रही हैं। जहां एक दिन में 17 तक रजिस्ट्रियां हो रही थीं, वहीं पिछले 25 दिनों में इस तरह की एक भी रजिस्ट्रियां नहीं हो पाई हैं।

ऐसे किसानों का पता लगाते हैं जो बुजुर्ग और विकलांग हों

इसमें मुख्य बात यह है कि दलाल ऐसे किसानों का पता लगाते जो बुजुर्ग और विकलांग हों। इसमें इन किसानों को पैसों का लालच देकर जमीनों अपने नाम करवा लेते हैं। इसके बाद जब परिवार के अन्य सदस्यों को पता चलता है तो फिर परिवार में हंगामा होता है। जब इंतकाल के बारे में परिवार के अन्य सदस्य पता करते हैं तो वह महाराष्ट्र के व्यक्तियों के नाम पर होना पाया जाता है।

थोड़े से लालच में लाखों की जमीन से हाथ धोना पड़ सकता है किसानों को

किसान भी लालच में आकर अपनी जमीनें महाराष्ट्र के व्यक्तियों के नाम तो कर रहे हैं, लेकिन यह लालच ही इनके लाखों रुपए की जमीनों को इनके हाथ से निकाल रहा है। इंतकाल खुलने के बाद पूरी तरह से जमीन महाराष्ट्र के लोगों के नाम ही बोलेगी। कानूनन भी वही उस जमीन के मालिक हैं। ऐसे में किसान अपनी बेशकीमती जमीनों को लालच में आकर खो रहे हैं।

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