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एसडीएम की जनसुनवाई में महिलाओं ने पानी के लिए अफसरों को घेरा, नारेबाजी

एसडीएम कार्यालय में प्रथम गुरुवार को हुई जनसुनवाई में पीने के पानी की समस्या को लेकर नई बस्ती की महिलाओं का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:20 AM IST

एसडीएम कार्यालय में प्रथम गुरुवार को हुई जनसुनवाई में पीने के पानी की समस्या को लेकर नई बस्ती की महिलाओं का अधिकारियों पर गुस्सा फूट पड़ा। महिलाओं ने पानी की मांग को लेकर एसडीएम को खरी-खरी सुनाई। महिलाओं ने कहा कि क्षेत्र में पाइप लाइन नहीं बिछाने से कुए संचालकों से रुपए देकर पानी खरीदना पड़ रहा है। पहले तो अधिकारियों ने महिलाओं से समझाइश कर उन्हें शांत किया और जल्दी उनकी समस्या दूर करने का आश्वासन दिया।

जनसुनवाई में जैसे ही नई बस्ती की महिलाएं का नंबर आया वे अधिकारियों पर भड़क गई। उन्होंने एसडीएम सहित अधिकारियों को पानी की मांग को लेकर खरी-खरी सुनाई। और प्रशासनिक अधिकारियों को ध्यान नहीं देने पर अंधा बेहरा बताया। महिला फुला बाई, भूली, सुगना, ललता बाई ने बताया कि नई बस्ती के रावण चौक गणेश मन्दिर के आस-पास पीने के पानी के लिए पाइप लाइन नहीं है। हैंडपंप का जल स्तर नीचे चला गया है। नगरपालिका की ओर से लगाई गई ट्यूब वैल रेलवे लाइन के काम चलते उखड़ गई है जिसके चलते पीने के पानी कि समस्या सामने आ रही है। महिलाओं का कहना है कि पीने के पानी के लिए उपलब्ध पानी के कुए वाले हर महीने 500 से 1000 रुपए महीने वसूल रहे है।

अफसरों ने समझाइश कर शांत किया

अकलेरा. पानी को लेकर प्रदर्शन करती महिलाएं।

हैंडपंप नकारा हुए

पीने के पानी के लिए दूर दूर तक भटकना पड़ रहा है। हैंडपंप नकारा हो चुके है। कई बार पानी की समस्या को लेकर प्रशासन को अवगत कराया गया है।

प्रेम बाई, बस्ती निवासी

जलदाय विभाग कि ओर से नगर में 5 उच्च जलाशय बनाए गए हैं। जिनसे 2 जोन में दोनों समय पीने का पानी सप्लाई किया जा रहा है। वर्तमान में कस्बे कि आबादी 29 हजार को पार कर चुकी है। जिसमें कुल कनेक्शन धारी उपभोक्ता करीब 2520 है। 24 घंटों में सुबह शाम 22 लाख लीटर पीने का पानी सप्लाई किया जा रहा है।

फैक्ट फाइल

खरीदना पड़ रहा है पानी

बस्ती निवासी सुगना बाई का कहना था कि पीने का पानी मजबूरी में खरीदना पड़ रहा है। जिन लोगों के कुए है उन से पानी लेने के लिए रुपए देने पड़ रहे है। पार्वती बाई ने कहा कि पाइप लाइन नहीं होने से कनेक्शन कराना भी मुमकिन नहींं है। गर्मी में पीने के पानी के लिए टैंकर चलाए जाते है। जिसमें भी पर्याप्त पानी नही मिलता है।

सालभर पेयजल समस्या

नई बस्ती वालों के लिए पानी कि समस्या पूरे साल होती है। बरसात को छोड़कर 8 महीने पानी के लिए भटकना पड़ता है। मजदूरी करे या पीने के पानी का बंदोबस्त करे।

लक्ष्मी बाई, बस्ती निवासी

दिहाड़ी, पीने के पानी में खर्च

महिलाओं ने बताया कि मजदूरी दिहाड़ी से कमाया रुपया पीने के पानी में बहाया जा रहा है। ऐसे में पेट भरे या पानी का रुपया अदा करे। नई बस्ती क्षेत्र ऊंचाई पर होने से भी क्षेत्र में पानी का जल स्तर काफी नीचे चला जाता है। हर साल वाटर वर्कस विभाग गर्मी में पानी के टेंकरों से पीने का पानी सप्लाई करता रहा है। लेकिन इस बार गर्मी शुरू होने के पहले ही पीने के पानी का संकट गहरा गया है।

हैंडपंप योजना के भरोसे बस्ती

जलदाय विभाग का कहना है कि नई बस्ती क्षेत्र हैंड पंप योजना पर आधारित है पाइप लाइन बिछी हुई नहीं है। पानी का जल स्तर हर साल नीचे चला जाता है। गर्मी में पानी के टैंकरों से जलापूर्ति होती है। आधे हिस्से में पाइप लाइन के जरिये पानी सप्लाई किया जाता है। विभाग कि और से मॉडर्न स्कूल के पास करीब 6 लाख लीटर क्षमता का उच्च जलाशय बनाया गया है। लेकिन पाइप लाइन नहीं होने से पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है।

नई बस्ती क्षेत्र में पाइप लाइन डालने के लिए सर्वे कर लिया है। प्रस्ताव तैयार कर उच्च अधिकारियों को भिजवाया जा रहा है। उसकी स्वीकृति के बाद पाइप लाइन डाली जाएगी। मोहनलाल मीणा, जेईएन

नई बस्ती में पीने के पानी को लेकर वाटर वर्कस विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है। पाइप लाइन डालने के लिए निर्देश दिए है। अश्विनके पवार, एसडीएम

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