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डीआईजी स्टांप की जांच में खुलासा; सभी मुख्तारनामे में एक ही भाषा, वेंडर के रजिस्टर में किसी केस का इंद्राज नहीं मिला

महाराष्ट्र वालों के नाम पर जिले के अकलेरा तहसील के ग्रामीणों की रजिस्ट्रियां करवाने के मामले की जांच डीआईजी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 21, 2018, 02:25 AM IST

डीआईजी स्टांप की जांच में खुलासा; सभी मुख्तारनामे में एक ही भाषा, वेंडर के रजिस्टर में किसी केस का इंद्राज नहीं मिला
महाराष्ट्र वालों के नाम पर जिले के अकलेरा तहसील के ग्रामीणों की रजिस्ट्रियां करवाने के मामले की जांच डीआईजी स्टांप ने पूरी कर ली है। उन्होंने जांच में मुख्तारनामे की सत्यता पर सवाल खड़े किए हैं। जांच रिपोर्ट कलेक्टर को भेज दी है। इस रिपोर्ट में उन्होंने मुख्तारनामे की सत्यता जानने के लिए पुलिस से जांच कराने की सिफारिश की है। पुलिस की जांच के बाद पता चल सकेगा कि यह मुख्तारनामा असली है या फर्जी। वैसे डीआईजी स्टांप ने जांच रिपोर्ट में खुलासा किया है कि जितने भी मुख्तारनामा बनाए गए हैं सभी एक ही व्यक्ति जोधपुर निवासी सुरेंद्र सिंह के नाम पर हैं। इन सभी मुख्तारनामे में एक ही भाषा का प्रयोग किया गया है। जांच रिपोर्ट में मुख्तारनामे में कई बिंदुओं पर कमियां सामने आई हैं। इसी से यह सभी मुख्तारनामा शक के दायरे में आ रहे हैं।

दरअसल अकलेरा तहसील क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसानों को प्रलोभन देकर उनकी जमीनें महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर करवाई गई हैं। अकलेरा तहसील के किसानों की कई बीघा जमीनें महाराष्ट्र के लोगों के नाम हो चुकी हैं। यह सभी रजिस्ट्रियां मुख्तारनामे के आधार पर हुई हैं जिसमें जोधपुर निवासी सुरेंद्र सिंह के नाम मुख्तारनामे से रजिस्ट्रियां महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर करवाई गईं हैं। कई किसानों ने तहसीलदार, पटवारी, दलाल सहित अन्य के खिलाफ घाटोली और भालता थानों में मामले भी दर्ज करा रखे हैं। भास्कर ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। भास्कर ने 5 फरवरी के अंक में पूरी पड़ताल कर यह मुद्दा उठाया था। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। 6 फरवरी को एडीएम अकलेरा पहुंचे और उन्होंने तहसील में जांच कर डीआईजी स्टांप की टीम को जांच के लिए पत्र भेजा था। 8 फरवरी को डीआईजी स्टांप की टीम अकलेरा तहसील में पहुंची और प्रारंभिक जांच में ही उन्हें कई गड़बड़ियां मिलीं। उन्होंने वहां से सभी दस्तावेज जब्त किए और स्टांप वेंडर का लाइसेंस निलंबित कर दिया था।

कलेक्टर को सौंपी जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

खुली परतें...मुख्तारनामे में गवाहों के नाम और पते भी नहीं

अकलेरा. तहसील में बंद पड़ा पंजीयन ऑफिस। फाइल फोटाे।

किसानों ने जरा सी लालच के पीछे गंवा दी अपनी बेशकीमती जमीनें

महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर रजिस्ट्रियां करवाने के मामले में किसानों ने थोड़ी सी लालच में अपनी बेशकीमती जमीनें गंवा दी। किसानों से 3 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से लाखों रुपए कीमत की जमीनें महाराष्ट्र के लोगों के नाम करवा दी गई हैं। किसानों को यह लालच दिखाया गया कि जमीनें उनके पास ही रहेंगी, बस केवल नाम दूसरे के दर्ज हो रही हैं और वह यहां कब्जा करने भी नहीं आ रहे हैं। किसान इसमें मान गए और औने-पौने दाम लेकर महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर रजिस्ट्रियां करवा दी।

पुलिस जांच की सिफारिश, डीआईजी स्टांप ने कहा-फर्जीवाड़े की जांच पुलिस ही करे

डीआईजी स्टांप ने सभी मुख्तारनामों की जांच की। इसमें सामने आया कि सभी में एक ही भाषा लिखी हुई है और सभी में जो विवरण दिया गया है वह हाथ से लिखा हुआ है जबकि यह टाइपशुदा होना जरूरी होता है। अलग-अलग मुख्तारनामे में भाषा का परिवर्तन होता है, जबकि सभी मुख्तारनामे में एक ही भाषा है। जिस स्टांप वेंडर से मुख्तारनामे के स्टांप खरीदे गए हैं उस स्टांप वेंडर के रजिस्टर में इनका इंद्राज नहीं है। जबकि रजिस्टर में इंद्राज जरूरी होता है, जिससे पता चल सके कि कौन सी दिनांक को किसने स्टांप खरीदा है। मुख्तारनामे में गवाहों के नाम और पते भी होना चाहिए, लेकिन प्रमाणीकरण में न तो गवाहों के नाम हैं और न ही पते। डीआईजी स्टांप ने बताया कि इतने सारे मुख्तार नामे एक ही व्यक्ति के नाम से और उसमें सभी की भाषा एक ही है। जब हमने स्टंप वेंडर के रजिस्टर चेक किए तो उसमें यह दर्ज ही नहीं है। ऐसे में मुख्तारनामे की प्रक्रिया शक के दायरे में आ चुकी है।

इधर, दलाल की तलाश में जोधपुर में दबिश, गलत मिला सुरेंद्र का पता

कोर्ट से इस्तगासे के आधार पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अब घाटोली पुलिस ने महाराष्ट्र के नाम यहां के किसानों की जमीनें करवाने के मामले में दबिश देनी शुरू कर दी है। इसके लिए टीम गठित कर इस मामले में मुख्य किरदार प्रॉपर्टी व्यवसायी के संभावित स्थानों पर छापेमारी की है। घाटोली थानाधिकारी सरदार खान ने बताया कि जोधपुर निवासी दलाल सुरेंद्र सिंह के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। जोधपुर का जो पता लिखा है वह सही नहीं मिला।

भास्कर फॉलोअप

5 फरवरी 2018 को प्रकाशित

भास्कर लगातार फर्जीवाड़ा कर जमीनों की रजिस्ट्री का मुद्दा उठाता रहा है। खबर पर कलेक्टर ने संज्ञान लेते हुए डीआईजी स्टांप को जांच सौंपी थी।

महाराष्ट्र के लोगों के नाम जमीनों की रजिस्ट्री का मामला

ये बोले जिम्मेदार

हमने जांच कर रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय झालावाड़ को भेज दी है। इस रिपोर्ट में हमें मुख्तारनामे की सत्यता पर शक है। इसलिए हमने पुलिस से मुख्तारनामे की विस्तृत जांच कराने के लिए लिखा है। उसके बाद मुख्तारनामे की सत्यता पता चल सकेगी। मुख्यतारनामे में गवाहों के नाम और पते भी होना चाहिए, लेकिन प्रमाणीकरण में न तो गवाहों के नाम हैं और न हस्ताक्षर। अशोक कुमार मीणा, डीआईजी स्टांप, कोटा

मैंने कोई तथ्य छिपाकर रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है और न ही मेरा मुख्तारनामा गलत है। जहां तक गवाहों की बात है, ग्रामीण दलालों को ही गवाह बनाया गया है। पूरा काम कानूनी प्रक्रिया के तहत सही है। जो किसान मना कर रहे हैं कि उनको पेंशन के नाम पर रजिस्ट्री करवाई गई है, तो वह गलत है। मेरे पास किसानों को पैसे देते वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है। भोना भवाना नाम के किसान ने जब रजिस्ट्री करवाई तो उसका लड़का वहीं मौजूद था। सुरेंद्र सिंह, जोधपुर निवासी प्रॉपर्टी व्यवसायी

डीआईजी स्टांप की जांच अभी नहीं देखी है। इसमें यदि मुख्तारनामे पर शक जताया गया है तो उसकी पुलिस से विस्तृत जांच करवा लेंगे। इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी। भवानीसिंह पालावत, एडीएम झालावाड़

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Web Title: डीआईजी स्टांप की जांच में खुलासा; सभी मुख्तारनामे में एक ही भाषा, वेंडर के रजिस्टर में किसी केस का इंद्राज नहीं मिला
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