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डीआईजी स्टांप ने 12 दिन में कर ली जांच 1 माह में पुलिस बयान तक नहीं ले सकी

Eklera News - भास्कर न्यूज|झालावाड़/अकलेरा महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर जमीनें करवाने के खेल में दो थानों में मामले दर्ज हो...

Dainik Bhaskar

Feb 28, 2018, 02:55 AM IST
डीआईजी स्टांप ने 12 दिन में कर ली जांच 
 1 माह में पुलिस बयान तक नहीं ले सकी
भास्कर न्यूज|झालावाड़/अकलेरा

महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर जमीनें करवाने के खेल में दो थानों में मामले दर्ज हो चुके हैं, लेकिन एक माह बाद भी यहां कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है। जबकि इनके बाद शुरू की गई जांच में डीआईजी स्टांप ने केवल बारह दिन में जांच कर ली। इसमें वह मुख्तारनामे की सत्यता पर शक जता चुके हैं। पुलिस थानों में मामला दर्ज हुए एक माह से अधिक समय निकल चुका है, अभी तक दोनों ही थानाधिकारी जांच करने की बातें कह रहे हैं, जांच पहुंची कहां तक है इस बारे में अभी तक तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश नहीं कर पाए हैं।

पुलिस न तो आरोपियों तक पहुंच पाई है और न ही किसानों की जमीनें उनके नाम पर हो पाई है। किसान अभी भी इंसाफ के लिए पुलिस थानों के चक्कर काट रहे हैं। दरअसल महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर औने-पौने दामों में यहां के किसानों की जमीनें नाम करवा दी गईं। इसमें मुख्य आरोपी जोधपुर निवासी सुरेंद्र सिंह को बनाया गया। इस मामले में तहसीलदार, पटवारी सहित अन्य के खिलाफ मामले दर्ज हो चुके हैं। अभी तक पुलिस ने एक भी आरोपी से पूछताछ नहीं की है। पुलिस जहां कह रही है कि इस मामले में दलाल सुरेंद्र सिंह का फोन ही बंद आ रहा है, वहीं सुरेंद्र सिंह कई बार दैनिक भास्कर संवाददाता को फोन कर चुका है। ऐसे में पुलिस की जांच सवालों के घेरे में आ रही है। महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर रजिस्ट्रियां करवाने के मामले अकलेरा क्षेत्र के घाटोली और भालता थाने में दर्ज है। इन दोनों ही थानों में जांच के नाम पर अभी तक एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाया है। किसानों ने बताया कि उनकी कहीं पर भी सुनवाई नहीं हो पा रही है। इस मामले में दो बार किसान जिला मुख्यालय पर प्रशासन के पास भी पहुंचे चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

भास्कर नॉलेज: जांच में जितनी देरी आरोपियों को उतना ही फायदा

अकलेरा तहसील क्षेत्र में किसानों की जमीनें औने-पौने दामों पर महाराष्ट्र के लोगों के नाम करवाने के मामले में पुलिस जांच और पूछताछ में जितनी देरी करेगी उतना ही आरोपियों को फायदा मिलेगा। इस्तगासे दायर करने वाले एडवोकेट कुलेंद्र नागर ने बताया कि जब थानों में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है और डीआईजी स्टांप जांच में पावर ऑफ अटार्नी को संदिग्ध मान चुके हैं तो उसके बाद पुलिस को भी इस मामले में तत्परता दिखाना चाहिए अन्यथा जितनी देरी की जाएगी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से उतने ही दूर होते चले जाएंगे। जब तक दलाल नहीं पकड़ा जाएगा, पुलिस के हाथ में कुछ भी नहीं लगेगा। इसको लेकर हम लोग भी आगामी सोमवार को कोर्ट में 210 की रिपोर्ट लगाएंगे। इस रिपोर्ट के माध्यम से अब कोर्ट ही पता करेगा कि पुलिस की जांच किस स्तर तक पहुंची है।

रेवेन्यू रिकॉर्ड प्राप्त कर लिया है, आरोपी की तलाश जारी


अनुसंधान जारी, टीमें भेज रखी हैं बाहर


इन बिंदुओं पर की जानी थी तफ्तीश, अभी तक केवल रेवेन्यू रिकॉर्ड ही जुटा पाए

दोनों ही थानों में अभी तक जांच के नाम पर केवल रेवेन्यू रिकॉर्ड ही प्राप्त किया गया है। इसमें भी जांच नहीं कर पा रहे हैं। जबकि पुलिस को सबसे पहले मुख्य आरोपी सुरेंद्र सिंह तक पहुंचना था। उसके बाद पावर ऑफ अटार्नी पर सुरेंद्र सिंह को जानने वाले, जमीन खरीदने वाले महाराष्ट्र के लोगों, रजिस्ट्री में गवाह बने लोगों तक पुलिस को पहुंचना था। इन लोगों से सत्यता की जांच की जानी थी, लेकिन अभी तक एक भी व्यक्ति को न तो गिरफ्तार किया गया और न ही पूछताछ की गई। अभी तक पुलिस स्थानीय दलालों तक भी नहीं पहुंच पाई है। इन सभी बातों से पता चल रहा है कि पुलिस सैकड़ों लोगों की बेशकीमती जमीनों के मामले में ढिलाई बरत रही है।

पहले रिपोर्ट ही नहीं लिखी कोर्ट के आदेश पर मुकदमे

क्षेत्र के किसानों की बेशकीमती जमीनें अब उनकी नहीं रही हैं। औने-पौने दामों में यह जमीनें महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर दर्ज हो चुकी हैं। जब प्रभावित किसान मामला दर्ज कराने थानों में पहुंचते हैं तो उनकी रिपोर्ट भी सीधे दर्ज नहीं की जाती है। अधिकतर रिपोर्ट कोर्ट से मिले इस्तगासे से ही दर्ज हो रही हैं। जबकि थानों में सीधे ही रिपोर्ट दर्ज हो जाएं तो किसानों को परेशानी नहीं भुगतनी पड़े।

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 1 माह में पुलिस बयान तक नहीं ले सकी
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