Hindi News »Rajasthan »Eklera» अकलेरा-मनोहरथाना की 7 हजार बीघा जमीन महाराष्ट्र वालों के नाम, Rs.5 लाख बीघा की जमीन 3 हजार में किसानों से ले ली

अकलेरा-मनोहरथाना की 7 हजार बीघा जमीन महाराष्ट्र वालों के नाम, Rs.5 लाख बीघा की जमीन 3 हजार में किसानों से ले ली

मोहसिन खान/इस्लाम अहमद | झालावाड़/अकलेरा महाराष्ट्र से आकर झालावाड़ के छोटे-छोटे गांवों में बड़ी-बड़ी जमीनों को दस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 05, 2018, 03:05 AM IST

अकलेरा-मनोहरथाना की 7 हजार बीघा जमीन महाराष्ट्र वालों के नाम, Rs.5 लाख बीघा की जमीन 3 हजार में किसानों से ले ली
मोहसिन खान/इस्लाम अहमद | झालावाड़/अकलेरा

महाराष्ट्र से आकर झालावाड़ के छोटे-छोटे गांवों में बड़ी-बड़ी जमीनों को दस गुना कम कीमत में अपने नाम करवाना, इन जमीनों को सौदा भी बिना देखे हो और उस पर खेती करने का हक संबंधित किसान के पास ही रहे। सुनने में बड़ा अजीब सा लगा, लेकिन इस खेल में करोड़ों रुपए के घोटाले की बू आ रही है। पिछले 15 दिन से किसान कलेक्टर से लेकर तमाम प्रशासनिक अधिकारियों के पास शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। लेकिन, इतना बड़ा खेल होने के बावजूद प्रशासन इसमें ज्यादा रुचि नहीं ले रहा है।

प्रशासन पर उंगली उठाने की वजह भी है-जमीनों का खेल करने वालों से लेकर दलाल तक की भूमिका सामने आने के बावजूद अफसर खामोश बैठे हैं। हालांकि अकलेरा क्षेत्र में एसडीएम ने रजिस्ट्रार ऑफिस का निरीक्षण किया। रजिस्ट्री करने वाला बाबू दफ्तर से लापता मिला, फिर भी इसकी गंभीरता को हल्के में लिया जा रहा है। शुक्रवार को कोर्ट के इस्तगासे से तहसीलदार-पटवारी समेत 15 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया। क्या है जमीन घोटाला, क्यों महाराष्ट्र के लोगों की रुचि अचानक झालावाड़ में जमीन खरीदने में हुई, भास्कर टीम ने पूरी पड़ताल की। भास्कर टीम ने 3 दिन तक 3 गांवों में जाकर 100 से अधिक ग्रामीणों, जमीन कारोबार से जुड़े एक्सपर्ट्स से बातचीत की। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे जाकर ये बड़े जमीन घोटाले के रूप में सामने आएगा।

यहां जमीन खरीदते हैं, फिर फर्जी कंपनी बनाकर उठा लेते हैं लोन

पड़ताल में सामने आया कि बैंकों से करोड़ों रुपए का लोन लेने के लिए यहां पर महाराष्ट्र के लोगों ने कम कीमत देकर किसानों से सशर्त जमीन अपने नाम करवा ली। महाराष्ट्र के लोगों के नाम जमीनों की रजिस्ट्रियां करवाने का सबसे बड़ा कारण है कि वहां पर लोग फर्जी कंपनियां बनाकर बैंकों से करोड़ों रुपए के लोन उठाते हैं। लोन की एवज में यह लोग इन रजिस्ट्रियों को गिरवी रखते हैं। नियमानुसार कर्ज नहीं चुकाने पर बैंक द्वारा रिकवरी के लिए इन जमीनों को कुर्क करने का प्रावधान है। हालांकि लोन देने के लिए अभी तक बैंकों ने किसानों से संपर्क ही किया है और मौका मुआयना देखा है। कुर्क करने के एक भी मामले अभी तक सामने नहीं आ पाए हैं। पड़ताल में सामने आया कि यदि कोई व्यक्ति अपनी कृषि भूमि पर लोन लेने जाए तो उसे ज्यादा से ज्यादा जिले की बैंकें लोन दे सकती हैं जबकि कंपनी बनाकर यदि उसे कृषि भूमि दर्शाया जाए तो देश में कहीं पर भी लोन लिया जा सकता है। ऐसा ही यहां पर भी हो रहा है। इसीलिए यह लोग कंपनियां बनाकर उस पर लोन लेते हैं और दस गुना कम कीमत पर अपने नाम करवाई गई यहां की कृषि भूमियों को रहन रखकर लाखों का लोन उठाते हैं।

भास्कर टीमने 3 दिन तक 3 गांवों में जाकर 100 से अधिक ग्रामीणों, वकीलों, जमीन कारोबार से जुड़े लोगों से बात की

15 गांव के 400 से अधिक किसान फंसे... अकलेरा में 400 और मनोहरथाना में 200 से अधिक रजिस्ट्रियां कराईं

पड़ताल के 3 बिंंदु: एक बीघा पर 10 हजार खर्च, डीएलसी रेट से 5 लाख में ले लिया मालिकाना हक

1किसान को मिलते हैं सिर्फ 3 हजार :भास्कर जांच में सामने आया कि जमीन की रजिस्ट्री डीएलसी रेट पर होती है। यानी 5 लाख रुपए बीघा की जमीन है तो उसी मूल्य में उस जमीन की रजिस्ट्री होती है, लेकिन किसान को एक बीघा के 3 हजार रुपए ही मिलते हैं। यानी संबंधित खरीदार का रजिस्ट्री सहित अन्य सबकुछ खर्च जोड़ा जाए तो एक बीघा का 10 हजार रुपए खर्च आता है, लेकिन वास्तविक रूप में वह 5 लाख रुपए जमीन का मालिक बन बैठता है। यानी जब बैंक से लोन लिया जाएगा तो जमीन का आकलन पांच लाख रुपए बीघा से ही होगा।

2स्टांप अकलेरा से खरीदते हैं, नोटरी पुणे में इस्तगासा दायर करने वाले वकील योगेश कुमार गोयल बताते हैं कि मुख्तारनामे की भी जांच होनी चाहिए। यह भी फर्जी निकलेगा। रजिस्ट्रेशन एक्ट सेक्शन 33 में साफ नियम है कि मुख्तयारनामे से जो जमीन खरीद रहा है, उसी क्षेत्र के पंजीयन कार्यालय में उसका पंजीयन होना चाहिए। लेकिन यहां पर स्टांप तो अकलेरा से खरीदे गए और नोटरी पुणे में हुई। उसके बाद जमीनों की रजिस्ट्री अकलेरा लाकर कराई गई।

किसान बोले-हमसे ली जमीनें, कहा दिया मालिकाना हक तुम्हारा

खोडीझर गांव के सीताराम सिंह ने बताया कि उसकी चार बीघा जमीन को महाराष्ट्र के लोगों ने अपने नाम करवा ली। दलाल के माध्यम से यह सौदा हुआ। कहा कि इस जमीन को केवल नाम ही करवा रहे हैं, बाकी जमीन तुम्हारी ही है। अभी जमीन की कीमत 3 लाख रुपए बीघा चल रही है और 3 हजार रुपए बीघा के हिसाब से जमीन को नाम करवा लिया। गोपाललाल ने बताया कि उसके पास 25 बीघा जमीन है। पीवत जमीन होने के चलते 5 से 6 लाख रुपए बीघा की कीमत है, लेकिन 3 हजार रुपए बीघा में महाराष्ट्र के लोगों ने यह पूरी जमीन अपने नाम करवा ली। अब दो बार वहां से बैंक वाले जमीन देखने भी आए हैं। किशनलाल ने भी यही पीड़ा बताई।

3एक जमीन 3 से 6 लोगों के नाम : कृषि भूमियों को अपने नाम करवाने में सबसे बड़ा फायदा आयकर छूट में भी मिलता है। इसमें एक बीघा पर सालाना एक लाख रुपए की ब्लैक मनी को आसानी से व्हाइट मनी में तब्दील किया जा सकता है, लेकिन यह मामला अधिक बड़ा है इसलिए आयकर छूट का नहीं है क्योंकि यदि आयकर छूट का होता तो एक ही व्यक्ति के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री होती। यहां एक ही जमीन की रजिस्ट्रियां तीन से छह लोगों के नाम पर हुई हैं। यानी इन लोगों ने आपस में मिलकर कंपनियां बनाई हैं। इन लोगों के पते भी महाराष्ट्र में अलग-अलग जगह के हैं। जब कंपनियों को बेहतर तरीके से चलाने के लिए बैंक से लोन लेने की बारी आती है तो इन जमीनों को अपनी प्रॉपर्टी बताकर करोड़ों रुपए का लोन लेते हैं। जब कंपनियां बिना लोन चुकाए ही भाग जाती हैं तो इन्हीं जमीनों को बैंक कुर्क करने की कार्रवाई करती है। हालांकि सरकारी बैंकों में जब कृषि भूमि रहन रखी जाती है तो बैंक तब ही लोन देता है जब तहसीलदार इसका शेड्यूल बदलता है। उसमें बैंक में जमीन रहन रखना बताया जाता है, लेकिन कई प्राइवेट बैंकों में इसकी अनिवार्यता नहीं रहती है।

खेल इसलिएकंपनी बनाकर यदि उसे कृषि भूमि दर्शाई जाए तो देश में कहीं पर भी लोन लिया जा सकता है। ऐसा ही यहां भी हुआ

सीधी बात: अकलेरा एसडीएम अश्विन के पंवार से सवाल-जवाब

Q | महाराष्ट्र के लोगों के नाम यहां जमीनों की रजिस्ट्रियां हुईं, आपकी जांच का क्या हुआ?

A| यह विधि का मामला है। इसमें रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। अब पुलिस जांच करेगी।

Q | यह करोड़ों का घोटाला हो सकता है। सैकड़ों किसानों की जमीन से जुड़ा मामला है। क्या आप इसमें गंभीरता दिखा रहे हैं?

A| पुलिस हर तथ्य पर जांच करेगी।

Q |कलेक्टर ने भी आपको जांच के निर्देश दिए थ,े उसका क्या हुआ?

A| हां, कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए हैं। इसमें एक-दो मामले की ही जांच की जा रही है। हमने जांच कलेक्टर को पेश कर दी है। कलेक्टर ही आगे निर्णय लेंगे।

अकलेरा क्षेत्र के किसान शिकायत लेकर पहुंचे तब खुला मामला, प्रशासन खामोश

अकलेरा क्षेत्र में करीब सात साल से महाराष्ट्र के लोगों के नाम से कृषि भूमियों की रजिस्ट्रियां हो रही हैं। जो भूमि 3 से 5 लाख रुपए प्रति बीघा की होती है, उन्हें महाराष्ट्र के लोग अपने नाम 3 हजार रुपए बीघा में करवा लेते हैं। रजिस्ट्रियां होते ही इंतकाल भी संबंधित महाराष्ट्रीयन के नाम से खुल जाता है। जमीन का असली मालिक महाराष्ट्र का व्यक्ति हो जाता है। जबकि वह लोग बिना देखे ही जमीन का सौदा कर लेते हैं। इसमें खेती करने का हक संबंधित किसान के पास ही रहता है। अब पूरे मामले का खुलासा होने पर किसानों ने कोर्ट से इस्तगासे के आधार पर केस दर्ज कराया है। इस मामले को कलेक्टर ने भी गंभीरता से लिया और एसडीएम को जांच के आदेश दिए हैं। एसडीएम जब जांच के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे तो रजिस्ट्रार दफ्तर का बाबू लापता पाया गया। उसकी गैरमौजूदगी में दो दिन तक उस दफ्तर में ताला लगा रहा।

जोधपुर के दलाल के जरिए खरीदते जमीन, तहसील के 1-1 कर्मचारी से मिलीभगत

महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे, ठाणे, मलाड के ज्यादा लोगों के नाम यहां जमीन दर्ज है। जमीन की खरीद जोधपुर निवासी दलाल सुरेंद्र सिंह के माध्यम से होती रही है। तहसील में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर तहसीलदार तक इनकी पहुंच है। यह इसी बात से साबित होता है कि एक दिन में एक साथ 17 रजिस्ट्रियां तक महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर हो गईं। किसानों ने बताया कि जोधपुर निवासी दलाल सुरेंद्र सिंह ने अकलेरा में बाकायदा अपना ऑफिस बना रखा था। गांव-गांव में उसकी जमीन दलालों से सेटिंग थी। यही लोग किसानों को लेकर उसके पास आते थे।

भास्कर एक्सपर्ट व्यू

यह बैंकों को नुकसान पहुंचाने की कवायद हर दिन शिकायत ला रहे किसान: वकील

इस्तगासा दायर करने वाले वकील कुलेंद्र नागर ने बताया कि महाराष्ट्र के लोगों के नाम पर करीब सात हजार बीघा की रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। यह मामला करोड़ों रुपए के लोन का निकलेगा। किसान प्रतिदिन यहां इस्तगासा दायर करने आ रहे हैं। थानों में उनकी रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की जा रही है। कोर्ट की शरण किसानों को लेनी पड़ रही है। अभी तक इस मामले में जांच नहीं हो पाई है और न ही दलाल का कार्यालय सील हो पाया है।

अश्विन.के पंवार, एसडीएम

India Result 2018: Check BSEB 10th Result, BSEB 12th Result, RBSE 10th Result, RBSE 12th Result, UK Board 10th Result, UK Board 12th Result, JAC 10th Result, JAC 12th Result, CBSE 10th Result, CBSE 12th Result, Maharashtra Board SSC Result and Maharashtra Board HSC Result Online
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Eklera News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: अकलेरा-मनोहरथाना की 7 हजार बीघा जमीन महाराष्ट्र वालों के नाम, Rs.5 लाख बीघा की जमीन 3 हजार में किसानों से ले ली
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Eklera

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×