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दावा: 56 हजार शौचालय बनाए जिले में सच: किस्तें नहीं मिलीं तो अधूरा छोड़ दिया

स्वच्छता अभियान को लेकर इन दिनों सरकारी विभाग खूब दौड़-भाग रहे हैं। झालावाड़ जिले में भी शौचालय निर्माण को लेकर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 08, 2018, 03:35 AM IST

स्वच्छता अभियान को लेकर इन दिनों सरकारी विभाग खूब दौड़-भाग रहे हैं। झालावाड़ जिले में भी शौचालय निर्माण को लेकर प्रशासन तमाम दावे कर रहा है।

प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया कि जिले में 2014 से 2108 तक 2 लाख 50 हजार 646 शौचालयों का निर्माण करवाया जाना था। वित्तीय वर्ष 2017-18 में शेष बचे 56 हजार 159 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। कई पंचायतों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। ओडीएफ यानी यह क्षेत्र पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त हो चुकी है। प्रशासन के इस दावे पर भास्कर टीम ने 3 दिन तक एक उपखंड क्षेत्र और दो पंचायत समितियों के गांवों में जाकर शौचालय का हाल देखा तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिन इलाकों को प्रशासन ओडीएफ करने का दावा कर चुकी है, वहां सभी लोग शौचालय का इस्तेमाल कर रही नहीं रहे हैं। पड़ताल के दौरान शौचालय का इस्तेमाल नहीं होने के स्पष्ट 2 कारण सामने आए। पहला-शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि की किस्तें नहीं मिलना और दूसरा-कई इलाकों में पानी की कमी। बीपीएल परिवारों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर शौचालय का काम शुरू कराया, लेकिन प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने से आगे का काम अटक गया।

शौचालयों के काम बीच में अटक गए तो कबाड़ रखने के काम आ रहे

सुनेल. शौचालय में भरा कबाड़।

सुनेल: 11 हजार शौचालय नहीं बने, जहां अधूरे बने उनमें कबाड़ भरा, कारण-प्रोत्साहन राशि नहीं मिलना

सुनेल पंचायत समिति में 18 ग्राम पंचायतें ओडीएफ हो चुकी हैं, लेकिन यहां पर सभी शौचालयों का उपयोग नहीं किया जा रहा है। कई जगह शौचालय अधूरे पड़े हैं, जिनमें कबाड़ भरा है। सुनेल पंचायत समिति में 42 ग्राम पंचायतें हैं। 36 ग्राम पंचायतें ओडीएफ होना शेष है। पंचायत समिति स्तर पर 2014 से 2018 तक 29000 शौचालय बनने थे, जिसमें से लगभग 17824 ही शौचालय बन पाए हैं। 11000 शौचालय और बनाए जाने हैं।

डग. अधूरा पड़ा शौचालय।

डग: कागजों में ही सभी पंचायतें ओडीएफ, भुगतान नहीं होने से 4840 शौचालय आधे-अधूरे पड़े हैं

डग पंचायत समिति की सभी 32 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, लेकिन सच्चाई इससे इतर है। पंचायतों को भले ही ओडीएफ घोषित कर दिया गया है, लेकिन आज भी यहां लोग खुले में शौच करने जा रहे हैं। कई शौचालयों के काम भी अभी पूरे नहीं हुए हैं। 32 ग्राम पंचायत में 43 हजार 914 शौचालय बनाए जाने थे। इसमें 39,074 शौचालय बन चुके हैं अौर 23 हजार 439 शौचालय का भुगतान भी कर दिया गया है।

अकलेरा: 32 हजार शौचालय किस्त नहीं मिलने से अटके, 31 में से सिर्फ 2 पंचायतें ओडीएफ

अकलेरा पंचायत समिति में 32 हजार शौचालयों के निर्माण के लिए एकमुश्त भुगतान किया जाना था, लेकिन भुगतान नहीं होने से निर्माण अटका हुआ है। नतीजा अकलेरा पंचायत समिति की 31 ग्राम पंचायतों में से महज 2 ग्राम पंचायतें अमृतखेड़ी व चुरेलिया ही अब तक ओडीएफ हो सकी है। पंचायत समिति में वित्तीय वर्ष 2017-18 तक 36074 शौचालयों का निर्माण किया जाना था। इसमें 4 हजार शौचालय बेस लाइन के मुताबिक पूर्व निर्मित हो पाए।

फैक्ट फाइल: 252 ग्राम पंचायतें

203 पंचायतें जिला स्तर पर ओडीएफ। 108 पंचायतें अंडर जिला स्तर पर फाइनल हो चुकी है।

जिले में आठ पंचायत समितियां हैं, इसमें एक खानपुर जिला स्तर पर ओडीएफ।

लक्ष्य के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 में 56 हजार 159 शौचालय बनकर तैयार हो गए हैं। अब ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों को ओडीएफ करने के लिए जिला व अंडर जिला टीम निरीक्षण कर रही है। मुकेश शर्मा, अतिरिक्त समन्वयक, स्वच्छता अभियान

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