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महाराष्ट्र वालों के नाम जमीनों की रजिस्ट्री कराने में तहसीलदार-पटवारी समेत 10 के खिलाफ रिपोर्ट

महाराष्ट्र के लोगों के नाम किसानों की जमीनें करवाने के मामले में अब इस्तगासे के माध्यम से केस दर्ज कराने के लिए...

Danik Bhaskar | Feb 08, 2018, 03:35 AM IST
महाराष्ट्र के लोगों के नाम किसानों की जमीनें करवाने के मामले में अब इस्तगासे के माध्यम से केस दर्ज कराने के लिए किसान पहुंच रहे हैं। बुधवार को भी दो किसानों ने तहसीलदार, पटवारी, दलाल सहित 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए कोर्ट में इस्तगासा दायर किया।

न्यायालय ने परिवाद के आधार पर मामले की जांच कर रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। बिंदाखेड़ा हाल ऊंचाखेड़ा निवासी भवाना उर्फ भोना लोढा ने परिवाद में बताया कि 7 दिसम्बर को उसके लड़के भैरूलाल व उसे वैन में बिठाकर अकलेरा एक किराए के मकान में ले गए और शराब पिलाई, 2 दिनों तक उसे वहीं बिठाए रखा। शाम को जीप में बिठाकर तहसील कार्यालय लेकर गए।

वहां पर सुरेन्द्र सिंह ने 37 हजार रुपए दिए और 8 रजिस्ट्रियां कराई। रजिस्ट्री कराने से पहले उसे बताया गया कि उसके फसल का मुआवजा दिलाया जा रहा है। इसी के कागजात तैयार किए गए हैं। इसी प्रकार पाडलिया लोढान हाल नीचाखेड़ा निवासी भूलीबाई प|ी शिवलाल ने आरोपी सुरेन्द्र सिंह सहित 10 जनों पर अपराधिक षडयंत्र रचकर फरियादी की जमीन हड़पने व मुआवजे का लालच देकर 20 हजार रुपए दिए, 7 अलग-अलग रजिस्ट्री कराने की बात कही है। यह सभी रजिस्ट्रियां अलग-अलग नामों से पावर आॅफ अटार्नी के जरिए खरीदना बताया गया है। इस मामले में न्यायालय ने तहसीलदार, पटवारी, दलाल सहित 10 जनों के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। वहीं अकलेरा तहसील में जमीन से जुड़े खेल का यह बड़ा मामला सामने आया है, लेकिन फिर भी अभी तक जनप्रतिनिधि खामोश हैं। अभी तक जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में कार्रवाई करने की पहल नहीं की है।


इधर, पहले दर्ज हुए केसों की अब तक जांच भी शुरू नहीं

घाटोली थाने में इससे पहले भी इस्तगासे के आधार पर जमीन की रजिस्ट्रियां करवाने के मामले दर्ज हो चुके हैं। शनिवार को दर्ज हुए मामले के बाद अभी तक थाने से जांच शुरू नहीं हो पाई है। इस मामले में किसी से भी पूछताछ नहीं की गई है। दरअसल किसानों की जमीन से जुड़े इस बड़े खेल को पुलिस भी गंभीरता से नहीं ले पा रही है। इसी का नतीजा है कि किसानों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ती है। थानों में भटकने के बावजूद भी लोगों के केस दर्ज नहीं हो पाते हैं।

पीएम आवास योजना| 210 लोगों ने छत भी नहीं डाली, 58 की नींव ही खुदी

852 आवासों का एक साथ निरीक्षण, 16% मकानों की पहली किस्त लेने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं

भास्कर न्यूज|झालावाड़

प्रधानमंत्री आवास योजना में लगातार खामियां मिल रही हैं। मंगलवार को जिला अधिकारियों के निरीक्षण में भी कई खामियां सामने आई हैं। इसमें सबसे बड़ी बात यह निकली कि निरीक्षण किए गए मकानों में से 16 फीसदी मकानों की प्रथम किस्त लेने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाए हैं।

बुधवार को सभी अधिकारियों ने रिपोर्ट पेश की। इसी रिपोर्ट में यह खुलासा हो पाया है। इसमें सामने आया कि पहली किस्त लेने के बाद यह लोग अभी तक काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद कलेक्टर ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और प्रत्येक अधिकारी को निर्देश दिए उनके रुटीन के निरीक्षण वाले रूटों पर प्रधानमंत्री आवास योजना के निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए हैं। अब हर दिन आवासों का निरीक्षण होगा। मंगलवार को जिला स्तर से एडीएम, एसडीएम, सीईओ सहित अन्य सभी जिला स्तरीय अधिकारियों ने जिलेभर में 852 आवासों का निरीक्षण एक ही दिन में किया था। इसमें सामने आया कि 124 लोगों को प्रथम किस्त मिल चुकी है, लेकिन अभी तक इन्होंने अपने मकान की एक ईंट भी नहीं लगाई है।

58 लोगों के मकान कुर्सी से भी नीचे हैं। यह मकान ऐसे हैं जो अब तक पूरे हो जाने चाहिए थे। इसी तरह 210 लोगों ने अभी तक छत नहीं डाली है। ऐसे में केवल 92 लोग ऐसे पाए गए जो तीसरी किस्त लेने के हकदार हैं। दरअसल जिले में वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना कसे तहत 8271 आवासों के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। इसी तरह वर्ष 2017-18 में 6725 आवासों को स्वीकृति मिली थी। इसके बाद से ही इनके प्रथम किस्त की राशि जारी हुई।


कम प्रगति वालों पर बरतेंगे सख्ती, वसूली भी की जाएगी

प्रशासन ने अब प्रधानमंत्री आवास योजना में कम प्रगति वाले आवासों के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों की अब हर दिन निरीक्षण होंगे। यदि संबंधित लाभार्थी अावासों की परफार्मेंस नहीं दिखा पाया तो उससे पैसों की वसूली सहित अन्य कार्रवाई करनी शुरू हो जाएगी। वहीं काम धीमा करने वाली पर भी सख्ती की जाएगी। ताकि योजना में तेजी आ सके। गौरतलब है कि अभी तक कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने पहली किस्त उठाने के बाद भी एक ईंट भी नहीं लगाई है।