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500 युवाओं काे नहीं दिया लोन, कलेक्टर के दखल पर भी काट रहे बैंकों के फेरे

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की ओर से स्वीकृति के बाद बैंकों से मिलना था लोन भास्कर न्यूज, झालावाड़ जिले में 500...

Danik Bhaskar | Apr 06, 2018, 04:05 AM IST
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की ओर से स्वीकृति के बाद बैंकों से मिलना था लोन

भास्कर न्यूज, झालावाड़

जिले में 500 युवाओं का आत्मनिर्भर बनने का सपना टूट गया है। कलेक्टर की फटकार के बाद भी न तो नगरीय निकायों ने और न ही बैंकों ने युवाओं को ऋण देने में रुचि दिखाई।

ऐसी स्थिति में अभी तक ऋण के हकदार युवा दर दर भटक रहे हैं, जिन्हें खुद का व्यवसाय स्थापित करने के लिए कोई ऋण नहीं दे रहा है। अब वर्ष निकल जाने के बाद भी इनको ऋण नहीं दिए जाने के मामले को प्रशासन गंभीरता से ले रहा है। इनकी जांच होकर बैंकों पर कार्रवाई होगी। दरअसल राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की ओर से लोगों को स्वरोजगार के लिए ऋण दिया जाता है। इसके लिए इस साल पहली बार इसकी शुरुआत हुई।

शहरी आजीविका मिशन की ओर से ऋण के हकदार लोगों का चयन किया गया। इसके बाद बैंकों को ऋण देने के लिए फाइल भेजी गई। बैंकों ने लोगों को ऋण देने में कोई रुचि नहीं दिखाई। वित्तीय वर्ष का टारगेट खत्म होने से अब वंचित रहे लोगों को ऋण मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। इसको लेकर एक फरवरी 2018 को कलेक्टर ने अकलेरा नगरपालिका ईओ, लीड बैंक मैनेजर सहित अन्य को नोटिस भी जारी किए थे, लेकिन उसके बावजूद भी इन लोगों ने कोई प्रगति नहीं बताई। हालात यह रहे कि सेंट्रल बैंक अकलेरा में 9 में से 1 ही व्यक्ति को ऋण दिया गया। जबकि बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में 10 में से केवल 2, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अकलेरा की शाखा में 9 में से सिर्फ 1 ही व्यक्ति को ऋण दिया गय। यहीं हालात बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की रही। यहां 9 में से 1 को ही लोन दिया गया। इसी तरह यस बैंक झालावाड़ ने 7 में से एक व्यक्ति को भी ऋण नहीं दिया। स्वरोजगार करने में ऋण लेने के लिए लोग सालभर बैंकों और नगरीय निकायों के चक्कर काटते रहे, लेकिन उसके बावजूद भी उनको ऋण नहीं मिल पाया। ऐसे में 31 मार्च के बाद इन लोगों ने ऋण की आस छोड़ दी है। झालावाड़ निवासी नजमा और अकलेरा निवासी जयराम सहित बड़ी संख्या में आशार्थियों ने कई बार नगरीय निकायों और बैंकों में चक्कर काटने के बावजूद ऋण नहीं दिया गया।

कलेक्टर ने बनाई कमेटी, अब होगी जांच

बैंकों द्वारा लोन नहीं दिए जाने के मामले में दोषी बैंक कार्मिकों, नगरीय निकाय के अधिकारियों की जांच भी होगी। इसमें देखा जाएगा कि किस कारण से बैंकों ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों को ऋण नहीं दिए हैं और न ही इनके आवेदन निरस्त किए हैं। इसके लिए नगरपरिषद झालावाड़ के आयुक्त राजेंद्र सिंह चारण की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसमें लीड बैंक मैनेजर और उद्योग विभाग के जीएम को सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी अब बैंकों में जाकर जांच करेगी कि किस कारण से बैंकों ने लोगों को जोन नहीं दिया। आरबीआई के नियमानुसार केवल दो ही कारणों से ऋण की फाइल लौटाई जा सकती है। इसमें पहला कारण वह जो पहले से लाभांवित हो और दूसरा बैंक से डिफाल्टर हो उनकी पत्रावलियां लौटाई जा सकती हैं। इस जांच में यही देखा जाएगा कि ऐसे कितने लोग हैं जिनको बिना कारण के ही ऋण नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद बैंकों पर कार्रवाई शुरू होगी। इस कार्रवाई में बैंकों पर जुर्माना सहित अन्य कार्रवाई होगी।

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