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भूमि अवाप्ति के 13 साल बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला

Dainik Bhaskar

Apr 09, 2018, 04:05 AM IST

Eklera News - अकलेरा. शिविर में उपस्थित अधिकारी एवं पीड़ित किसान। भास्कर न्यूज | अकलेरा उपखंड मुख्यालय पर एसडीएम एवं रेलवे...

भूमि अवाप्ति के 13 साल बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला
अकलेरा. शिविर में उपस्थित अधिकारी एवं पीड़ित किसान।

भास्कर न्यूज | अकलेरा

उपखंड मुख्यालय पर एसडीएम एवं रेलवे के अधिकारियों की अध्यक्षता में रेलवे लाइन में आई भूमि, पेड़-पौधों और मुआवजा निर्धारण को लेकर बैठक हुई। इसमें अधिकारियों ने रेल्वे लाइन में आने वाले पुराने प्रकरणों को निर्धारित करने एवं उनकी सहमति पर चर्चा की।

शिविर में शाम 5 बजे तक भी कितने प्रकरणों का निस्तारण हुआ, इस संबंध में अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं मिल पाया था। अकलेरा क्षेत्र में वर्ष 2005 में अवाप्त भूमि के 13 साल बाद भी प्रकरणों का निस्तारण नहीं हो पाया है। करीब 61 प्रकरण अभी भी विचाराधीन चल रहे हैं। शिविर में जमाबन्दी का दुरुस्तीकरण, मुआवजा वितरण, पेड़ पौधों एवं मकानों का निर्धारण करने के बारे में पक्षकारों से चर्चा की गई। रेलवे लाइन की भूमि पर लगाए गए। 90 संतरा के पौधों का अभी तक निस्तारण नहीं किया गया। कटफला निवासी मोहनलाल, गिरधारीलाल ने इस मामले में अधिकारियों के समक्ष पक्ष रखा। इसी प्रकार घाटोली निवासी महाजन की भूमि पर रेलवे लाइन के बाहर लगाया गया अमरूद का बगीचा जेसीबी से नष्ट कर दिया गया। उसका मुआवजा अभी तक निर्धारित नहीं किया जा सका है। घीसालाल भील को अभी तक कुएं का मुआवजा नहीं मिला। अकलेरा निवासी आबिद खान ने बताया कि राजस्व विभाग ने रेलवे लाइन में वर्ष 2003 में सीमांकन कर तहसीलदार की ओर से राजस्व रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। रेलवे लाइन में आए कुएं का महज 1 लाख 49 हजार रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया। जबकि उसकी कीमत करीब 10 लाख रुपए है। शिविर में अधिकारियों की ओर से कोई संतोष प्रद जवाब नहीं दिया गया।

शिविर में यह रहे उपस्थित

रेलवे भूमि पर मुआवजा प्रकरणों के निस्तारण एवं समाधान के लिए लगाए गए शिविर में रेलवे के एक्सईएन संदीप ऑबेरॉय, जेईएन केपी सिंह, एसडीएम अश्विन के पंवार, तहसीलदार रामकिशन मीना सहित मौजूद रहे।


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