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जिस खुशी पर एसडीएम ने लिया था पुरस्कार, अब देखभाल भूले, गंदगी में पड़े दान के कपड़े

जरूरतमंदों को कपड़े उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई खुशियों की दीवार दुर्दशा का शिकार हो गई है। दीवार पर सिर्फ नाम...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 03:05 AM IST
जरूरतमंदों को कपड़े उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई खुशियों की दीवार दुर्दशा का शिकार हो गई है। दीवार पर सिर्फ नाम लिखा है, लेकिन कपड़े सड़क तक बिखरे पड़े हैं। नगरपालिका की ओर से यहां सफाई भी नहीं कराई जा रही है। यहां मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे चारों तरफ गंदगी फैल रही है। कपड़े की जगह गंदगी व कचरे के ढेर लगे हैं। अब यहां कोई भी जरूरतमंद कपड़े लेने नहीं पहुंच रहा है। उपखंड कार्यालय के सामने प्रशासन व भारत विकास परिषद के सहयोग से तीन साल पहले जरूरतमंदों को कपड़े उपलब्ध कराने के लिए खुशियों की दीवार बनाई गई। भामाशाह यहां कपड़े डालने लगे। दुर्दशा देखकर लोगों ने यहां कपड़े रखना भी बंद कर दिया है। तत्कालीन उपखंड अधिकारी केपी सिंह पहली खुशियों की दीवार बनाकर जरूरतमंदों के लिए कपड़े उपलब्ध कराने की पहल करने पर 26 जनवरी 2017 को सम्मान भी ले चुके हैं। अफसर ने सम्मान ले लिया, लेकिन खुशियों की दीवार की देखभाल करना भूल गए।

भारत विकास परिषद अध्यक्ष अग्रवाल ने कहा-अफसरों को नहीं दिख रही यहां गंदगी

भारत विकास परिषद के अध्यक्ष तुषार अग्रवाल ने बताया कि परिषद ने खुशियों की दीवार बनाने पर 80 हजार रुपए खर्च किए। जिसका शुभारंभ नवंबर 2016 में किया गया। रखरखाव व सफाई की जिम्मेदारी प्रशासन की थी। हमने प्रशासन को तीन महीने पहले अवगत करा दिया था। सफाई नहीं हो रही है। खुशियों की दीवार उपखंड कार्यालय के बाहर है। प्रतिदिन अधिकारी इस तरफ से ही निकलते हैं।


खुशियों की दीवार की सफाई के लिए नगर पालिका प्रशासन को अवगत करा दिया है। नगर पालिका ने एक सफाई कर्मचारी भी लगा रखा है। सफाई नहीं हो रही है तो ईओ से बात करूंगी। राजलक्ष्मी गहलोत, उपखंड अधिकारी गंगापुर

खुशियों की दीवार की सफाई के लिए नगरपालिका ने अलग से कोई सफाई कर्मी नहीं लगा रखा है। दीवार के रखरखाव व कपड़ों की देखभाल की जिम्मेदारी प्रशासन की है। सुरेश मीणा, ईओ नगरपालिका गंगापुर