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कोर्स पूरा नहीं, छात्र पासबुक व वनवीक सीरीज पढ़ कर दे रहे परीक्षाएं, जिनके पास पैसा वे कोचिंग से चला रहे काम
गंगापुर का राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय छात्र संख्या के लिहाज से प्रदेश के सबसे बड़े कॉलेजों में से एक है। इस समय कॉलेज में 3 हजार 546 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं लेकिन इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद सरकार महाविद्यालय में सुविधाओं के प्रति गंभीर नहीं है। शैक्षणिक स्टाफ के नजरिए से देखें तो कॉलेज में 39 प्राध्यापकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 14 पद फिलहाल रिक्त हैं, यानी करीब एक तिहाई।
प्राध्यापकों के पद रिक्त होने के कारण छात्र छात्राओं की पढ़ाई भगवान भरोसे है। जिन विषयों के प्राध्यापक कॉलेज में नहीं हैं उन विषयों के छात्र निजी कोचिंगों में या फिर पासबुक, वनवीक सीरिज या बाजार में मिलने वाले नोट्स से अपनी तैयारी करते हैं। कॉलेज में प्राचार्य का पद भी रिक्त है और 31 जनवरी को प्राचार्य प्रो. रामकेश मीणा के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रो. बृजेंद्र सिंह मीणा कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में कार्य कर रहे हैं।
छात्रों की जुबानी : पीजी कॉलेज सिर्फ नाम का ही
> गंगापुर सिटी एक शिक्षा के क्षेत्र में जाना माना नाम है लेकिन यहां पीजी कॉलेज बस नाम का ही है। साइंस फैकल्टी में भी पीजी विषय खुलने चाहिए। सीताराम गुर्जर, बीएससी गणित, तृतीय वर्ष।
> यूजी और पीजी स्तर पर अंग्रेजी के प्राध्यापक नहीं हैं, मजबूरी में निजी कोचिंगों से पढ़ाई करनी पड़ती है। निजी कॉलेजों में तो कोर्स पूरा होने के बाद रिवीजन भी हो गया। अंजलि चौरसिया, बीएससी, तृतीय वर्ष।
> अर्थशास्त्र सहित प्रमुख विषयों के प्राध्यापक नहीं होने के कारण निजी कोचिंग में प्रवेश लेकर तैयारी करनी पड़ रही है। बाजार से नोट्स भी खरीदने पड़ रहे हैं। खुद को अपने बलबूते तैयारी कर एग्जाम देना पड़ रहा है। जानू बैरागी, बीए अर्थशास्त्र, प्रथम वर्ष।
> सक्षम परिवारों के स्टूडेंट्स तो कोचिंग और नोट्स का खर्च उठा लेते हैं लेकिन कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए तो सरकार को कॉलेज में ही स्टाफ की व्यवस्था करनी चाहिए। शीतल सेजवाल, बीए अर्थशास्त्र, प्रथम वर्ष।
रेस सेंटर बना मजाक, एक सत्र में 18 पीरियड कैसे हो कोर्स पूरा
कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. बी.एस. मीणा बताते हैं जिन विषयों के प्राध्यापक नहीं हैं उनके लिए जिला स्तर पर रेस सेंटर की व्यवस्था है। इस व्यवस्था के तहत जिस कॉलेज में जिस विषय के प्राध्यापक नहीं हैं उस विषय के प्राध्यापक अन्य कॉलेज से बुलाए जाते हैं, ये अतिथि प्राध्यापक 6-6 कालांश के तीन सत्र लेते हैं यानी एक सत्र में 18 कालांश और इन्हीं 18 कालांशों में उन्हें साल भर का कोर्स पूरा कराना होता है। अब यह व्यवस्था छात्रों के साथ मजाक से ज्यादा तो कुछ नहीं है।
बामनवास : सात साल से स्कूल के दो कमरों में चल रहा कॉलेज, नया भवन बनकर तैयार, पर उद्घाटन का इंतजार
बामनवास में 7 साल पहले खोला गया कॉलेज आज भी सीनियर माध्यमिक विद्यालय के दो कमरों में संचालित है जहां छात्राओं को टॉयलेट तक की सुविधा नहीं है। समाजसेवी मनीष बामनवास ने बताया कि लोगों से चंदा एकत्रित कर टायलेट बनवाए गए लेकिन उन पर गेट तक नहीं लग पाए। हालांकि कॉलेज का नया भवन बनकर तैयार है बस बिजली फिटिंग जैसे कुछ काम ही बकाया हैं लेकिन इस भवन में अभी तक कॉलेज को शिफ्ट नहीं किया गया है। स्टाफ की स्थिति यहां ठीक है, प्राध्यापकों के 7 में से सिर्फ अर्थशास्त्र के प्राध्यापक का पद ही रिक्त है।
छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक
क्षेत्र में बालिका शिक्षा के प्रति किस कदर जागरुकता आई है इसका उदाहरण गंगापुर और बामनवास के राजकीय महाविद्यालयों में देखने को मिल रहा है। गंगापुर कॉलेज में गत 6 वर्षों से छात्रों के मुकाबले छात्राओं की संख्या अधिक है। इस वर्ष महाविद्यालय में 1754 छात्र है जबकि छात्राओं की संख्या 1792 है। इसी प्रकार बामनवास में 256 के नामांकन में से 190 छात्राएं हैं। हालांकि दोनों ही जगह अलग से छात्रा महाविद्यालय नहीं है। छात्राओं की संख्या को देखते हुए दोनों स्थानों पर महिला महाविद्यालय खोलने चाहिए। इससे महिला शिक्षा के प्रति छात्राओं में और रूझान बढ़ेगा।
हर वर्ष 85 फीसदी से अधिक रहता रिजल्ट, इस बार भगवान भरोसे
प्राध्यापकों के बिना छात्र अपनी मेहनत से परिणाम दिखाते हैं। गंगापुर के सरकारी कॉलेज में तीन साल में 85 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट रहा है। सत्र 2016-17 में 94.87, सत्र 2017-18 में 88.9, सत्र 2018-19 में 86.2 प्रतिशत परिणाम रहा।
परीक्षाएं शुरू, कोर्स आधा ही
कॉलेज में स्नातक स्तर की परीक्षाएं 4 मार्च से शुरू हो चुकी हैं लेकिन अधिकांश विषयों में 50 प्रतिशत कोर्स ही हो पाया है। जिन विषयों के प्राध्यापक नहीं हैं उनकी तो किताबें तक नहीं खुल पाईं। महाविद्यालय के छात्रों ने कई बार कॉलेज में रिक्त पदों को भरने की मांग की, लेकिन विद्यार्थियों की मांग पर कॉलेज आयुक्तालय और सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। विद्यार्थी अब खुद ही नोट्स आदि से तैयारी कर परीक्षा दे रहे हैं।
इन विषयों के पद रिक्त
राजकीय महाविद्यालय में अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, गणित के 2-2 पद स्वीकृत है लेकिन दोनों ही रिक्त है। व्यवसाय प्रशासन में एकमात्र पद है जो भी रिक्त है। इसी तरह राजनीति विज्ञान के 8 में से 2, इतिहास के 3 में से 2, भौतिक शास्त्र के 2 में से एक, एबीएसटी के 3 में से 2 पद रिक्त हंै।
जल्द ही नए भवन में शिफ्ट करेंगे
छात्र संख्या के हिसाब से तो वर्तमान में चल रहे भवन में भी कोई खास समस्या नहीं है। शीघ्र ही कॉलेज को नए भवन में शिफ्ट किया जाएगा। सिर्फ अर्थशास्त्र के प्राध्यापक का पद ही रिक्त है।
योगेन्द्र कुमार धामा, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय बामनवास
फिलहाल 14 पद रिक्त हैं
छात्रसंख्या के लिहाज से गंगापुर बड़ा कॉलेज है लेकिन 14 पद फिलहाल यहां रिक्त हैं। पीजी स्तर पर कला में राजनीति विज्ञान और कॉमर्स में एबीएसटी विषय उपलब्ध हैं। कुछ दिनों तक साइंस में एसएफएस स्कीम चली लेकिन अब यह बंद है।
प्रो. बृजेंद्रसिंह मीणा, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय पीजी महाविद्यालय, गंगापुर सिटी
दाे कॉलेजों में 46 मेंं से 15 प्राध्यापकों के पद खाली
बामनवास | राजकीय महाविद्यालय का नया भवन, काॅलेज अब भी राउमावि के दाे कमराें में ही चल रहा है, जहां टॉयलेट तक नहीं।