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अधिवक्ता कल्याण कोष पर हस्ताक्षर न कर विधेयक को पुनर्विचार के लिए भेजें
अधिवक्ता कल्याण कोष पर हस्ताक्षर ना कर विधेयक को पुनर्विचार के लिए भेजने की मांग को लेकर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष अनिल दुबे के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को एसडीएम कार्यालय में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
अध्यक्ष अनिल दुबे ने बताया कि अधिवक्ता कल्याण कोष कानून में संशोधन के लिए प्रस्ताव 2019 में पारित किया गया था, जिसमें विभिन्न मदों में बढ़ोत्तरी की गई थी। सहायता व पेंशन राशियां 15 लाख तक बढ़ाया गया था। साथ ही वकालतनामा टिकट 25 रुपए से 50 रुपए व आजीवन सदस्यता राशि 17 हजार 500 रुपए से बढ़ाकर 30 हजार रुपए का प्रस्ताव किया था लेकिन राजस्थान सरकार द्वारा 7 मार्च को अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) 2020 विधान पारित किया गया, जो कि बार काउंसिल के प्रस्ताव के विपरीत है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की आजीवन शुल्क राशि बढ़ाना अधिवक्ता विरोधी व मनमाना है।
नए प्रावधानों में आजीवन सदस्यता शुल्क 17 हजार 500 रुपए से बढ़ाकर एक लाख व वकालतनामा शुल्क 25 रुपए से अधीनस्थ न्यायालयों में 100 रुपए तथा हाइकोर्ट में 200 रुपए कर दिया गया। इसी तरह कल्याण कोष में सदस्यता प्रवेश राशि 400 रुपए से बढ़ाकर 800 रुपए कर दी गई है। सदस्यों द्वारा जमा करवाई जाने वाली वार्षिक चन्दा राशि 5 वर्ष की वकालत वालों की 300 से 500 रुपए, 5 से 10 वर्ष तक वकालात करने वालों की 750 से 1500 रुपए व 10 वर्ष से अधिक वकालत वालों की 1250 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपए की गई है। यह बढ़ोतरी मनमानी व अधिवक्ता हितों के विरुद्ध है। अधिवक्ता समाज में इस मनमाने कानून के प्रति गहरा असंतोष है। उन्होंने शीघ्र ही कानून में संशोधन की मांग की।
ज्ञापन देने वाले अधिवक्ता अध्यक्ष अनिल दुबे, एडवोकेट नवीन शर्मा, एडवोकेट मीना शर्मा, तन्मय श्रीवास्तव, राहुल बजाज, विवेक पाठक, राजेश शर्मा, संजय मीना, कृष्णा शर्मा, कमलेश वैष्णव, हर्षनंदन योगी, नीलम शर्मा, रामू माली, हुकम सिंह गुर्जर, घनश्याम सिंह, गजेंद्र शर्मा, संतोष जाटव, सियाराम मीना, दिनेश शर्मा, संतोष वर्मा, संतोष निराला सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद थे।