खुदा से देश में अमन-चैन-खुशहाली और अच्छी बारिश के लिए मांगी दुआ

Gangapur News - भास्कर न्यूज | गंगापुर सिटी रमजान के दूसरे जुमे की नमाज शुक्रवार दोपहर विभिन्न मस्जिदों में हुई। जामा मस्जिद...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:01 AM IST
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भास्कर न्यूज | गंगापुर सिटी

रमजान के दूसरे जुमे की नमाज शुक्रवार दोपहर विभिन्न मस्जिदों में हुई। जामा मस्जिद में दोपहर करीब पौन बजे मुअज्जिन सलीम घाटिया द्वारा पहली अजान के साथ ही नमाजियों की भीड़ उमड़नी शुरु हो गई थी। इसके बाद मौलाना रेहान खां ने नमाज अदा करवाई। उन्होंने खुदा से देश में अमन-चैन व खुशहाली और बारिश की दुआ मांगी।

नमाज से पहले तकरीर में पेश इमाम मौलाना खलीक अहमद ने रोजे की अहमियत बताते हुए कहा कि रोजा महज भूखे और प्यासा रहना नहीं है बल्कि गरीबों की परेशानियों को महसूस कर उन्हें दूर करना और अपनी इच्छाओं पर काबू पाना है। रोजा सही जिंदगी जीने का तरीका सिखाता है। इसके बाद खुतबा पढ़ा जिसे मोमिनों ने शांति से सुना। इस दौरान नमाजियों ने बुराइयों का त्याग करने, गरीबों की मदद करने, बेरोजगारों को रोजगार और बीमारों के अच्छे होने की दुआ की। नमाज के दौरान मस्जिद परिसर खचाखच भर गया। ऐसे में नमाजियों ने दूसरी मंजिल पर नमाज अदा की। इसी प्रकार शहर की तकिया शाह, नामनेर, इस्लामपुरा वाली अक्शा मस्जिद, चूलीगेट मदीना मस्जिद व राजीव कॉलोनी वाली मस्जिद व बड़ी उदेई की जामा मस्जिद आदि में नमाज अदा की गई। एक नेकी का सबाब कई गुणा अधिक होने के कारण लोगों ने रोजा रखकर जुमे की नमाज अदा की। उन लोगों ने भी रोजा रखा जो किसी मजबूरी की वजह से पूरे महीने के रोजे नहीं रख पा रहे हैं।

इबादतों का दौर जारी

दिन भर रोजे से रहकर पांच वक्त की नमाज, शाम को इफ्तारी की तैयारी, रोजा इफ्तार मगरिब की नमाज और फिर रात को ईशा की नमाज के बाद तराबी यानि रात करीब 11 बजे तक इबादतों का दौर चलता है। इस दौरान रात में लोग मुश्किल से तीन से चार घंटे सो पाते हैं। दिन भर तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप भी रोजेदारों के हौसलों के आगे पस्त दिखाई देती है। रोजेदारों द्वारा दिन में रोजे रखे जा रहे हैं और रातों को कयाम करते हुए अपने गुनाहों की बख्शीस और अमन-चैन की दुआएं मांगी जा रही है। इशा की नमाज के बाद होने वाली तरावीह की नमाज में बड़ी संख्या में नमाजी आ रहे हैं। मस्जिदों में भारी तादाद में अकीदतमंद अलसुबह से लेकर देर रात तक खुदा की इबादत में लगे हुए हैं। रोजेदारों ने बताया कि माहे रमजान में इबादत दिल को सुकून देती है। बच्चे हों या फिर बड़े अधिकांश महिला-पुरुष तथा दिन में मीलों का सफर तय करने वाले पशुपालक भी विषम परिस्थितियों में भी रोजे रखकर माहे रमजान की इबादत में लगे हैं।

महिलाओं का काम बढ़ा

रमजान में मुस्लिम महिलाओं का कामकाज और जिम्मेदारी अधिक बढ़ गई है। रोजा नमाज एवं रब की इबादत के अलावा घरेलू कार्य संभालने में दोहरी जिम्मेदारी भी रहती है। अलसुबह तीन बज उठकर सहरी के लिए खाना तैयार करना तथा शाम को रोजा इफ्तार के लिए भोजन बनाने की दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। रोजे की हालत में रहकर दीन के साथ घरेलू कार्य भी करने पड़ रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को अधिक काम करना पड़ रहा है।

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