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अब सरकारी डॉक्टर नहीं ले सकेंगे मनमानी फीस, परामर्श पर्ची के साथ फीस की रसीद भी देनी होगी

एक वर्ष पहले
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सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों को अब प्राइवेट प्रैक्टिस के दौरान मरीज को अपने लेटरपैड पर बीमारी को लेकर परामर्श व दवा लिखने के साथ-साथ फीस की रसीद भी देनी होगी। इस स्लिप पर डॉक्टर का नाम,पता,विशेषता सहिता शुल्क कितना लिया गया है, वे सब कुछ अंकित करवाना होगा। इस बारे में चिकित्सा विभाग के निदेशालय की डॉक्टर्स के द्वारा लंबे समय से मनमर्जी का शुल्क वसूलने की शिकायते मिल रही थी। इसके बाद निदेशालय ने विशेष आदेश जारी किए है। इन आदेशों में किस ग्रेड के चिकित्सक को कितना शुल्क लिए जाने के लिए अधिकृत किया गया है। निदेशालय के इन आदेशों का आमजन पर सबसे प्रभाव पड़ेगा। अब चिकित्सक मरीजों से चाकर भी अधिक राशि नहीं वसूल सकेंगे। निदेशालय स्तर पर कार्रवाई होने के भय से बोर्ड लगाएंगे। इससे पता चल जाएगा कि किस डॉक्टर का कितना शुल्क है।

चिकित्सकों का शुल्क निर्धारित, यह सूची

निदेशालय की सूची में मेडिकल ऑफिसर, मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉक्टर, सरकारी व प्राइवेट प्रेक्टिस वाले डॉक्टर्स शामिल है। गांवों में लगे मेडिकल ऑफिसर प्रति मरीज 75 रुपए शुल्क लेंगे। सीनियर मेडिकल ऑफिसर, जूनियर विशेषज्ञ, सहायक आचार्य, ग्रामीण अंचल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर 100 रु फीस लेंगे। एसोसिएट प्रो. व सी. स्पेशलिस्ट 125 रु प्रति मरीज शुल्क लेंगे। आचार्य ग्रेड के लिए 150 रु शुल्क होगा। सीनियर प्रोफेसर 200 सौ रु शुल्क लेंगे।

इसलिए जारी किए आदेश

निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के अतिरिक्त निदेशक द्वारा जारी आदेशों में लिखा है कि डॉक्टर अपने निवास पर रोगियों को देखने के दौरान निर्धारित शुल्क से अधिक फीस ले रहे है। मरीज को फीस की रसीद नहीं दी जाती। डॉक्टरों ने परामर्श शुल्क का डिस्प्ले भी नहीं लगा रखा है।

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