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अब प्रकृति ने भी भृकुटी तानी

एक वर्ष पहले
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उप तहसील मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण अंचल में किसानों की समस्या थमने की नाम नहीं ले रही है। किसान अपनी मेहनत की फसल को खेतों में लोटपोट होते देख काफी चिंचित है। एक तो प्राकृतिक आपदा फसल को हाथ नहीं लगने देती। दूसरी तरफ क्षेत्र में आवारा पशुओं की भरमार भी किसानों के लिए सिरदर्द बने हुए है। रात के वक्त किसानों के रखवाली करने के बावजूद आवारा जानवर मेहनत की फसल को चट कर जाते है।

शुक्रवार को एक बार फिर मौसम चक्र ने पलटा खाया। हल्की-फुल्की धूप निकलने के बाद शुक्रवार शाम से ही मौसम चक्र में परिवर्तन देखा गया। देर रात को बहुत तेज हवाएं चली जिससे खेतों में पक कर तैयार खड़ी फसलें लोटपोट हो गई। अल सुबह बूंदाबांदी का दौर भी चला। बूंदाबांदी होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी। गुरुवार को आसपास के क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि के चलते आसपास के क्षेत्र में ठंडी हवाएं चली, जिससे ऐसा लगा मानो सर्दी ने वापस अपने कदम रख दिए हो। वहीं कस्बे में शनिवार सुबह घना कोहरा छाया रहा। कोहरे की वजह से वाहन चालकों को खासी परेशानी हुई। उन्हें दिन में ही अपने वाहनों की लाइट जलानी पड़ी। लोगों ने सर्दी महसूस की। एक सप्ताह पूर्व जिन लोगों ने अपने गर्म कपड़ों को संभाल कर रख दिया था।

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