Hindi News »Rajasthan »Ghatol» प्रदेश के 100 से ज्यादा निजी स्कूलों की मान्यता अधर में

प्रदेश के 100 से ज्यादा निजी स्कूलों की मान्यता अधर में

शैक्षिक सत्र 2017-18 समाप्ति की ओर है, लेकिन प्रदेश के 100 से ज्यादा निजी स्कूलों में क्रमोन्नति, अतिरिक्त संकाय या...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 20, 2018, 02:55 AM IST

शैक्षिक सत्र 2017-18 समाप्ति की ओर है, लेकिन प्रदेश के 100 से ज्यादा निजी स्कूलों में क्रमोन्नति, अतिरिक्त संकाय या अतिरिक्त माध्यम को लेकर शिक्षा विभाग से मान्यता अटकी हुई है। इसके चलते इन स्कूलों में पढ़ रहे हजारों बच्चों का भविष्य संकट में है।

दरअसल, माध्यमिक शिक्षा विभाग को इनके आवेदन किए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन विभागीय जांच और आपत्तियों के नाम पर इनकी मंजूरियां निदेशालय, बीकानेर से नहीं हो पा रही। निजी स्कूलों का दावा है कि उन्होंने विभागीय टाइम फ्रेम के अनुसार औपचारिकताएं पूरी कीं। फिर विभागीय जांच दलों ने जायजा भी लिया और ओके भी किया। इसके बाद उच्चतर कक्षाओं में बच्चों को प्रोविजनल एडमिशन दिए गए। सितंबर-अक्टूबर तक भी विभाग ने स्थिति स्पष्ट नहीं की, वरना ऐसे बच्चों को हटा लिए जाते, लेकिन अब मान्यता के नाम पर हाथ खड़े करने जैसे हालात पर इन बच्चों की परीक्षाएं कैसे होंगी और इस साल का क्या होगा, इसे लेकर शिक्षण संस्थाएं उलझकर रह गई हैं।

फौरी कार्रवाई के लिए फाइलें बीकानेर शिक्षा निदेशालय में अटकी, जिलास्तर पर अधिकारी नहीं दे पा रहे जवाब

अकेले बांसवाड़ा में उलझे हैं 11 स्कूल

उच्च प्राथमिक से माध्यमिक अौर माध्यमिक से उच्च माध्यमिक के लिए क्रमोन्नत, अतिरिक्त संकाय शुरू कराने और अतिरिक्त माध्यम से अध्यापन के लिए इस साल में बांसवाड़ा जिले के घाटोल, गनोड़ा, बांसवाड़ा, बागीदौरा समेत विभिन्न इलाकों की 60 निजी स्कूलों ने आवेदन किए, जिनमें से 11 को अब तक विभाग ने मान्यता नहीं दी है। बाकायदा इन स्कूल से विभाग ने औपचारिकताएं करवाते हुए 15 हजार रुपए राशि डीईओ सैकंडरी और बालिका शिक्षा फाउंडेशन के नाम 35 हजार रुपए के डीडी प्रत्येक कैटेगरी की मान्यता के लिए अलग-अलग लिए गए। अब इन स्कूलों की परेशानी प्रवेशित बच्चों और अगले सत्र 2018-19 में प्रवेश कराने- नहीं कराने को लेकर है ही, मुसीबत यह भी है कि पुराने आवेदन पर विचार नहीं करने पर नए के लिए और 50-50 हजार रुपए की चपत लगेगी।

विभागीय टीमों ने पूरी जांच-पड़ताल के बाद पत्रावलियां निदेशालय भेजी। इसके बाद भी क्रमोन्नति, अतिरिक्त संकाय की मान्यता नहीं देने से निजी संस्थाएं परेशान हैं। अगर मान्यता नहीं देनी थी, तो सितंबर में ही बता दिया होता तो दिक्कतें नहीं होती। -तरुण त्रिवेदी, जिलाध्यक्ष, गैर सरकारी शिक्षक संस्थान

ऑब्जेक्शन के कारण कुछ स्कूल रह गए होंगे। कितने ओके किए और कितनों को इनकार किया, इसकी जानकारी करेंगे। दोबारा विज्ञप्ति निकालेंगे। -सुरेंद्रसिंह भाटी, उपनिदेशक, आरटीई निदेशालय बीकानेर

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Ghatol

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×