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शहर से 30 किमी दूर उदयपुर हाईवे पर सुंदनी में हादसा

भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा/चिड़ियावासा/गनोड़ा बस में बैठकर स्कूल जा रही 12 साल की मासूम प्रतीक्षा पटेल को क्या...

Dainik Bhaskar

Feb 11, 2018, 03:00 AM IST
शहर से 30 किमी दूर उदयपुर हाईवे पर सुंदनी में हादसा
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा/चिड़ियावासा/गनोड़ा

बस में बैठकर स्कूल जा रही 12 साल की मासूम प्रतीक्षा पटेल को क्या मालूम था कि वह आज के बाद कभी स्कूल भी नहीं जा सकेगी। बस में बैठकर कुछ ही दूर पहुंची थी कि सामने से आ रहे पत्थरों से ओवरलोड डंपर के चालक ने स्कूल बस को टक्कर मार दी।

टक्कर लगते ही कई पत्थर बस की खिड़कियों के शीशे तोड़कर अंदर घुस गए और एक पत्थर सिर में लगने से प्रतीक्षा की मौत हो गई। बस में बैठे 5 और बच्चे भी गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना सुंदनी गांव में बांसवाड़ा-उदयपुर स्टेट हाईवे-32 पर शनिवार को सुबह 7.30 बजे हुई।

स्कूल बस का चालक मुंगाणा गांव से बच्चों को गनोड़ा गांव में संचालित लिटिल एंजल स्कूल ले जा रहा था। तभी संकरे पुल पुल पर सामने से आ रहे पत्थरों से भरे ओवरलोड डंपर और बस में भिड़ंत हो गई। इससे डंपर में भरे पत्थर बस के अंदर गिरने लगे और अंदर बैठे बच्चे घायल हो गए। टक्कर मारने के बाद कुछ ही दूर पर जाकर डंपर भी पलट गया। चालक और खलासी फरार हो गए।

5 दिन पहले ही कुवैत गए थे प्रतीक्षा के पिता

प्रतीक्षा के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उसके पिता महावीर पटेल कुवैत में कार्य करते हैं। जो पांच दिन पहले ही वापस कुवैत गए हैं। उन्होंने जाते समय कहा था कि वे उसके लिए चाॅकलेट भेजेंगे।

पत्थरों के ओवरलोड डंपर ने संकरी पुलिया पर स्कूल बस कोे टक्कर मारी भीतर बैठे बच्चों पर गिरे पत्थर, 12 साल की छात्रा की मौत, 5 घायल

हादसे को भयावहता को दर्शाती बस के अंदर की तस्वीर

डंपर के टकराने के बाद बडे़-बडे़ पत्थर बस का शीशा तोड़ कर अंदर बैठे बच्चों के सिर पर आ िगरे।

मानवता-निजी बस चालक सवारियाें को उतार घायलों को ले गया अस्पताल

हादसे के बाद लोगों ने 108 एंबुलेंस को कॉल किया, लेकिन वह समय पर वहां नहीं पहुंच सकी। इसी बीच बच्चों की खराब हालत को देख वहां से गुजर रहे मिनी बस के चालक लालाभाई ने बस रोककर अपनी सवारियों को वहीं उतार दिया और बच्चों को लेकर तुरंत अस्पताल के लिए रवाना हुआ। इसी बीच घटना की सूचना मिलने पर डॉक्टर, सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी और सदस्य एमजी अस्पताल में घायलों के पहुंचने से ही सेवा के लिए तैयार थे। इसके चलते बच्चों को त्वरित इलाज भी मिला और उनका दर्द कम हुआ। प्रारंभिक इलाज के बाद बच्चों को उदयपुर रैफर कर दिया गया। घायल होने वालों में लोकेश पाटीदार (10) पुत्र पवन पाटीदार, सुनील (11) पुत्र पदम, विष्णु (12) तेजकरण, योगेश (13) पुत्र देवेंग, मोहित (14) पुत्र रमेश शामिल हैं। इस बस में मूंगाणा गांव के एक ही परिवार और रिश्तेदारी के 6 बच्चे शामिल थे। बच्चों की चीख सुनकर गांव की अनिता तेली, सरला जैन, संतोष नाई बस के अंदर पहुंची और घायलों काे बाहर निकाला।

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1. सुनील 2. योगेश 3. विष्णु

4. मोहित

गंभीर घायल लोकेश।

(फाइल फोटो)

शर्मनाक : पुलिस, खनिज विभाग और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाते तो आज इस मासूम का ऐसे मुंह नहीं ढंकना पड़ता

मूंगाणा गांव की 12 साल की बेटी प्रतीक्षा की मौत ने उसके सहेलियों की मुस्कान छीन ली। परिजन, ग्रामीण और उसके साथियों का एक ही सवाल, इस हादसे के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है। डंपर चालक तो सीधेतौर पर जिम्मेदार है, लेकिन तीन और सरकारी महकमे पुलिस प्रशासन, खनिज विभाग और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की अनदेखी भी इस हादसे का बड़ा कारण बनी। ओवरलोड डंपर पर कार्रवाई करने का अधिकार खनिज विभाग और पुलिस के पास है। अगर रवाना होते या बीच में उसे रोक दिया जाता तो यह हादसा नहीं होता। तीसरा हादसे का कारण संकरा पुल भी है, जिसे ठीक कराने की जिम्मेदारी पीडल्यूडी के इंजीनियरों की है। बांसवाड़ा से उदयपुर के बीच 165 किमी मार्ग पर 118 संकरे पुल हैं। इस मार्ग की प्रोजेक्ट रिपोर्ट पूर्व में पीडब्ल्यूडी घाटोल, गढ़ी और बांसवाड़ा ने मिलकर बनाई थी। जहां पुलों की चौड़ाई बढ़ाने के लिए 638 लाख रुपए के प्रस्ताव भी तैयार किए गए, लेकिन वित्त विभाग से इसकी स्वीकृति नहीं मिल पाई। जिसका खामियाजा प्रतीक्षा को जान देकर चुकाना पड़ा।

छात्रा प्रतीक्षा।

आक्रोश : हाईवे जाम, 3 घंटाें तक समझाइश

क्षेत्रवासियों ने पुलिस प्रशासन, खनिज विभाग, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए उदयपुर हाईवे जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मार्ग पर संकरी पुलिया बहुत ज्यादा हैं। विकट मोड़ पर रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड तक नहीं है। रोजाना भारी वाहन ओवरलोड जाते हैं, लेकिन कोई रोक-टोक नहीं की जाती। करीब 3 घंटे तक हाईवे जाम रहा। 2 घंटे बाद तहसीलदार आए तो आक्रोशित महिलाएं कलेक्टर को बुलाने की मांग पर अड़ गई। ब समझाइश के बाद ग्रामीणों ने रास्ता खोला।

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महिलाओं ने कहा- डंपर रोको, पुल ठीक कराओ

गांव की महिलाएं वहीं पर ही जाम लगाकर बैठ गई और प्रशासन के अधिकारियों के सामने डंपर रोकने और पुल ठीक कराने की गुहार लगाती रही। स्कूल बस की डंपर से भिड़ंत के बाद घटनास्थल पर बस के अंदर और बाहर किसी बच्चे की पेंसिल तो किसी के जूते-चप्पल पड़े दिखे। किसी की पानी की बोतल और टिफिन बिखरे पड़े दिखे। जिसे देख मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखेंभर आई।

रिकॉल : स्कूल बसों के अब तक हुए हादसे




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