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500 साल पुराने गोपेश्वर महादेव मंदिर पर महाशिवरात्रि पर भरेगा मेला

उपखंड घाटोल की खमेरा ग्राम पंचायत के भाटिया गांव में पहाड़ी पर गुफा में स्थित प्राचीन गोपेश्वर महादेव मंदिर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 09, 2018, 03:05 AM IST

उपखंड घाटोल की खमेरा ग्राम पंचायत के भाटिया गांव में पहाड़ी पर गुफा में स्थित प्राचीन गोपेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र में इस साल भी महाशिवरात्रि पर मेला भरेगा। इसमें बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और प्रतापगढ़ से हजारों श्रद्धालु आकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। हालांकि पुरातत्व विभाग की लापरवाही के कारण इस प्राचीन मंदिर को कोई खास पहचान नहीं मिल पाई।

यहां की गुफाएं मंदिर को एक अलग ही पहचान देती है। पुजारी ने बताया कि लोक मान्यता के अनुसार सैकड़ों साल पहले यहां पर घना जंगल था। उस दौरान मंदिर के सामने से बड़ी नदी बहती थी, जो अब नाला बन गया है।

करीब 500 साल पहले जंगल में कुछ ग्वाले, गाय, भैंस, बकरियां चराने आया करते थे। वह मवेशियों को नदी में पानी पिलाने के लिए गए तो किनारे पर चट्टानों के बीच एक छोटा सा गहराई वाला छेद दिखाई दिया। ग्वालों ने उस छेद में पत्थर डालकर देखा तो वह गहराई में चला गया। इसके बाद मशाल जलाकर छेद में झांककर देखा तो अंदर एक बड़ी गुफा नजर आई। इसमें शिवलिंग और नंदी था। ग्वालों ने इसकी सूचना गांव वालों को दी। सारे ग्रामीणों ने चट्टान को तोड़कर गुफा में जाने के लिए रास्ता बनाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। उस दौर में मशीन संसाधन नहीं होने के कारण सुरंग में जाने का रास्ता नहीं बना सके। एक दो लोग रेंगकर गुफा में घुसे, जहां शिवलिंग, नंदी, भगवान गणेशजी की स्थापित मूर्तियां मिली। ग्रामीणों ने इसे भगवान का चमत्कार बताते हुए रोज पूजा-अर्चना करने का निर्णय लिया।

गुफा में जाने का रास्ता जोखिमभरा होने के कारण लोग कुछ समय ही भगवान की पूजा-अर्चना कर पाए। भगवान की पूजा-अर्चना बंद होने के कुछ दिनों बाद गुफा के आगे से एक बड़ी चट्टान टूटकर खिसक गई। अब गुफा में जाने का रास्ता बन गया। मंदिर के आगे गिरी चट्टान पर बड़े पदचिह्न बने हुए थे। लोगों ने इसे भगवान शिवजी का चमत्कार व चट्टान पर स्वयं भगवान के पदचिह्न मानते हुए फिर से गुफा में पूजा-अर्चना करनी शुरू कर दी।

धर्म-समाज-संस्था

भाटिया गांव में पहाड़ी पर स्थित प्राचीन गोपेश्वर महादेव मंदिर।

मंदिर की गुफा में बनी हैं 3 सुरंग, निकलती है प्रतापगढ़ के गौतमेश्वर में

गुफा में अंदर शिवलिंग के तीनों ओर 3 सुरंग थी। इन सुरंगाें के अंदर जाने का रास्ता दो से तीन फीट का ही था। कुछ साधु-संतों और ग्रामीणों ने देखा कि सुरंग के अंदर पगडंडी बनी हुई है, जिसके किनारे नाला बह रहा है। बुजुर्गों के अनुसार इस सुरंग का पता लगाया तो यह प्रतापगढ़ जिले के प्रसिद्ध गौतमेश्वर महादेव मंदिर में निकलती है।

पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण अस्तित्व खो रही गुफा

फिलहाल मंदिर के संचालन के लिए गांव की कमेटी बनी हुई है। पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण प्राचीन मंदिर, गुफा और सुरंग अपना अस्तित्व खो रहे हैं। मंदिर के बाहर सिंचाई विभाग ने नहर बना दी। मंदिर संचालन कमेटी ने गुफा के अंदर की तीनों सुरंगों को बंद करवा दिया। दूसरी ओर, मंदिर के बाहर पड़ी बड़ी चट्टान को भी सिंचाई विभाग ने मिट्टी डालकर दबा दिया।

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