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कुशलगढ़ क्षेत्र से लेकर कुंभलगढ़ तक वन्यजीव कॉरिडोर की संभावना तलाशी

बांसवाड़ा| पर्यटन की संभावना वाले बांसवाड़ा में अब कुशलगढ़ से कुम्भलगढ़ तक वन्यजीव कॉरिडोर के रूप में एक नई शुरुआत हो...

Dainik Bhaskar

Feb 04, 2018, 03:55 AM IST
कुशलगढ़ क्षेत्र से लेकर कुंभलगढ़ तक वन्यजीव कॉरिडोर की संभावना तलाशी
बांसवाड़ा| पर्यटन की संभावना वाले बांसवाड़ा में अब कुशलगढ़ से कुम्भलगढ़ तक वन्यजीव कॉरिडोर के रूप में एक नई शुरुआत हो सकती है। जिला पर्यटन उन्नयन समिति तथा वागड़ नेचर क्लब ने इसकी पहल की है।

शनिवार को समिति व क्लब सदस्यों ने क्षेत्र का दौरा कर संभावनाएं तलाशी। समिति के संरक्षक जगमालसिंह, नेचर क्लब के कमलेश शर्मा, घाटोल रेंजर गोविन्दसिंह राजावत, पर्यावरण प्रेमी विक्रमसिंह गरनावट, महिपालसिंह गरनावट, भंवरलाल गर्ग, माधुराजसिंह, फोरेस्टर रमेश मीणा, दिनेशचंद्र जैन ने घाटोल रेंज के लखेरिया गांव में खांटिया तालाब, घाटोल डगिया तालाब, हेरोडैम, देलवाड़ा, जगपुरा तालाब और जलाशयों का निरीक्षण किया और यहां की जैव विविधता, वन्यजीवों की उपस्थिति तथा पक्षियों व अन्य सरिसर्पों की अनुकूलता के बारे में जानकारियां संकलित की।

इसलिए है यह क्षेत्र विशेष

जगमालसिंह ने बताया कि कुशलगढ़ के वनक्षेत्र से लेकर जोगीमाल, सिंगपुरा, भंडारिया, आनन्द सागर, चाचाकोटा क्षेत्र, माहीडैम, जगमेर अमरथून, घाटोल, पीपलखूंट, सीतामाता अभयारण्य, जयसमंद अभयारण्य, केवड़ा वनक्षेत्र होते हुए कुम्भलगढ़ तक सघन वनक्षेत्र है। यहां पर वन्यजीव खूब हैं। इसके साथ ही यह संपूर्ण क्षेत्र बारहमास भरे रहने वाले जलाशयों का भी क्षेत्र है। यह सारे क्षेत्र आगे कई सारी अभ्यारणों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन सभी को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित करते हुए करीब 500 किलोमीटर वाइल्ड लाइफ कोरिडोर बनाया जाए तो यह मध्यप्रदेश और राजस्थान के लिए एक सौगात होगी।

माही में दिखे मगरमच्छ : सदस्यों ने डूंगरपुर के देवपुरा तथा बांसवाड़ा के जगपुरा के बीच माही नदी में 13 से अधिक मगरमच्छ देखे। स्थानीय ग्रामीणों से मगरमच्छों के आहार व्यवहार के बारे में जानकारी संकलित की।

कुशलगढ़. कैमरों से वन्य जीवों की जानकारी लेते क्लब के सदस्य।

बांसवाड़ा| पर्यटन की संभावना वाले बांसवाड़ा में अब कुशलगढ़ से कुम्भलगढ़ तक वन्यजीव कॉरिडोर के रूप में एक नई शुरुआत हो सकती है। जिला पर्यटन उन्नयन समिति तथा वागड़ नेचर क्लब ने इसकी पहल की है।

शनिवार को समिति व क्लब सदस्यों ने क्षेत्र का दौरा कर संभावनाएं तलाशी। समिति के संरक्षक जगमालसिंह, नेचर क्लब के कमलेश शर्मा, घाटोल रेंजर गोविन्दसिंह राजावत, पर्यावरण प्रेमी विक्रमसिंह गरनावट, महिपालसिंह गरनावट, भंवरलाल गर्ग, माधुराजसिंह, फोरेस्टर रमेश मीणा, दिनेशचंद्र जैन ने घाटोल रेंज के लखेरिया गांव में खांटिया तालाब, घाटोल डगिया तालाब, हेरोडैम, देलवाड़ा, जगपुरा तालाब और जलाशयों का निरीक्षण किया और यहां की जैव विविधता, वन्यजीवों की उपस्थिति तथा पक्षियों व अन्य सरिसर्पों की अनुकूलता के बारे में जानकारियां संकलित की।

इसलिए है यह क्षेत्र विशेष

जगमालसिंह ने बताया कि कुशलगढ़ के वनक्षेत्र से लेकर जोगीमाल, सिंगपुरा, भंडारिया, आनन्द सागर, चाचाकोटा क्षेत्र, माहीडैम, जगमेर अमरथून, घाटोल, पीपलखूंट, सीतामाता अभयारण्य, जयसमंद अभयारण्य, केवड़ा वनक्षेत्र होते हुए कुम्भलगढ़ तक सघन वनक्षेत्र है। यहां पर वन्यजीव खूब हैं। इसके साथ ही यह संपूर्ण क्षेत्र बारहमास भरे रहने वाले जलाशयों का भी क्षेत्र है। यह सारे क्षेत्र आगे कई सारी अभ्यारणों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन सभी को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित करते हुए करीब 500 किलोमीटर वाइल्ड लाइफ कोरिडोर बनाया जाए तो यह मध्यप्रदेश और राजस्थान के लिए एक सौगात होगी।

माही में दिखे मगरमच्छ : सदस्यों ने डूंगरपुर के देवपुरा तथा बांसवाड़ा के जगपुरा के बीच माही नदी में 13 से अधिक मगरमच्छ देखे। स्थानीय ग्रामीणों से मगरमच्छों के आहार व्यवहार के बारे में जानकारी संकलित की।

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