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700 बच्चों का निशुल्क इलाज कर निजी कम्पनी को खुद देनी थी दवाई, सरकारी अस्पताल से लेकर बांट दी

भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा/बागीदौरा/परतापुर जिले में बच्चों में दांतों की समस्या को दूर करने के लिए राष्ट्रीय...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 25, 2018, 03:55 AM IST

700 बच्चों का निशुल्क इलाज कर निजी कम्पनी को खुद देनी थी दवाई, सरकारी अस्पताल से लेकर बांट दी
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा/बागीदौरा/परतापुर

जिले में बच्चों में दांतों की समस्या को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से निशुल्क कैंप का आयोजन कराया जा रहा है।

इस कैंप को सरकार ने पीपीपी मोड पर जीवीके ईएमआरआई कंपनी को संचालित करने के लिए एमओयू किया है। जिसमें स्टाफ सहित सारी सुविधाएं कंपनी को ही देनी हैं। लेकिन भास्कर की ओर से पिछले कुछ दिनों से कैंप स्थल पर की गई पड़ताल में सामने अाया कि बच्चों का इलाज तो जीवीके के डॉक्टरों द्वारा कराया जा रहा हैं, लेकिन उन्हें दवाएं जिस जगह कैंप लगा है वहां के स्वास्थ्य केंद्र से दी जा रही है।

इस संबंध में जीवीके कंपनी के रीजनल मैनेजर मुकेश चावड़ा से संपर्क किया तो उन्होंने कॉल नहीं उठाया। वहीं जिला कॉर्डिनेटर विजय कालरा ने बताया कि करार के संबंध में जानकारी नहीं हैं, वैन में कंपनी के डॉक्टर हैं वो ही जानकारी दे सकते हैं।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. सुवालाल ने बताया प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की ओर से पीपीपी मोड पर दिया गया है। उदयपुर संभाग में यह करार जीवीके ईएमआरआई कंपनी के साथ किया गया है। जिसको कैंप की पूरी जिम्मेदारी है कि डॉक्टर, इलाज, मशीन और दवाओं की उपलब्धता कराए। इस कैंप में विशेष रुप से आरबीएसके में चयनित वो बच्चें जिन्हें दांतों की समस्या हैं उनका इलाज कराया जा रहा है। इनके अतिरिक्त अन्य बच्चे भी इलाज करा सकते हैं।

जिले में दो फरवरी से शििवर की शुरुआत

जिले में मोबाइल डेंटल वैन शिविर का आयोजन गत 2 फरवरी से घाटोल कस्बे से शुरू किया गया है। जिसके बाद घोड़ी तेजपुर, बदरेल, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, आनंदपुरी, कलिंजरा, बड़ोदिया, परतापुर और 26 फरवरी से तलवाड़ा में आयोजित किया जाएगा। अब तक कैंपों में 700 से अधिक बच्चों को लाभान्वित किया जा चुका है।

कैंपों में अधिक से अधिक बच्चों को लाभ मिले इसके प्रयास किए जा रहे हैं। यहां जीवीके कंपनी की ओर से सारी सेवाएं दी जा रही है। कुछ दवाएं नहीं उपलब्ध होने पर अस्पताल से दिलाई जा रही है। जिससे कोई बच्चा छूट नहीं जाए। - डॉ. मनीष शर्मा, डेंटल वैन प्रभारी, जीवीके।

अस्पताल के दवा स्टोर से दवाइयां ले जाती शिविर में कार्यरत महिला।

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