घाटोल

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माहीबांध से 15 किमी दूर ही घाटोल के गांव सिंचाई से भी वंचित

माहीबांध बांसवाड़ा-डूंगरपुर जिले के अलावा गुजरात में सिंचाई व पेयजल का पानी दिला रहा है, लेकिन बांध से महज 15 किमी...

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2018, 04:05 AM IST
माहीबांध से 15 किमी दूर ही घाटोल के गांव सिंचाई से भी वंचित
माहीबांध बांसवाड़ा-डूंगरपुर जिले के अलावा गुजरात में सिंचाई व पेयजल का पानी दिला रहा है, लेकिन बांध से महज 15 किमी दूरी पर घाटोल विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों गांवों की हजारों बीघा खेती की जमीन प्यासी पड़ी है। अब तक क्षेत्रीय किसान राजनीतिक उपेक्षा के शिकार बन रहे हैं। यहां के किसानों की आय का मुख्य स्त्रोत खेती है।

नाॅन कमांड क्षेत्र होने की वजह से फसल की अच्छी पैदावार नहीं होती। अच्छी पैदावार की आस भी बारिश पर निर्भर करती है। कभी-कभी प्राकृतिक आपदा की वजह से भी किसानों को भारी समस्या का सामना करना पडता है। इसके बाद भी किसान हिम्मत नहीं हारते हुए अपने परिवार के साथ पशुओं का पालन-पोषण करने के लिए दिन-रात मेहनत-मजदूरी कर रहा है। संयुक्त परिवारों के टूटने से कई किसानों के पास एक बीघा से लेकर 5 बीघा तक की जमीन पर निर्भर है।

कम जमीन के कारण कई किसानों ने खेती से अपना मोहभंग कर लिया है। कर्ज में डूबा किसान नाॅन कमांड क्षेत्र में कुएं के निर्माण की क्षमता नहीं होने से भी परेशान है। कुछ किसानों ने कुएं खोदे, खेतों में वाटर पंप के जरिए सिंचाई कर भी दें तो महंगे खाद, बीज व डीजल के दाम को देखते हुए फसल की पैदावार की मात्रा व मूल्यों को देखने पर पलड़ा बराबरी पर आ जाता है। इससे किसानों की माली हालत में सुधार की गुंजाइश ही नहीं बचती। ऐसे में किसान बारिश के पानी पर पकने वाली फसल पर बारह माह अपनी आजीविका चलाता है।

घाटोल के ये हैं नाॅन कमांड क्षेत्र

घाटोल विधानसभा क्षेत्र की 78 ग्राम पंचायतों के 416 राजस्व गांवों में भगोरों का खेड़ा, खैरवा, गोलियावाड़ा, सवनिया, खमेरा, बांसलीखेड़ा, रूपजी का खेडा, कंठाव, डांगल, छोटीपडाल, घाटोल, देलवाड़ा, कालीमंगरी, सोनामंगरी, जगपुरा, रूंजिया, बामनपाड़ा, बोरदा, मोटाटांडा, गनोड़ा, भुवासा, बस्सीआड़ा, चिरावालागड़ा, पडौली राठौड, बडाना, अमरसिंह का गडा, घाटोल विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत पीपलखूंट तहसील की 22 पंचायतें नाम मात्र के छोटे-तालाबों व एनीकटों के माध्यम से किसान अपनी फसल की बुवाई कर महज एक या दो बार सिंचाई कर सिवाय घास के कुछ नहीं पाता है। फसल को अनाज के रूप में पाने के लिए लगभग तीन से चार बार पानी से सिंचाई करने की जरूरत होती है।

माहीबांध का पानी नहीं पहुंचने के कारण घाटोल विधानसभा क्षेत्र की सूखी पड़ी जमीन।

राजनीतिक के भी शिकार रहे क्षेत्रीय किसान

घाटोल पंचायत समिति की 15 ग्राम पंचायतों के किसान राजनीति का शिकार बने रहे हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा भूंगड़ा नहर से निकलने वाली खमेरा नहर निर्माण के लिए 97 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। इसके बाद कार्य भी प्रारंभ हो गया था। भाजपा सरकार के आने के बाद नहर का कार्य ठप हो जाने से हजारों किसानों की खेती की जमीनें सूखी हैं। राजनीतिक उपेक्षाओं को छोड़कर अगर यहां स्थानीय सांसद, विधायक ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस नहर की ओर ध्यान दिया होता तो लगभग 15 पंचायतों में किसानों को माही की नहरों का पानी मिल जाता तो आज किसानों को खेती में बड़ी राहत मिलती। राजनीतिक उपेक्षाओं के चलते जनप्रतिनिधियों ने सिर्फ दूसरों का नाम होने की वजह से इस ओर ध्यान नहीं दिया। जिस कारण इसका खामियाजा गरीब किसान को भुगतना पड़ रहा है।

पेयजल संकट गहराने की आशंका

वर्तमान में इन नाॅन कमांड क्षेत्रों में कुएं, नदी-नालों में पानी का स्तर अभी से ही कम होने लगा है। इससे आगामी दिनों में गर्मी का मौसम शुरू होने के समय पेयजल की समस्या के साथ-साथ पशुओं के लिए चारे व पेयजल की भारी मुसीबतें होने की आशंका क्षेत्रीय किसान जता रहे हैं।

गनोड़ा तहसील के लोगों ने भी माही का पानी जयसमंद ले जाने का किया विरोध

गनोड़ा। गनोड़ा तहसील के किसानों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार के बजट में माही के पानी को पाइपलाइन के सहारे जयसमंद ले जाने की योजना की घोषणा का विरोध शुरू कर दिया है।

सरकार लगभग 450 करोड़ की लागत से माही हाईलेवल केनाल टू जयसमंद ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट के माध्यम से माही का पानी जयसमंद तक पहुचाने की सोच रही है। यहां के लोगों की माने तो अभी भी कई गांव माही के पानी के लिए तरस रहे हैं। गनोड़ा तहसील की ग्राम पचायत मोटाटांडा के गांव सिलथिया व चांदू का वेला, गनोड़ा पचायत के गुन्दीवाली रेड, बस्सी आड़ा पूरी पंचायत, मोटागांव के नजर पूरा, भुवासा पंचायत के चिरोला व टामटिया, जगपुरा पंचायत के मंडेला, दूदका पंचायत के कुछ मजरे, अमरसिह का गढ़ा पंचायत के देवजी ओड़ा मालणिया गांव में अभी भी माही के पानी की समस्या है, इसलिए पहले यहां की तकलीफ दूर होनी चाहिए।

घाटोल के पूर्व विधायक नानालाल निनामा ने बताया कि अगर राज्य सरकार इस क्षेत्र के लोगों को सिंचाई का पानी नहीं देकर उसे जयसमंद पहुंचाने का काम करती है तो यहां के किसानों को आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। विरोध करने वालों में नेमीचंद जैन, परमेश्वर नायक समेत ग्रामीण शामिल हैं।

माही का पानी जयसंमद ले जाने की घोषणा से नाराज दूदका के किसान।

माही के पानी को लेकर मुखर होने लगे किसान

घाटोल. माही का पानी जयसमंद ले जाने का विरोध बढ़ने लगा। बुधवार को दूदका पंचायत में युवा कांग्रेस की बैठक अध्यक्ष शांतिलाल कलासुआ के सानिध्य में हुई। इसमें शामिल किसानों ने राज्य सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए बताया कि माही बांध के समीप का क्षेत्र गनोड़ा, घाटोल, खमेरा व पीपलखूंट अब तक नाॅन कमांड की समस्या से उभरा नहीं है।

सरकार द्वारा बांध के पानी को जयसमंद तक पहुंचाने के निर्णय से किसानों के साथ कुठाराघात हुआ है। इसको लेकर किसान 16 फरवरी को हैजामल में प्रस्तावित धरना प्रदर्शन में भाग लेकर विरोध जताएंगे। बैठक में शंकरलाल कलासुआ, भाणिया पांडोर, कैलाशचंद्र डामोर, नानिया राणा, मोहनलाल, लक्ष्मणलाल कलासुआ, शांतिलाल बारिया, वेलजीभाई मौजूद रहे।

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