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गर्मी तेज होते ही मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़े, इलाज नहीं मिल रहा

भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा अप्रैल माह शुरू होते ही गर्मी ने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए। मार्च के अंतिम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 04, 2018, 04:20 AM IST

गर्मी तेज होते ही मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़े, इलाज नहीं मिल रहा
भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा

अप्रैल माह शुरू होते ही गर्मी ने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए। मार्च के अंतिम सप्ताह में दिन का अधिक तापमान 40 डिग्री था, वहीं अप्रैल में तीन दिन से तापमान 41 डिग्री होने से मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है।

बांसवाड़ा के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल के अलावा घाटोल, कुशलगढ़, गढ़ी, परतापुर, जौलाना, तलवाड़ा, गनोड़ा, छोटी सरवन समेत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बुखार, उल्टी, दस्त के मरीज बढ़ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में इजाफा हो रहा है। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव होने के कारण गुजरात और मध्यप्रदेश इलाज कराने के लिए लोग जा रहे हैं।

जौलाना सीएचसी में तीन दिन में 110 मरीज

जौलाना. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जौलाना में तीन दिन में 110 मरीज मौसमी बीमारियों से पीड़ित आए। यहां एक्सरे मशीन तो हैं, लेकिन इसमें काम आने वाला मेटेरियल नहीं होने के कारण उपयोग में नहीं ली जा रही है। यहां की 104 एंबुलेंस को भी बागीदौरा लगा दी। ऐसे में मरीजों को निजी वाहन में इलाज के लिए ले जाना पड़ता है। यहां पर एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है।

परतापुर अस्पताल में अोपीडी बढ़ी

परतापुर अस्पताल में अप्रैल के तीन दिन में मौसमी बीमारियों से पीड़ित 749 लोग आए। अक्सर यहां पर 100 से ज्यादा ओपीडी नहीं रहती हैं, लेकिन पिछले एक सप्ताह से हो रही गर्मी के कारण मरीजों की संख्या रोज बढ़ रही है। यहां पर भी एक्सरे मशीन और मोर्चरी की सुविधा नहीं है। अस्पताल में गायनिक, सर्जन और विशेषज्ञ नहीं होने के कारण लोगों को इलाज कराने के लिए बाहर ले जाना पड़ता है।

इधर, मोहकमपुरा में टीम ने लोगों को जांचा

मोहकमपुरा. उपखंड कुशलगढ़ के मोहकमपुरा में वायरल बुखार से पीड़ित लोगों की जांच करने के लिए दूसरे दिन भी चिकित्सा टीम पहुंची। मोहकमपुरा पीएचसी में मंगलवार को कुल 24 की अोपीडी हुई। बीसीएमओ डॉ. उज्जैनिया ने स्टाफ को पाबंद किया, उसके बाद अस्पताल में नियमित सेवाएं दी गई ।

घाटोल में डॉक्टरों की कमी से मरीजों का हो रही परेशानी

घाटोल. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घाटोल में डॉक्टरों समेत स्टाफ की कमी का खामियाजा क्षेत्र के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इस अस्पताल में रोज 150 से ज्यादा ओपीडी है। गर्मी के कारण मंगलवार को अस्पताल में 450 की अोपीडी रही। हर माह 150 से 200 डिलेवरियां होने के बावजूद अस्पताल में डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने में ना तो चिकित्सा विभाग और ना ही जनप्रतिनिधि रुचि ले रहे हैं। 18 हजार की आबादी वाले इस कस्बे में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। सीएचसी में एक्सरे, लैब, ऑक्सीजन, मरीजों की भर्ती की सुविधा तो हैं, लेकिन रिक्त पदों के अभाव में ये बेशिकमती उपकरण धूल खा रहे हैं। सरकार के बजट का कोई उपयोग नहीं हाे रहा।

गनोड़ा में ना डॉक्टर ना एक्सरे की सुविधा

गनोड़ा तहसील मुख्यालय पर बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर और स्टाफ की कमी है। इसके अलावा एक्सरे जांच की सुविधा भी नहीं है। डॉक्टरों के पद खाली होने के कारण ऑपरेशन थियेटर भवन का उपयोग नहीं होने से नकारा पड़ा है। सीएचसी में स्वीकृत 6 में से 2 ही डॉक्टर हैं। दो साल से एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। इस कारण मरीजों को बाहर अधिक राशि चुकानी पड़ रही है। अस्पताल में 1 अप्रैल को 46, 2 को 76 और 3 अप्रैल को 10, अोपीडी रही। गर्मी के कारण मरीजों तादाद बढ़ रही है।

बागीदौरा में 230 मरीज आए

बागीदौरा. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागीदौरा में अप्रैल के तीन दिन में कुल 486 ओपीडी रजिस्टर्ड हुई। मंगलवार को एक ही दिन में 230 मरीज आए, जिनमें से 6 को भर्ती किया गया।

तलवाड़ा में सर्दी खासी के रोगी बढ़े

तलवाड़ा. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तलवाड़ा में गर्मी के तीखे तेवर के कारण मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सर्दी, खासी, उल्टी, दस्त, दाद, खुजली के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। इस अस्पताल में 31 मार्च को 222, 1 अप्रैल को 92, 2 अप्रैल को 144 ओपीडी रही।

कुशलगढ़ समेत घाटा क्षेत्र में नीम हकीमों का फैला जाल

मोहकमपुरा| उपखंड कुशलगढ़ समेत घाटा क्षेत्र में सरकारी अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण लोग नीम हकीम के पास इलाज कराने को मजबूर हैं। कुशलगढ़ के सामुदायिक अस्पताल, छोटी सरवा, मोहकमपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों समेत स्टाफ की कमी हैं।

इसके अलावा जांच के उपकरण भी नहीं हैं। ऐसे में गंभीर रोगियों को रैफर कर देते हैं। ये मरीज बांसवाड़ा और आसपास के राज्यों में इलाज कराने जाते हैं। कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र में 100 से अधिक झोलाछाप सक्रिय हैं, जो मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

इनके खिलाफ प्रशासन और चिकित्सा विभाग भी कार्रवाई नहीं करते हैं, ऐसे में इनके हौसले बुलंद हो गए हैं। सरकार गांवों में जरूरतमंदों को निशुल्क चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा कर रही है, लेकिन जिले के सुदूर जनजाति क्षेत्र में नीम हकीमों का जाल बिछा हुआ है।

यहां इलाज के नाम पर गरीबों को लुटा जा रहा है। कुशलगढ़ के टिमेड़ा बसस्टैंड, रतलाम रोड, रामगढ़ स्टैंड, पांडवासाथ, मोहकमपुरा, छोटी सरवा, पाटन, बड़ी सरवा, रामगढ़, टिमेड़ा, ऊंकाला, कोटड़ा, गलधर में झोलाछापों की भरमार हैं। इसके अलावा बिना मान्यता, अनुभवहीन बंगाली नीम हकीम दवाखानों पर मरीजों से इलाज के नाम पर अधिक वसूली हो रही है। इन झोलाछापों के खिलाफ पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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