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बांसवाड़ा भास्कर

हम जितना अध्ययन करते हैं, उतना ही हमें अपने अज्ञान का आभास होता जाता है। -स्वामी विवेकानंद बांसवाड़ा, शुक्रवार, 09...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 09, 2018, 04:30 AM IST

हम जितना अध्ययन करते हैं, उतना ही हमें अपने अज्ञान का आभास होता जाता है। -स्वामी विवेकानंद

बांसवाड़ा, शुक्रवार, 09 मार्च, 2018

कुशलगढ़ गढ़ी-परतापुर घाटोल बागीदौरा सज्जनगढ़

चैत्र, कृष्ण पक्ष-8, 2074

पहला दोस्त (दूसरे से)- तुम यह चाकू क्यों उबाल रहे हो? दूसरा- सुसाइड करने के लिए...। पहला- तो फिर उबालने की क्या जरूरत है?दूसरा- मरने के बाद कहीं इन्फेक्शन न हो जाए इसलिए।

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Web Title: बांसवाड़ा भास्कर
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