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बैंकों में दलाल, लोन-भुगतान अटके, लोकपाल के सामने शोर-शराबा भरोसा देना पड़ा-15 दिन में हर काम का निबटारा नहीं हो तब कहना

भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा जिले की बैंकों में प्रबंधकों के मनमाने रवैए से हो रही परेशानियों का गुबार सोमवार...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 27, 2018, 04:35 AM IST

बैंकों में दलाल, लोन-भुगतान अटके, लोकपाल के सामने शोर-शराबा भरोसा देना पड़ा-15 दिन में हर काम का निबटारा नहीं हो तब कहना
भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा

जिले की बैंकों में प्रबंधकों के मनमाने रवैए से हो रही परेशानियों का गुबार सोमवार को ग्राहकों ने बैंकिंग लोकपाल माधवी शर्मा के सामने जमकर निकाला। ज्यादातर मामले लोन की मंजूरी और सरकारी योजनाओं के भुगतान अटकाने के रहे, जिसमें बेवजह चक्कर लगवाने से आहत ग्राहकों ने बैंकों के आला अधिकारियों से भी जमकर बहस की। आखिर में तमाम शिकायतें लिखित में लेकर शर्मा ने 15 दिन में इनका निस्तारण कराने का भरोसा दिलाया।

शहर की एक होटल में सोमवार को आयोजित सुनवाई के दौरान 35 से ज्यादा शिकायतें आईं। बड़ी दिक्कत आदिवासी बहुल इलाके में चल रही बाड़ी योजना से जुड़े किसानों के होली के मौके पर भुगतान संकट की रही। कार्यक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा, आनंदपुरी की ओर से बाड़ी विकास समितियों के खाते बंद करने से किसानों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है। कभी पेन कार्ड, कभी समिति के रजिस्ट्रेशन तो कभी किसी और बहाने टाल रहे हैं। बाद में एक बैंक अधिकारी ने खुलासा किया कि बैंक रिकार्ड में खाता इंडिविजुअल लिखने से दिक्कत है, करेक्शन से समस्या दूर हो जाएगी। इस दौरान चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष शंभुलाल हिरन ने पिता की सिबिल खराब होने पर बच्चों का एजुकेशन लोन नहीं मिलने की परेशानी बताकर निदान मांगा। इस पर मां को बाेरोअर बनाकर लोन देने और डिफाल्ट वाली विंग से संशोधन करवाकर सिबिल सुधार के विकल्प बताए गए। सुनवाई के दौरान एक ग्राहक ने नकदी जमा करवाने जाने पर भी बैंककर्मियों द्वारा बदसलूकी करने पर एसबीआई कुशलबाग शाखा की शिकायत की। हॉल में शिकायतों के साथ शोर-शराबा ज्यादा बढ़ा, तो बैंकिंग लोकपाल को यहां तक कहना पड़ा कि चीखने-चिल्लाने से काम नहीं होगा। 15 दिन में काम नहीं हो तो बताएं। काम हर हाल में होगा और किसी को एक पैसे का नुकसान नहीं होगा। उनके साथ बैंकिंग लोकपाल कार्यालय, जयपुर से डीजीएम जेआर संख्यान, एजीएम एमएल बलाई, एचएम सारोलिया, अनिता शर्मा ने भी शिकायतों की नकलें लीं और साथ बैठे आरबीआई, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई के अधिकारियों से निराकरण के उपाय पूछे।

उदयपुर रोड पर एक होटल में सोमवार को आयोजित समारोह में ग्राहकों के सवालों का जवाब देतीं बैंकिंग लोकपाल माधवी।

भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा

जिले की बैंकों में प्रबंधकों के मनमाने रवैए से हो रही परेशानियों का गुबार सोमवार को ग्राहकों ने बैंकिंग लोकपाल माधवी शर्मा के सामने जमकर निकाला। ज्यादातर मामले लोन की मंजूरी और सरकारी योजनाओं के भुगतान अटकाने के रहे, जिसमें बेवजह चक्कर लगवाने से आहत ग्राहकों ने बैंकों के आला अधिकारियों से भी जमकर बहस की। आखिर में तमाम शिकायतें लिखित में लेकर शर्मा ने 15 दिन में इनका निस्तारण कराने का भरोसा दिलाया।

शहर की एक होटल में सोमवार को आयोजित सुनवाई के दौरान 35 से ज्यादा शिकायतें आईं। बड़ी दिक्कत आदिवासी बहुल इलाके में चल रही बाड़ी योजना से जुड़े किसानों के होली के मौके पर भुगतान संकट की रही। कार्यक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा, आनंदपुरी की ओर से बाड़ी विकास समितियों के खाते बंद करने से किसानों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है। कभी पेन कार्ड, कभी समिति के रजिस्ट्रेशन तो कभी किसी और बहाने टाल रहे हैं। बाद में एक बैंक अधिकारी ने खुलासा किया कि बैंक रिकार्ड में खाता इंडिविजुअल लिखने से दिक्कत है, करेक्शन से समस्या दूर हो जाएगी। इस दौरान चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष शंभुलाल हिरन ने पिता की सिबिल खराब होने पर बच्चों का एजुकेशन लोन नहीं मिलने की परेशानी बताकर निदान मांगा। इस पर मां को बाेरोअर बनाकर लोन देने और डिफाल्ट वाली विंग से संशोधन करवाकर सिबिल सुधार के विकल्प बताए गए। सुनवाई के दौरान एक ग्राहक ने नकदी जमा करवाने जाने पर भी बैंककर्मियों द्वारा बदसलूकी करने पर एसबीआई कुशलबाग शाखा की शिकायत की। हॉल में शिकायतों के साथ शोर-शराबा ज्यादा बढ़ा, तो बैंकिंग लोकपाल को यहां तक कहना पड़ा कि चीखने-चिल्लाने से काम नहीं होगा। 15 दिन में काम नहीं हो तो बताएं। काम हर हाल में होगा और किसी को एक पैसे का नुकसान नहीं होगा। उनके साथ बैंकिंग लोकपाल कार्यालय, जयपुर से डीजीएम जेआर संख्यान, एजीएम एमएल बलाई, एचएम सारोलिया, अनिता शर्मा ने भी शिकायतों की नकलें लीं और साथ बैठे आरबीआई, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई के अधिकारियों से निराकरण के उपाय पूछे।

47 बैंकों में खाते ही नहीं खोले जाने की शिकायत

इस दौरान आजीविका मिशन की ओर से बैंक लोन के लिए समूहों को जिले की 47 बैंकों में खाते ही नहीं खोले जाने की शिकायत भी की। इस पर एलडीएम को इसे गंभीरता से दिखवाकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। एक ग्राहक ने एसबीआई मोहन कॉलोनी में लोन की पूरी राशि जमा कराने के बाद भी चार साल से नो-ड्यूज नहीं देकर खाते पर ब्याज जोड़े जाने की शिकायत की। इसी तरह एसबीआई माही शाखा में लोन पर बैंक की ब्याज दर घटने के बावजूद पुरानी दर से वसूली करने और शिकायत करने पर महज लिखित में नहीं देने से बेस रेट नहीं बदली जाने का तर्क देकर चलता करने की शिकायत की। इस पर बैंकिंग लोकपाल ने कहा कि इस बदलाव का जिम्मा बैंक का है, लिखित में देने की जरूरत ही नहीं है। शिकायत मेल करें, कार्रवाई करेंगे।

घाटोल की बैंक में दलाल के कहने पर ही मिलता है लोन

सुनवाई के दौरान एक केसीसी धारक बुजुर्ग को लेकर आए उसके बेटे ने बताया कि मई, 17 में उसने 1.10 लाख का लोन लिया। नवंबर में हिसाब बीओबी घाटोल ने 1.29 लाख रुपए का हिसाब बताया। पहले मात्र 3 हजार रुपए ब्याज ही लगने की बात पर बैंक से बताया कि बाद में केसरसिंह नामक व्यक्ति रुपए निकाल ले गया, जिसे कोई जानता तक नहीं। फिर विवाद बढ़ा, तो बैंक ने 15 हजार रुपए वापस करने की बात की। युवक ने आरोप लगाया कि घाटोल की बैंक में दलाल सक्रिय है। मनमानी राशि लेकर दलाल और कर्मचारी अपना हिस्सा बांटते हैं। इस दौरान एलडीएम टीसी बाफना, एएलडीएम, मानवेंद्रसिंह, बीआरकेजीबी के क्षेत्रीय कार्यालय से डीएस परमार मौजूद थे।

शहर नहीं गांवों में देखें हाल, बीओबी से लोग ज्यादा परेशान

सुनवाई के दौरान कर सलाहकार प्रवीण गादिया ने लोकपाल से कहा, मैडम शहर में तो फिर भी ठीक, गांवों की बैंकों को देखें। ओवरलोड सिस्टम में बैंककर्मी ग्राहकों से बदसलूकी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा बीओबी से परेशानी है। लोन हो या दूसरे लेन-देन लोग धक्के खाते हैं और बैंक के अफसर नहीं सुनते। बीसीसीआई अध्यक्ष सुनील दोसी ने भी बीओबी के डिप्टीजीएम उदयपुर अशो दगेचा को घेरा और कहा कि उच्चाधिकारी मुआयना तक नहीं करते गांवों की बैंक शाखाओं का। जहां-तहां मनमानी है और लोग परेशान हैं।

टालें नहीं, निस्तारण करें, जनता चुप नहीं रहेगी-माधवी

सुनवाई के बाद बैंकिंग लोकपाल माधवी शर्मा ने बैंकर्स की भी क्लास ली। उनहोंने कहा कि लोन देना बैंक का बेसिक बिजनेस है, जमाएं लेना नहीं। पात्र को लोन देंगे, तो गुडविल बढ़ेगी। जनता को लग रहा कि हमारी सुनवाई नहीं हो रही। लोग बेचारे लग रहे हैं। सुधार की बहुत ज्यादा गुंजाइश है। हमारे पास शिकायत आने पर भी वाइबिलीटी नहीं होने का जवाब दिया जाता है, यह काफी नहीं। हां या ना करने का निर्णय आपका है, पर सही कारण बताकर निस्तारण तो करना ही होगा। क्यों का जवाब नहीं देंगे, गोलमाल बात करेंगे, तो जनता चुप नहीं बैठेगी। इस दौरान एटीएम को आउटसोर्सिंग एजेंसियों के हवाले छोड़ने से हो रही दुर्दशा, गांवों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगने के हालात को भी गंभीरता से लेने को कहा।

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Web Title: बैंकों में दलाल, लोन-भुगतान अटके, लोकपाल के सामने शोर-शराबा भरोसा देना पड़ा-15 दिन में हर काम का निबटारा नहीं हो तब कहना
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