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बांसवाड़ा भास्कर

जिन्दगी एक साइकिल की तरह है। अगर आपको बैलेंस बनाकर रखना है तो आपको पैडल मारते रहना होगा। -अल्बर्ट आइंस्टीन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 21, 2018, 04:55 AM IST

जिन्दगी एक साइकिल की तरह है। अगर आपको बैलेंस बनाकर रखना है तो आपको पैडल मारते रहना होगा।

-अल्बर्ट आइंस्टीन

बांसवाड़ा, बुधवार, 21 फरवरी, 2018

कुशलगढ़ गढ़ी-परतापुर घाटोल बागीदौरा सज्जनगढ़

फाल्गुन, शुक्ल पक्ष-6, 2074

पप्पू के घर रिश्तेदार आए। पप्पू दरवाजा खोलते हुए जोर-जोर से हंसने लगा। रिश्तेदार- ऐसे क्यों हंस रहा है? पप्पू- टीचर ने कहा था कि जब भी मुसीबत आए, उसका सामना हंसते हुए करना।

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Web Title: बांसवाड़ा भास्कर
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