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हिचकिचाएं नहीं, अभ्यास बढ़ाकर आत्मविश्वास से करें अंग्रेजी का पर्चा

नोट मेकिंग में आ रही दिक्कत, स्टोरी राइटिंग में इमेजिनेशन की कमजोरी और व्याकरण संबंधित सवाल, गुरुवार शाम दैनिक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 23, 2018, 05:15 AM IST

नोट मेकिंग में आ रही दिक्कत, स्टोरी राइटिंग में इमेजिनेशन की कमजोरी और व्याकरण संबंधित सवाल, गुरुवार शाम दैनिक भास्कर के संवाद कार्यक्रम में जिले से बोर्ड परीक्षा दे रहे कई बच्चों ने इन्हीं पर फोकस होकर बेबाक बातचीत की। इस दौरान काउंसलर डॉ. धीरज जोशी ने उन्हें मुश्किल को आसान करने के टिप्स देने के साथ हौसला बढ़ाया और परीक्षा की तैयारी का समय कम होने के बावजूद बगैर हिचकिचाहट अभ्यास बढ़ाकर आत्मविश्वास से अंग्रेजी का पर्चा देने की सीख दी।

संवाद में शाम 5 से 6 बजे तक दसवीं-बारहवीं के शहरी बच्चों के अलावा गांवों से भी बड़ी संख्या में फोन कॉल्स आए। डॉ. जोशी के मुताबिक इनमें ज्यादातर कंपोजिशन से जुड़े सवाल थे। अनुभव रहा कि बच्चों को जानकारी तो है, लेकिन वे प्रस्तुतिकरण सही नहीं कर पाते। असमंजस की स्थिति में आते ही छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे नतीजे पर असर पड़ता है। ऐसे में टिप्स दूसरे बच्चों तक पहुंचाने के लिए कुछ चुनिंदा छात्र-छात्राओं के सवाल और जवाब।

नवागांव निवासी 12वीं की छात्रा आंचल ने नोट मेकिंग में आ रही परेशानी बताई। इस पर डॉ. जोशी ने उसे समझाया कि यह स्टडी स्कील है, जिसमें गद्यांश पढ़कर हेडिंग-सब हेडिंग निकालकर छोटा स्वरूप देना होता है। शब्दों में बदलाव के साथ इसमें भावार्थ वही रखना है। यह फ्लो चार्ट के रूप में भी दे सकते हैं, लेकिन अक्षरश: पुनर्रावृत्ति से बचना चाहिए।

घाटोल क्षेत्र दसवीं के छात्र नंदजी का सवाल अहम् था कि किस तरह ग्रामर को इंप्रुव करे। जवाब में डॉ. जोशी ने कहा कि जिस विषयवस्तु पर पकड़ करनी है, उसके नमूने ध्यान में रखकर स्ट्रक्चर खड़ा करते हुए ज्यादा से ज्यादा अभ्यास करे। बेहतर विकल्प यह भी है कि अच्छे ऑथर की ग्रामर बुक को फोलो करें और समय कम है तो उनकी एक्सरसाइज पर ही फोकस कर लें, तो निश्चित अच्छा स्कोर करेंगे।

एक अन्य छात्रा साना जोशी का सवाल फोर्मल-इनफोर्मल लेटर राइटिंग पर था। साना को जवाब मिला कि फोर्मल लेटर ऑफिशियल या प्रोफेशनल परपज से है, लिहाजा उनकी भाषा शैली औपचारिक रहेगी। इनफोर्मल लेटर फ्रेंडली मेनर से लिखे जाते हैं। इनके अलावा ठीकरिया से उदित त्रिवेदी, अंश जोशी, मिनल त्रिवेदी, कुशलगढ़ से दिव्य, गनोड़ा क्षेत्र से हिम्मतलाल, दानपुर से देवेंद्र, बागीदौरा के अर्ष ने स्पीच, पैरेग्राफ राइटिंग, पैसेज से प्रश्नों के उत्तर देने और नोटिस राइटिंग के बारे में भी इसी तरह के सवाल पूछे और जवाब पाए।

भास्कर संवाद

काउंसलर डॉ. धीरज जोशी।

ईमेल पर पुछ सकते हैं सवाल

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सीबीएसई के छात्रों ने भी किए कॉल, पूछी जिज्ञासा

सेंट पॉल्स स्कूल के छात्र खांदू कॉलोनी निवासी यश जैन ने मिसिंग, जंबल्स लेटर्स और टेक्सचुअल प्रश्न के उत्तर देने का तरीका पूछा। स्टोरी राइटिंग में भाषाशैली के सवाल पर डॉ. जोशी ने उन्हें समझाया कि आउटलाइन में शब्द बदलकर बेहतर शब्दावली का इस्तेमाल कर परीक्षक को आकर्षित कर सकते हैं। अपनी शैली में लेखन ज्यादा बेहतर है। मिसिंग लेटर्स ज्यादातर वोवेल होने का टिप देते हुए जोशी ने बताया कि तसल्ली से शब्द के समग्र उच्चारण से तुरंत आभास हो जाता है कि कहां, कौन मिस है।

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