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घाटोल के रास्ते शहर में प्रवेश करते ही गड्ढों वाला हाईवे बिगाड़ रहा छवि, आमजन हो रहे परेशान

भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा अगर आप घाटोल के रास्ते से शहर आ रहे है तो आपकी गाड़ी के हिचकोले खाते ही समझ जाइएगा कि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 23, 2018, 05:15 AM IST

घाटोल के रास्ते शहर में प्रवेश करते ही गड्ढों वाला हाईवे बिगाड़ रहा छवि, आमजन हो रहे परेशान
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा

अगर आप घाटोल के रास्ते से शहर आ रहे है तो आपकी गाड़ी के हिचकोले खाते ही समझ जाइएगा कि शहर आ चुका है। शहर की प्रवेश सीमा में नेशनल हाईवे 113 की दशा कुछ एेसी ही है। यहां हाईवे पर बने गड्ढों में आपकी गाड़ी हिचकोले लेने लगेगी। गनीमत है कि इन गड्ढों को पार करते वक्त आपके आगे या पीछे से कोई वाहन नहीं निकले। शहर के बीच से निकल रहा यह हाईवे महीनों से गड्ढों में तब्दील हो चुका था। जिस पर से गुजरना न सिर्फ जोखिमभरा था, बल्कि धूल के गुबार उड़ने से राहगीर बीमार पड़ने लगे थे। शहरवासियों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए हाईवे विभाग ने आनन-फानन में इसका पेचवर्क कराया। लेकिन इसमें भी पेचवर्क कम लीपापोथी ज्यादा नजर आ रही है।

इसका पता इसी से चलता है कि डायलाब हनुमान मंदिर से ठीकरिया तक हाईवे पर पेचवर्क तो कराया, लेकिन डायलाब तालाब के समीप लिंक तिराहे को छोड़ दिया गया। जहां सबसे ज्यादा वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। यहां पर हाईवे पूरी तरह टूट चुका है। पास ही खाटूश्याम मंदिर और डायलाब हनुमान मंदिर है, जहां सैकड़ों श्रद्धालु रोज आते हैं। इसके बावजूद हाईवे के खस्ताहाल टुकड़े को छोड़ दिया गया। इसी प्रकार शहर के बीच हाईवे पर किए गए पेचवर्क में भी कई गड्ढों को छोड़ दिया गया है।

कई गड्ढों में महज कंकरीट डाल ईतिश्री कर ली गई। जिससे भारी वाहनों के इन पर से गुजरने पर कंकरीट बाहर निकल आने का डर बना हुआ है। बारिश के बाद हाईवे पर गड्ढे पड़ गए थे। इन गड्ढों से शहरवासी इतने त्रस्त हो चुके थे कि कलेक्टर को ज्ञापन देकर मरम्मत कराने की गुहार लगाई थी। उस समय हाईवे के अधिकारियों ने फजीहत से बचने पेचवर्क कराया था जो कुछ ही दिनों में दोबारा उधड़ गया।

ऐसे में इस बार फिर इसी तरह लीपापोथी करने से पेचवर्क के ज्यादा दिन नहीं चलने की आशंका है। गौरतलब है कि शहर के बीच से गुजर रहा नेशनल हाईवे बारिश के बाद से खस्ताहाल था। जिससे गुजरने पर रोजाना शहरवासियों को जोखिम उठाना पड़ रहा था।

शहरवासियों की इसी परेशानी को भास्कर ने मुद्दा बनाकर प्रकाशित किया तो बजट नहीं होने की बात कहकर टालते रहे हाईवे विभाग के अधिकारियों को आनन-फानन में पेचवर्क कराना पड़ा।

दर्द देता हाईवे

नेशनल हाईवे 113 महीनों से गड्ढों में तब्दील। विभाग ने आनन-फानन में पेचवर्क कराया लेकिन इसमें भी लापरवाही बरती।

19 फरवरी को प्रकाशित खबर

माहीडैम क्षेत्र से आने वाले राहगीर ज्यादा परेशान, सुनवाई नहीं

इस खस्ताहाल हाईवे से घाटोल और माहीडैम मार्ग से शहर आने वाले राहगीरों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। निचला घंटाला, उपला घंटाला और समीप ही गांवों से सुबह बाइक पर दूध लेकर शहर आने वाले चालक इन गड्ढों की वजह से सबसे ज्यादा फिक्रमंद हैं। इसके अलावा रोजाना शहर से इस रास्ते समीप के गांवों में नौकरी या दूसरे काम से आना-जाना करने वाले शहरवासी भी नाराज है कि आखिर हाईवे विभाग ने जब इतना पेचवर्क कराया तो आखिर मंदिर के समीप का. हाईवे के इस टुकड़े का भी पेचवर्क करा देना चाहिए था।

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