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बाणेशिया में गियर बाॅक्स की शाफ्ट टूटने से बिजली उत्पादन हो गया ठप

घाटोल। उपखंडमुख्यालय से गुजर रही माही विभाग की दाईं मुख्य नहर पर आरएमसी प्रथम डूंगरीपाड़ा-बाणेशिया स्थित लघु पन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 06, 2018, 05:41 AM IST

घाटोल। उपखंडमुख्यालय से गुजर रही माही विभाग की दाईं मुख्य नहर पर आरएमसी प्रथम डूंगरीपाड़ा-बाणेशिया स्थित लघु पन बिजलीघर में 400,400 किलोवाट की दो बिजली उत्पादन मशीनें और गनोड़ा स्थित 165 किलोवाट की मशीन से पर्याप्त मात्रा में विद्युत उत्पादन नहीं हो रहा है। माही विभाग की नहरों में 5 नवंबर से नहरों में पानी छोड़ने के बाद 20 नवंबर को बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त पानी आने के बावजूद डूंगरीपाड़ा बाणेशिया उपखंड घाटोल की मशीनों के रखरखाव के अभाव में बिजली उत्पादन नहीं हो पाया।

यहां एक यूनिट से 24 घंटे में बिना ट्रिपिंग के 9600 यूनिट बिजली उत्पादन होता है। दोनों यूनिटों से 19200 यूनिट एवं गनोड़ा स्थित यूनिट से 3960 यूनिट अर्थात प्रतिदिन 23160 यूनिट बिजली उत्पादन होना था। जहां एक ओर प्रदेश बिजली से जूझ रहा है, वहां विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते हजारों रुपए का प्रतिदिन नुकसान हो रहा है। प्रतिवर्ष नहरों में पानी छोड़ने की जानकारी के बावजूद भी समय रहते लघु पन बिजलीघर बाणेशिया में मशीनों का रख-रखाव नहीं करने से बिजली उत्पादन नहीं हो पा रहा है। यहां 400 किलोवाट से अधिक किलोवाट की मशीनों से बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त पानी है, लेकिन अब तक इनकी क्षमता का आधा उत्पादन भी नहीं हो पाया है।

साथ ही यहां सुरक्षा की दृष्टि से चार सुरक्षाकर्मी तैनात करने के बावजूद गेट खुले रहते हैं। यहां आने जाने में कोई रोकटोक नहीं है। सुरक्षा गार्ड कक्ष की खिड़कियों के कांच तक टूटे हुए हैं, जिन्हें अब तक बदला नहीं गया है। साथ ही मिनी पावर हाउस में तीन शिफ्टों में एक मैकेनिक और दो हेल्पर की कमी है। माही पावर हाउस प्रथम की अधिशासी अभियंता शशिप्रभा जैन ने बताया कि जलसंसाधन विभाग द्वारा दोनों यूनिटें चलाने की स्वीकृति नहीं दी गई है। फिर भी एक-एक कर दोनों यूनिट चला रहे हैं। 20 नवंबर को एक ही यूनिट चलाने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा कहा गया। हमने दो तीन बार पत्र लिखे हैं फिर भी हमसे मौखिक निर्देश पर यूनिट बंद करवाई है।

दूसरे यूनिट की शाफ्ट टूटने से 27 दिसंबर से उत्पादन नहीं हो रहा है। गवर्नमेंट डिपार्टमेंट है, टाइम तो लगता हैै। यूनिट को ठीक करवाने पूना केे ओईएम से बात की है। वर्ष 1994-95 में स्थापित की गईं बिजली उत्पादन मशीनें हैं, जिनके पार्ट्स आरपीएम में टूट सकते हैं। अब तक लगभग 6 लाख यूनिट उत्पादन हो चुका है। जलसंसाधन विभाग के जेईएन अनिल कुमार पटेल ने बताया कि विद्युत उत्पादन विभाग में ट्रिपिंग के चलते आरएमसी 29 हैड पर गेज मेंटेंन करने में परेशानी होती है।







नहर में 1250 क्यूसेक पानी रहा है। एक यूनिट चलाने के लिए 150 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होती है और दोनों यूनिट से बिजली उत्पादन के लिए 300 क्यूसेक पानी का बहाव जरूरी है।

शाफ्ट टूटने के बाद अब तक ढीली कार्रवाई

27दिसंबर 017 से मशीन की शाफ्ट टूटी हुई है, लेकिन अब तक मरम्मत धीमी रही है। पिछले 4-5 वर्षो से लगातार दोनों यूनिटों में कुछ कुछ खराबी का बहाना बनाकर पार्ट्स खोलकर बिखेर दिए जाते हैं। वास्तविकता का उजागर नहीं होने से बिजली उत्पादन नहीं होने से राजस्व की हानि हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार जिस कंपनी यह बिजली उत्पादन मशीनें हैं, वह कंपनी बंद हो चुकी है। बिजली उत्पादन मशीनें बनानी वाली 35 वर्ष पुरानी कंपनी है, जिसके पार्ट्स मिलना भी अब मुश्किल है।

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