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98 स्कूलों के प्राचार्य बेपरवाह, फॉर्म जांच नहीं करने से स्कॉलरशिप के 5 हजार आवेदन अटके

भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा जिले के स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 5 हजार छात्र-छात्राओं को सरकार की...

Dainik Bhaskar

Jan 30, 2018, 04:25 PM IST
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा

जिले के स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 5 हजार छात्र-छात्राओं को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में लाभ नहीं मिल पा रहा। जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग इन पर महज इसलिए मंजूरी नहीं दे पा रहा है कि स्कूलों के स्तर पर बच्चों के आवेदन पत्र वैरिफिकेशन कर भेजे नहीं जा रहे। दूसरी ओर, कॉलेजों से आवेदनों में हुई गलतियों को सुधारने में बच्चे आगे नहीं आ रहे।

दरअसल, बालिका स्कूटी योजना, 10वीं-12वीं की छात्राओं के लिए प्रोत्साहन योजना और प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के लिए टीएडी की योजना में स्कूलों की वेबसाइट पर बच्चों की ओर से ऑनलाइन आवेदन भरकर भेज दिए गए हैं, लेकिन उनका वैरिफिकेशन नहीं किया गया है। इससे करीब 25 हजार अभ्यर्थियों में से 17 हजार बच्चों के खातों में ही विभाग डाल पाया है।

आवेदन अटकाने की स्थिति पर संभागीय आयुक्त भवानीसिंह देथा के निर्देश पर परियोजना अधिकारी एडीएम हिम्मतसिंह बारहठ ने जिले के 8 ब्लॉक के 98 सरकारी सीनियर अौर सैकंडरी स्कूलों के प्राचार्यों को पत्र भेजकर हिदायत दी है। इसमें स्पष्ट किया गया कि 7 दिन में इन प्रकरणों को क्लीयर कर विभाग को नहीं भेजने पर फॉर्म निरस्त हो जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी बच्चों और शालाप्रधानों की होगी।

पोर्टल पर बच्चों के आवेदन देखे तक नहीं

विभाग के अधिकारी बुद्धिसागर उपाध्याय ने बताया कि आनंदपुरी के 18, बांसवाड़ा में 17, गढ़ी में 16, गांगड़तलाई में 7, बागीदौरा में 8 और घाटोल क्षेत्र में सबसे ज्यादा 32 स्कूलों को 3100 आवेदन बच्चों ने किए हैं, लेकिन उन्हें स्कूलों में साइट खोलकर किसी ने देखा तक नहीं है। कुछ संस्था प्रधानों की हालत यह है कि उन्हें अपना लॉग-इन आईडी ही नहीं पता। ऐसे में बच्चे समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह रहे हैं।

गृह किराए लेने में कॉलेजों के छात्र भी लापरवाह

दिक्कत यह भी है कि जिले के चारों सरकारी कॉलेजों से महिला प्रोत्साहन और गृह किराए के लिए आवेदन कर चुके छात्र-छात्राएं भी बेपरवाह हैं। उनके ऑनलाइन अावेदनों में गलतियां रह गई हैं। इसे लेकर कॉलेजों से मोबाइल पर एसएमएस भी भेजे गए, लेकिन वे सुधार करने या करवाने के लिए आगे नहीं आ रहे। ज्यादा परेशानी गोविंद गुरु कॉलेज में है, जहां सबसे ज्यादा ऐसे आवेदन लंबित हैं। इस पर अब विभाग ने सख्ती बरतने की ठानी है।

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