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नियम : आवासीय शिविर में रात को शिक्षक को रहना जरूरी हकीकत : तीन शिविरों में 392 में से केवल सात ही मौजूद मिले

भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा कक्षा 1 से 5 तक में पढ़ाने वाले शिक्षकों को नई तकनीक से अवगत कराने के लिए इन दिनों...

Dainik Bhaskar

May 23, 2018, 02:30 AM IST
नियम : आवासीय शिविर में रात को शिक्षक को रहना जरूरी 
 हकीकत : तीन शिविरों में 392 में से केवल सात ही मौजूद मिले
भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा

कक्षा 1 से 5 तक में पढ़ाने वाले शिक्षकों को नई तकनीक से अवगत कराने के लिए इन दिनों आवासीय प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। छह दिनों तक चलने वाले इन शिविरों में हर दिन एक शिक्षक पर 300 रुपए खर्च करने किए जा रहे हैं। इसके बाद भी शिक्षकों की इसमें रुचि नहीं दिखाई दे रही। दो माह से शिक्षक इन शिविरों का विरोध भी कर रहे है लेकिन सरकार भी मानने को तैयार नहीं। ऐसे में शिविर केवल खानापूर्ति साबित हो रहे है। प्रारंभिक शिक्षा परिषद की ओर से बांसवाड़ा शहर के भीतर दो ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविरों को आयोजन किया जा रहा है। भास्कर ने मंगलवार को इन आवासीय शिविरों की धरतल पर स्थिति का पता करने के लिए शिविरों में स्टिंग किया तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। किसी शिविर में तो रात को एक भी शिक्षक मौजूद नहीं था। वहीं कुछ में गिनती के दिखे। एक शिविर में लगी बायोमैट्रिक्स मशीन को बीईईओ चार्ज करने के लिए अपने घर ही लेकर चले गए।

शहर के दो और घाटोल में लगे एक आवासीय शिविरों की हकीकत जानने मौके पर पहुंची टीम

शिविरों के हा

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समय-रात 9.15 बजे, स्थान- लोधा मूक बधिर स्कूल

चौकीदार और रसोइयों के लिए शिविर

भास्कर की टीम ने रात सवा 9 बजे लोधा ग्राम पंचायत में स्थित मूक बधिर स्कूल में संचालित शिविर का जायजा लिया तो वहां पहले ही मुख्य द्वार पर ताला लगा मिला। काफी आवाजों के बाद बाहर आए चौकीदार ने अंदर प्रवेश कराकर बताया कि यहां तो कोई भी शिक्षक मौजूद नहीं है, सब चले गए। जब अंदर जायजा लिया तो वहां पर बिस्तर और बिखरे पड़े थे। रसोइएं सोने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि खाना खाकर सभी यहां से चले गए हैं। यहां शिविर में 100 शिक्षकों का प्रतिदिन भोजन बनाया जाता है।


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समय-रात 9.30 बजे, स्थान- हाउसिंग बोर्ड

गांवों के 5 शिक्षकों ने समझी जिम्मेदारी

हाउसिंग बोर्ड राज्यमंत्री धनसिंह रावत के ही मकान के सामने स्थित अजीज प्रेमजी फाउंडेशन में 9.30 बजे पहुंचे तो वहां शिविर स्थल पर ताला लगा हुआ था। जहां चौकीदार भी निजी कार्य से बाहर था। ऐसे में पास ही परिसर में कराई गई आवास व्यवस्था में देखा तो वहां साकड़ीनाल स्कूल के बादामीलाल, डाबड़ीमाल के कांतिलाल, रुपारेल के देवीलाल, कालिया काचली स्कूल के शंभूलाल और धुलजी मौजूद थे। यहां कुछ शिक्षक रात को 8 बजे बायोमैट्रिक हाजरी के बाद घरों की ओर निकल गए तो कुछ भोजन कर।

3

समय-रात 9.00 बजे, स्थान- घाटोल

बायोमैट्रिक ही घर ले गए बीईईओ

घाटोल. शहर के अलावा रात को 9 बजे जब घाटोल के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल में आवासीय शिविर की पड़ताल की तो वहां कुल 168 सभागियों में महज 3 लोग मौजूद थे। जिसमें 2 शिक्षक और 1 गार्ड। वहां बायोमैट्रिक का स्टैंड था लेकिन बायोमेट्रिक मशीन नहीं। जानकारी लेने पर पता चला की बीईईओ चार्जिंग के लिए हाजरी की मशीन को ही अपने साथ ले गए। शिविर में 130 पुरुष शिक्षक और 38 महिला शिक्षक हैं। जो दिन में भी पूरे समय नहीं रुकते। ऐसे में शिविर की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।

भास्कर व्यू

पुराने विषयों पर बार-बार प्रशिक्षण

प्रारंभिक शिक्षा परिषद और माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से पिछले कई सालों से ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण 4 से 5 चरणों में आयोजित कराए जा रहे। जिसमें उन्हीं पुराने विषयों पर शिक्षकों को बार बार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन शिविरों से एेसा कोई सुधार व्यापक स्तर पर नहीं देखा गया है। शिक्षक संगठनों की ओर से बार बार विरोध भी किए जाने के बाद भी इसके संचालन का कोई औचित्य नहीं। यदि संचालित किए भी जा रहे हैं तो गैर हाजिर शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जो शिविरों की गंभीरता को नहीं समझते। ऐसे में शिविरों में लोगों के पैसे बर्बाद करना ही है। विभागीय अधिकािरयाें की ढीली निगरानी व्यवस्था की पाोल भ्ी खुली।

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