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गाय-भैंस पालो, डेयरी या मिल्क कूलिंग प्लांट लगाओ, सरकार देगी 25 फीसदी तक सब्सिडी

किसानों की आय दोगुनी करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 29, 2018, 03:05 AM IST

  • गाय-भैंस पालो, डेयरी या मिल्क कूलिंग प्लांट लगाओ, सरकार देगी 25 फीसदी तक सब्सिडी
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    किसानों की आय दोगुनी करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने गाय-भैंस पालने, डेयरी खोलने और मिल्क चिलिंग प्लांट लगाने सहित 9 काम करने वालों के लिए प्रोत्साहन देने वाली योजना शुरू की है। डेयरी उद्यमिता विकास योजना (डीईडीएस) नामक इस योजना में सरकार की ओर से सामान्य वर्ग के उद्यमी को लागत का 25 फीसदी और एससी-एसटी वर्ग को 33 फीसदी तक सब्सिडी देने का प्रावधान किया है। किसान या इच्छुक व्यक्ति, समूह या सहकारी समिति इसके लिए असीमित राशि का प्लान बनाकर दे सकता है, लेकिन सब्सिडी तय लागत राशि के अनुपात में ही दी जाएगी। सब्सिडी की राशि सारी किश्तें चुकाने के बाद सीधे आवेदक के बैंक खाते में जाएगी। आवेदक को पहली किश्त जारी होने के बाद बैंक ही नाबार्ड में सब्सिडी के लिए आवेदन करेगा। नाबार्ड पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर सब्सिडी जारी करेगा। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के प्रयासों से नाबार्ड ने इस बार राजस्थान को 28 करोड़ 97 लाख रुपए की सब्सिडी जारी की है, जो देश में दूसरे स्थान पर है।

    फार्मपौंड के लिए सरकार किसानों को 90 हजार रु. तक देगी सहायता

    बारिश का पानी सहेजकर खेती करने वालों को होगा लाभ

    सुरेंद्र चिराना|सीकर

    बारिश का पानी सहेजकर खेती करने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है। प्रदेश में गिरते भूजल स्तर को बनाए रखने और सिंचाई में पानी की समस्या से छुटकारा दिलाने के मकसद से राज्य सरकार ने फार्म पौंड निर्माण के लिए किसानों को अब 90 हजार रुपए तक प्रति इकाई सहायता राशि जारी करने की योजना बनाई है। इसके तहत किसान दो तरह के फार्म पौंड बना सकेंगे। एक सामान्य श्रेणी में, जिसके लिए प्रति इकाई लागत 63 हजार रुपए और दूसरा पानी को लंबे समय तक सहेजकर रखने के लिए प्लास्टिक फिल्म से तैयार किए जाने वाले फार्म पौंड के लिए 90 हजार रुपए तक प्रति यूनिट आर्थिक सहायता दी जाएगी। कृषि उपनिदेशक शिवजीराम कटारिया का कहना है कि सरकार ने फार्म पौंड निर्माण के लिए अनुदान राशि में बढ़ोत्तरी की है। योजना में अब तक 1200 घन मीटर क्षमता वाले सामान्य श्रेणी के फार्म पौंड बनाने पर किसान को 52500 रुपए व प्लास्टिक फिल्म से तैयार किए जाने वाले फार्मपौंड के लिए 75 हजार रुपए अनुदान राशि दी जाती थी।

    योजना में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा किसानों को फायदा : खास बात यह है कि विभाग ने योजना में ज्यादा से ज्यादा किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े स्तर पर फार्म पौंड के लक्ष्य निर्धारित किए हैं। किसान पहले आओ पहले पाओ प्रक्रिया के तहत जल्द से जल्द स्कीम का फायदा ले सकते हैं। इसकी एक और बड़ी वजह है सभी फार्म पौंड का निर्माण बारिश का सीजन शुरू होने से पहले किया जाएगा।

    तेज गर्मी में पशुओं को हो सकता है हीट स्ट्रोक, बचाव करना जरूरी

    अलवर| मई-जून में राजस्थान में तापमान अत्यधिक होता है। इसका सीधा असर पशुओं पर पड़ता है। गर्मी में पशु अपने शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने में विफल रहता है तो इसे तापघात यानी हीटस्ट्रोक कहते हैं। ऐसी स्थिति में पशु का तापमान बढ़ जाता व दुग्ध उत्पादन कम हो जाता है। पशु बीमार हो जाता है।

    तापघात के लक्षण : पशु सुस्त हो जाते हैं। पशु सिर नीचा रखते तथा मुंह खोलकर सांस लेते हैं। मुंह से लगातार लार गिरती है। पशु की श्वास गति एवं शरीर का तापमान बढ़ जाता है। पशु का दूध उत्पादन अचानक कम हो जाता है। पेशाब की मात्रा कम हो जाती और नाक व नथुने सूख जाते हैं। अत्यधिक तापमान से पशु की मौत भी हो जाती है।

    योजना में शामिल काम और निर्धारित लागत

    1. दुधारु साहीवाल, रेड सिंधी, गिर, राठी आदि 10 गाय या भैंसों के साथ डेयरी यूनिट लगाने पर : 10 पशुओं की यूनिट की अधिकतम लागत 7 लाख रुपए मान्य होगी।

    2. क्रॉस ब्रीड या भारतीय नस्ल की बछिया, बछड़ी या भैंसों के बछड़े पालन व विकास पर : 20 बछड़ों की यूनिट की अधिकतम लागत 9.70 लाख रुपए मान्य ।

    3. दुधारु पशुओं की यूनिट के साथ वर्मी कंपोस्ट लगाने पर : यूनिट की अधिकतम लागत 25,200 रुपए मानी जाएगी।

    4. मिल्किंग मशीन, दूध को अभिशीतन करने की मशीन (5000 लीटर क्षमता) खरीदने पर : यूनिट की अधिकतम लागत 20 लाख रुपए मान्य।

    5. दूध उत्पाद बनाने के लिए डेयरी प्रोसेसिंग उपकरण खरीदने पर : उपकरणों की अधिकतम लागत 13.20 लाख रुपए मान्य।

    6. दुग्ध उत्पादों के परिवहन की सुविधा और कोल्ड चैन स्थापित करने पर : स्थापना की अधिकतम लागत 26.50 लाख रुपए मान्य होगी।

    7. दूध और दुग्ध उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज की सुविधा स्थापित करने पर : अधिकतम लागत 33 लाख रुपए मान्य।

    8. निजी पशु चिकित्सा क्लिनिक स्थापित करने पर : मोबाइल यूनिट के लिए अधिकतम लागत 2.60 लाख रुपए और स्थायी के लिए 2 लाख रुपए मान्य होगी।

    9. डेयरी मार्केटिंग आउटलेट या डेयरी पार्लर स्थापित करने पर : अधिकतम लागत 3 लाख रुपए मान्य होगी।

    ग्वारपाठे की खेती शुरू की, खुद की संस्था बनाई, अब बेच रहे हैं 45 तरह के उत्पाद

    जितेंद्र शर्मा | परलीका (हनुमानगढ़)

    हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में गांव परलीका के 30 वर्षीय किसान अजय स्वामी ने एलोवेरा (ग्वारपाठे) की खेती कर खुद को किसान उद्यमी के रूप में स्थापित किया है। महज 8वीं कक्षा तक शिक्षित इस किसान ने एक बीघा कृषि भूमि से शुरुआत की थी। आज 50 बीघा जमीन पर एलोवेरा का उत्पादन कर रहे हैं और दूसरे किसानों से भी करवा रहे हैं। उन्होंने बारमंडीसिस नामक प्रजाति के ग्वारपाठे का जूस अपने ही घर में बनाना शुरू किया जो अब पूरे राजस्थान सहित पंजाब, हरियाणा में बेचा जा रहा है। अब इन्हें प्रतिवर्ष 50 से 60 हजार रुपए की शुद्ध आमदनी हो रही है। हाल ही इन्होंने राजस्थान रो हर्बल उत्पाद नाम से भी संस्था पंजीकृत करवाई है। इसमें वे ग्वारपाठे से जुड़े अन्य 45 तरह के उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इनके तैयार उत्पाद किसान मेलों की स्टालों में भी प्रदर्शित किए जाते हैं। इसके लिए वे जिला व राज्य स्तर पर पुरस्कृत हो चुके हैं।

    ये कर सकते हैं आवेदन

    पशुपालन निदेशालय में उपनिदेशक (बैंक प्रोजेक्ट) डॉ. रमेश कुमार गोदारा ने बताया कि किसान, एकल उद्यमी, असंगठित या संगठित क्षेत्र के समूह, स्वयं सहायता समूह, डेयरी कॉपरेटिव सोसायटी, दुग्ध उत्पादकों के संघ, मिल्क फैडरेशन और पंचायती राज संस्थाएं इस योजना में आवेदन के योग्य हैं। कोई एक आवेदक सभी कामों के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक ही परिवार के एक से अधिक लोग भी अलग-अलग आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि बैंक से आवेदन अनुमोदित होने पर बैंक पहली किश्त जारी करेगी और इसकी जानकारी संबधित को जारी करेगी।

    इन संस्थाओं से ले सकते हैं कर्ज : वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण और शहरी बैंक, स्टेट कॉपरेटिव बैंक, स्टेट कॉपरेटिव एग्रीकल्चर और रूरल डवलपमेंट बैंक और नाबार्ड से अनुमोदित अन्य संस्थाओं से कर्ज लिया जा सकता है। यह योजना वित्तीय संस्थाओं से कर्ज लेकर काम करने वालों के लिए ही होगी।

    एससी-एसटी के फंड तय : नाबार्ड की ओर से जारी गाइड लाइन के अनुसार एससी के लिए 16.66 प्रतिशत और एसटी के लिए 8.66 प्रतिशत फंड देना जरूरी है।

    बचाव के उपाय : पशुओं को चारा-दाना रात्रि में या देर शाम को 7-8 बजे के आसपास एवं सुबह जल्दी 5-6 बजे दें क्योंकि चारा खाने के बाद पशु के शरीर में ऊष्मा पैदा होती है। दिन में विशेषकर दोपहर में चारा-दाना कतई न दें। पशुओं को हरा चारा ज्यादा दें। इससे जरूरी खनिज तत्व एवं पानी की पूर्ति होती रहेगी। पशु आहार में सूखे चारे की मात्रा कम रखें क्योंकि इनके पाचन से जो वाष्पशील वसा अम्ल बनते हैं, उनसे अधिक ऊष्मा पैदा होती है। पशु आहार में दाने की मात्रा अधिक रखें।

    यूं करते हैं खेती : पहली बार 2009 में इन्होंने एक बीघा में 7500 पौधे लगाए। इसमें 15 टन ग्वारपाठा हुआ। इसके बाद प्रति वर्ष औसतन 10 टन ग्वारपाठा होता रहा। खेती का सिलसिला अब भी जारी है। पहली बार में महज 25 हजार रु. खर्च किए थे। इसके बदले हर वर्ष प्रति बीघा लगभग 50 से 80 हजार रुपए आमदनी ले रहे हैं। पौधों में ट्यूबवैल और नहरी पानी माह में दो बार देना पड़ता है। बारिश अच्छी होने पर प्रति बीघा उत्पादन भी बढ़ जाता है।

    राइडिंग टाइप सेल्फ प्रोपेल्ड रीपर

    फसल काटने के लिए जिस मशीन का उपयोग होता है, उसे रीपर कहते हैं। यह खासतौर से धान, गेहूं, सोयाबीन और अन्य अनाज तिलहन आदि की कटाई के लिए उपयुक्त है। स्वचालित और ट्रैक्टर चालित दोनों तरह के रीपर खेत में खड़ी फसल को काटते और कटी फसल को दाहिने तरफ फेंकता चलता हैं। इसकी क्षमता 4 से 5 एकड़ प्रतिदिन खड़ी फसल काटने की है। लागत 1.20 लाख से 2 लाख रुपए तक है।

    रीपर कम बाइंडर मशीन

    यह मशीन खड़ी फसल को काटने के साथ पूली बनाकर दाहिने ओर फेंकते हुए चलती है। यह 80 से 100 सेमी तक की ऊंचाई वाली फसल के लिए उपयुक्त है। इस मशीन से एक घंटे में केवल एक लीटर डीजल की खपत से 0.40 हैक्टेयर में फसल की कटाई और बंडल बनाना संभव है। इसकी लागत 2 से 2.80 लाख रुपए है। इसे किराए पर भी चलाया जा सकता है।

    ग्रीनहाउस में सभी प्रकार की सब्जियों का उत्पादन कर ले सकते हैं अच्छा मुनाफा

    मैं अमरूदों की खेती करना चाहता हूं, किससे मिलूं। पौधे कौन से हों और कहां से मिलेंगे?

    -गेंदमल, घाटोल, बांसवाड़ा

    मानसून सत्र में अमरूद के पौधों का रोपण होता है, यदि किसान भाइयों के पास सिंचाई का निश्चित साधन है, तो फरवरी व मार्च में भी अमरूदों के पौधों का रोपण कर सकते हैं। इसकी अधिक जानकारी के लिए नजदीकी उद्यान विभाग कार्यालय पर संपर्क करें।

    नींबू कम लगते हैं, क्या करें?

    -करणसिंह राठौड़, सीकर

    नींबू के पेड़ की जड़ों की छंटाई समय अनुसार करते रहें। उर्वरक-खाद का सही मात्रा व समय पर उपयोग कर नींबू की फसल का अधिक उत्पादन ले सकते हैं।

    एक्सपर्ट मुकेश चौधरी, कृषि अधिकारी उद्यान

    किसान हैल्पलाइन नंबर

    18001801551, 18001806127

    (सुबह 10 से शाम 5 बजे तक, टोल फ्री)

    राज्य स्तरीय हैल्प डेस्क (0141-5102578)

    सवाल भेजें

    खेती से संबंधित अपने सवाल हमारे पास भेजें, विशेषज्ञ सुझाएंगे समाधान। पता- दिल्ली रोड मूंगस्का, अलवर मेल- agrobhaskarr2@gmail.com वॉट्‌सएप नंबर- 7597676923 कॉल न करें।

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