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प्रदेश के 45 विस क्षेत्रों में सरकारी कॉलेज नहीं, यहां के प्रतिनिधि कैबिनेट में रहे, पर नहीं ला पाए कॉलेज

प्रदेश में उच्च शिक्षा के हालात अब भी दयनीय हैं। 200 में से 45 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां आज तक सरकारी कॉलेज नहीं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 20, 2018, 03:45 AM IST

प्रदेश में उच्च शिक्षा के हालात अब भी दयनीय हैं। 200 में से 45 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां आज तक सरकारी कॉलेज नहीं हैं। जनप्रतिनिधियों में इच्छाशक्ति की कमी ही कहेंगे कि मेवाड़ से सरकार में मंत्री के रूप में दबदबा रखने वाले गुलाबसिंह शक्तावत जैसे कांग्रेस के कद्दावर नेता भी अपने क्षेत्र वल्लभनगर में सरकारी कॉलेज नहीं खुलवा पाए। इनके अलावा मेवाड़ में भाजपा और कांग्रेस के ऐसे कई जनप्रतिनिधि सरकार में लंबे समय तक मंत्री रहे, लेकिन अपने क्षेत्रवासियों को उच्च शिक्षा के लिए सरकारी कॉलेज की सौगात नहीं दिलवा सके। ऐसे में यहां के हजारों छात्रों को कॉलेज के लिए या तो कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है या वे अपनी पढ़ाई को स्कूल में ही विराम लगा देते हैं।

यहां के जन प्रतिनिधि भी राज्य सरकार में लंबे समय तक रहे कद्दावर बावजूद कॉलेज नहीं खुलवा पाए

वल्लभनगर : प्रदेश की राजनीति में वल्लभनगर विधानसभा सीट का अपना दबदबा रहा। कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाबसिंह शक्तावत इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि के रूप में सरकार में गृहमंत्री जैसे अहम विभाग के मंत्री रहे, लेकिन अपने निर्वाचन क्षेत्र मेंं सरकारी कॉलेज नहीं खुलवा पाए। पिछली सरकार में अशोक गहलोत के समय शक्तावत के बेटे गजेंद्र सिंह शक्तावत को संसदीय सचिव बनाया गया, लेकिन वे भी क्षेत्र को उच्च शिक्षा के लिए सरकारी कॉलेज की सौगात नहीं दिला पाए।

उदयपुर ग्रामीण : उदयपुर शहर से सटे ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आज तक सरकारी कॉलेज नहीं खुल पाया है। भाजपा से चुन्नीलाल गरासिया और कांग्रेस के खेमराज कटारा प्रदेश सरकार में काफी समय तक मंत्री रहे। लेकिन अपने निर्वाचन क्षेत्र में सरकारी कॉलेज की सुविधा नहीं दिलवा सके। ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों छात्रों को कॉलेज के लिए 30 से 35 किमी दूर शहर आना पड़ता है।

घाटोल और गढ़ी : बांसवाड़ा जिले की घाटोल विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक बने नानालाल निनामा सरकार में संसदीय सचिव के पद रहे। इसी जिले की गढ़ी विधानसभा सीट से विधायक जीतमल खांट वसुंधरा सरकार में मंत्री बने। लेकिन ये भी अपने निर्वाचन क्षेत्र को सरकारी कॉलेज की सौगात नहीं दिलवा पाए।

बागीदौरा : बांसवाड़ा जिले के बागीदौरा विधानसभा सीट से विधायक बने महेंद्रजीत सिंह मालवीय गहलोत सरकार में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री रहे। कैबिनेट मंत्री के रूप में सरकार में जगह बनाने के बावजूद मालवीय अपने निर्वाचन क्षेत्र में सरकारी कॉलेज खुलवाने में सफल नहीं हो सके।

आसपुर : डूंगरपुर जिले के आसपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों को भी अब तक सरकारी कॉलेज खुलने का इंतजार है। प्रदेश में जब कांग्रेस का दबदबा था तो आसपुर से विधायक बने महेंद्र परमार सरकार में मंत्री बने, लेकिन वे अपने क्षेत्र के लिए सरकारी कॉलेज नहीं खुलवा सके।

बड़ी सादड़ी : चित्तौड़ जिले की बड़ी सादड़ी विधानसभा सीट मेवाड़ में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई वाली सीट मानी जाती है। इस विधानसभा क्षेत्र में भी अभी तक सरकारी कॉलेज नहीं खुल पाया है। पिछले कई सालों से यहां के लोग कॉलेज की मांग कर रहे हैं।

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