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बैंकों के 1718 लाख रुपए डूबे, साल भर से एक भी केस में कार्रवाई नहीं

बांसवाड़ा। जिले में बैंकों से लोन लेकर 700 से ज्यादा लोग हाथ खड़े कर चुके हैं। इनसे 1718 लाख रुपए की वसूली को लेकर...

Dainik Bhaskar

Apr 20, 2018, 03:45 AM IST
बांसवाड़ा। जिले में बैंकों से लोन लेकर 700 से ज्यादा लोग हाथ खड़े कर चुके हैं। इनसे 1718 लाख रुपए की वसूली को लेकर बैंकों की ओर से एसडीएम और तहसील की अदालतों में रोडा एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए केस चल रहे हैं, लेकिन एक भी केस पर कार्रवाई नहीं हुई है।

ताज्जुब यह कि यह स्थिति 2016 से चल रही है, जबकि 704 लोगों की 1718.4 लाखों रुपए दबाए हुए हैं। इनके खिलाफ कोर्ट में चल रहे केसेज लंबित होने से बैंकर्स की खंडस्तरीय कमेटियाें में प्रबंधक चिंता भी जता चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हो रहा। नतीजे में इतनी बड़ी रकम फंसने से आगे लोन बांटने में दिक्कतें आ रही हैं।

कानूनी कार्रवाई संभव, लेकिन निर्णय और मदद बिना नहीं

बैंकों की परेशानी यह है कि रोडा एक्ट के तहत केस फाइल करने के बाद कानूनी कार्रवाई कोर्ट पर निर्भर है। निर्णय और प्रशासनिक मदद के बगैर वे आगे कुछ नहीं कर सकते। इसे लेकर जिला स्तरीय बैंकर्स कमेटी की पिछली बैठक में कलेक्टर भगवतीप्रसाद के निर्देश पर एलडीएम ने सभी बैंक शाखाओं को दो-दो क्रॉनिक केसेज एसडीएम-तहसीलदारों को भेजने के निर्देश दिए। इसकी पालना भी हुई, लेकिन फिर मामले पसर गए। इसके चलते बढ़ते नॉन प्रॉफिट एसेट्स यानी एनपीए से बैंकों के नए लोन वितरण पर असर पड़ रहा है।

कितने खातेदारों पर चल रहे रोडा एक्ट के केस

एसडीएम/तहसील न्यायालय खातेदार राशि लाखों में

एसडीएम बांसवाड़ा/छोटी सरवन 54 166.71

एसडीएम बागीदौरा 89 403.68

एसडीएम घाटोल 222 424.85

एसडीएम गढ़ी 72 224.94

एसडीएम कुशलगढ़ 211 305.13

तहसील घाटोल 24 82.3

तहसील बांसवाड़ा 11 47.1

तहसील कुशलगढ़ 16 49.8

तहसील सज्जनगढ़ 05 13.84

कुल नौ अदालतें 704 1718.4

बांसवाड़ा। जिले में बैंकों से लोन लेकर 700 से ज्यादा लोग हाथ खड़े कर चुके हैं। इनसे 1718 लाख रुपए की वसूली को लेकर बैंकों की ओर से एसडीएम और तहसील की अदालतों में रोडा एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए केस चल रहे हैं, लेकिन एक भी केस पर कार्रवाई नहीं हुई है।

ताज्जुब यह कि यह स्थिति 2016 से चल रही है, जबकि 704 लोगों की 1718.4 लाखों रुपए दबाए हुए हैं। इनके खिलाफ कोर्ट में चल रहे केसेज लंबित होने से बैंकर्स की खंडस्तरीय कमेटियाें में प्रबंधक चिंता भी जता चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हो रहा। नतीजे में इतनी बड़ी रकम फंसने से आगे लोन बांटने में दिक्कतें आ रही हैं।

कानूनी कार्रवाई संभव, लेकिन निर्णय और मदद बिना नहीं

बैंकों की परेशानी यह है कि रोडा एक्ट के तहत केस फाइल करने के बाद कानूनी कार्रवाई कोर्ट पर निर्भर है। निर्णय और प्रशासनिक मदद के बगैर वे आगे कुछ नहीं कर सकते। इसे लेकर जिला स्तरीय बैंकर्स कमेटी की पिछली बैठक में कलेक्टर भगवतीप्रसाद के निर्देश पर एलडीएम ने सभी बैंक शाखाओं को दो-दो क्रॉनिक केसेज एसडीएम-तहसीलदारों को भेजने के निर्देश दिए। इसकी पालना भी हुई, लेकिन फिर मामले पसर गए। इसके चलते बढ़ते नॉन प्रॉफिट एसेट्स यानी एनपीए से बैंकों के नए लोन वितरण पर असर पड़ रहा है।

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