• Hindi News
  • Rajasthan
  • Ghatol
  • श्रीराम कथा को आत्मसात करने के लिए शांत चित्त जरूरी
--Advertisement--

श्रीराम कथा को आत्मसात करने के लिए शांत चित्त जरूरी

सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल उदाजी का गड़ा में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिन लालीवाव मठ के महामंडलेश्वर महंत...

Dainik Bhaskar

Jun 07, 2018, 03:45 AM IST
श्रीराम कथा को आत्मसात करने के लिए शांत चित्त जरूरी
सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल उदाजी का गड़ा में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिन लालीवाव मठ के महामंडलेश्वर महंत हरिओमदास महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा को आत्मसात करने के लिए चित्त का शांत होना जरूरी है। जब तब हमारे चित्त में विचारों के झंझावात और सपनों के जंजाल चलते रहेंगे, मन लाभ-हानि के तराजू पर ऊपर-नीचे होते रहेगा, तब तक हम प्रभु कृपा को प्राप्त नहीं कर सकते। महाराजश्री ने कहा कि जिसके भीतर दिशा और दृष्टि का अभाव होता है, उसके जीवन को दुर्दशा का शिकार होना पड़ता है।

हमारे पास जो भी विकलता, वेदना, दुःख, अभाव अवसाद है उसका मूल कारण अज्ञानता है। प्रमाद के कारण हम सत्य को नहीं जानते। अपनी अज्ञानता को चुनौती दे ताकि द्वंद - दुविधा अवसाद से मुक्त हो सके। महाराज ने बुधवार को श्री राम कथा में यह विचार व्यक्त किए। दिव्य जीवन कैसे पाएं, विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि द्वंदों के आघात से मुक्त होने के लिए स्थायी समाधान का पहला साधन श्रवण है फिर मनन । उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक होने का अर्थ बहुत स्वाभाविक हो जाना है ताकि स्वप्न में भी आप हिंसा न कर सकें। जो व्यक्ति धर्म के पथ पर चलकर नियम व नीति से जीवन जीता है, सुख स्वयं उसके पीछे दौड़े चला आता है। बिना नीति के घर, परिवार, राजनीति और अर्थनीति नहीं चल सकती। महाराज श्री ने कहा कि भक्त उसे कहते है, जिसे भय नहीं होता। मनुष्य तभी डरता है, जब उसकी ईश्वर से दूरी होती है। जब मनुष्य भगवान से प्रीत लगा लेता है, तो उसे सारे सुखों का स्त्रोत प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान का अर्थ जानना तथा भक्ति का अर्थ मानना है। भक्ति स्वतंत्र होती है। जिस व्यक्ति ने अपने मन के विकारों को शुद्ध कर लिया, वह भक्ति प्राप्त कर लेता है।

बुधवार को रामकथा में भरत कैकेयी संवाद, राम निशादराज मित्रता और भरत मिलाप के प्रसंग सुनाए गए। कथावाचक लालीवाव मठ के मठाधीश हरिओमशरणदास महाराज ने केवट प्रसंग से प्रारंभ कर भरत कैकेयी संवाद, राम निशादराज दोस्ती और श्रीराम भरत मिलाप की कथा सुनाई तो पांडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा में बड़ौदा मंडल अध्यक्ष शंकरदास महाराज, जगदीशराम छोटीमूरा, भावनगर के हरिराम महाराज ने भी प्रवचन दिए। संतों का स्वागत संस्था निदेशक महेंद्र राजपुराेहित और संचालक रामावतार पारीक ने किया।

हमें परमात्मा के प्रति श्रद्धा और विश्वास रखना चाहिए- संत

परतापुर. पंचायत समिति गढ़ी के खेड़ा गांव में सर्व समाज की ओर से आयोजित भागवत कथा में बुधवार को राजा परीक्षित अौर कपिल मुनि प्रागट्य का वृतांत सुनाया। कथावाचक बाल गोपाल चेतन महाराज ने कहा कि परमात्मा के लिए सब समान है, वहां कोई ऊंच नीच नहीं है। मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा भागवत कथा सुननी चाहिए। परमात्मा के पास जाने से सारे कष्टों का निवारण होता है। भक्त के लिए भगवान हमेशा आगे रहते हैं। इसलिए हमें भगवान के प्रति विश्वास और श्रद्धा रखनी चाहिए। इस दौरान शंभुलाल नायक, अंबालाल नायक, मनोहर शर्मा, मोहन सुथार, बिशन सोलंकी, मुकेश पंचाल सहित सभी समाजजनों ने पोथी पूजन किया।

घाटोल में कथा के दौरान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की सजाई गई झांकी और मौजूद श्रद्धालु।

X
श्रीराम कथा को आत्मसात करने के लिए शांत चित्त जरूरी
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..