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तीन गांवों की बेटियों को 8वीं के बाद छोड़नी पड़ रही पढ़ाई क्योंकि आगे स्कूल के लिए जंगल से रास्ता, तीन हो चुकी अगवा

चििड़यावास. पानीवाला गढ़ा गांव की इन बेटियों ने दहशत के कारण स्कूल छोड़ दिया है। पानीवाला गढ़ा, डांगला पाड़ा और पदमनाथ...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 11, 2018, 03:45 AM IST

तीन गांवों की बेटियों को 8वीं के बाद छोड़नी पड़ रही पढ़ाई क्योंकि आगे स्कूल के लिए जंगल से रास्ता, तीन हो चुकी अगवा
चििड़यावास. पानीवाला गढ़ा गांव की इन बेटियों ने दहशत के कारण स्कूल छोड़ दिया है।

पानीवाला गढ़ा, डांगला पाड़ा और पदमनाथ गढ़ा गांव का मामला

प्रियंक भट्ट /हेमंत पंड्या | बांसवाड़ा

सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर जोर दे रही है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बांसवाड़ा शहर से महज 10 किलोमीटर दूर 3 गांव ऐसे हैं जहां 8वीं के बाद बेटियां पढ़ाई नहीं करती। इसकी वजह परिजनों में बेटियों के साथ अनहोनी होने का डर है। दरअसल, इन गांवों में 8वीं तक का सरकारी स्कूल है। जिसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए 6 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है लेकिन रास्ते में जंगल पड़ता है। गांव की कुछ छात्राओं के अगवा होने और छेड़छाड़ की वारदातें हो चुकी है। इससे ग्रामीण बेटियों की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद हंै। ऐसे में मजबूरी में परिजन बेटियों की आगे की पढ़ाई नहीं करवाकर हाथ पीले करवा रहे हंै। यहीं वजह है कि बीते 3 साल में 26 बेटियाें को 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। एकाएक बेटियों के पढ़ाई छोड़ने पर भास्कर संवाददाता ने तलवाड़ा पंचायत समिति की माकोद ग्राम पंचायत के तीन गांव पानीवाला गढ़ा, पदमनाथ का गढ़ा और डांगलापाड़ा में पड़ताल की तो वजह चौंकाने वाली सामने आई। तीनों गांव एक-दूसरे से सटे हैं। 3 हजार की आबादी वाले इन गांवों में एक तरफ जंगल है। पानीवाला गढ़ा में साल 2004 में यूपीएस स्कूल क्रमोन्नत हुआ। पास ही डांगलपाड़ा गांव है जिसकी आबादी 600 और पदमनाथ का गढ़ा में 1100 के करीब आबादी है। इन गांवों में 8वीं के बाद सीनियर स्कूल के लिए 6 किलोमीटर दूर माकोद या फिर 4 किलोमीटर दूर तेजपुर जाना पड़ रहा है। जंगल होने के कारण आवागमन के कोई साधन नहीं है। ऐसे में छात्राओं के वीराने में पैदल इतनी लंबी दूरी तय करने में हमेशा अनहोनी का डर बना रहता है।

वार्ड पंच रकमा दावोड़ ने बताया कि 8वीं के बाद पढ़ाई के लिए गांव से बाहर छात्राओं के पैदल जाने वाला मार्ग काफी वीरान है। कई बार शरारती लड़के भी छेड़छाड़ करते हैं। दूसरी ओर यहां जानवरों का भी डर बना रहता है। सुखराम डामोर का कहना है कि कुछ छात्राओं के अगवा होने के बाद तो उन्हें अकेले इस रास्ते स्कूल जाने देने में भी डर लगने लगा है। वालेंग पटेल ने बताया कि 10वीं या 12वीं तक की स्कूल बनने से तीन गांवों के विद्यार्थियों और उनके परिजनों को राहत मिलेगी।

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क्रमोन्नति के लिए 150 का नामांकन जरूरी, अभी 162 बच्चे

पानीवाला गड़ा में मौजूदा समय में 95 बालक और 67 बालिकाओं का रोल है। जबकि वर्ष 2015-16 में कुल रोल 206 था। वर्ष 2016-17 में कुल रोल 211 हुआ और अब घटकर 162 ही रह गया है। वर्तमान में 8वीं कक्षा में 20 बालक और 13 बालिकाएं है। आंकड़ों से साफ पता चल रहा है कि बालिकाओं का रोल लगातार घट रहा है। नियम के अनुसार 150 से ज्यादा नामांकन होने पर स्कूल को क्रमोन्नत कर माध्यमिक किया जा सकता है। स्कूल से रीना पुत्री अदेंग, लीला पुत्री कुरिया, भावना पुत्री कचरू, हीरा पुत्री कचरू, अनिता पुत्री देवेंग, कल्पना पुत्री देवेंग, आशा पुत्री रू पेंग, कल्पना पुत्री प्रेमजी, अनिता पुत्री लालजी, केसर पुत्री धुला, लाली पुत्री मानजी, काली पुत्री मानजी, नीता पुत्री धुला, रीना पुत्री वजेंग, माया पुत्री दला, लक्ष्मी पुत्री राजेंग, अमीषा पुत्री वरसेंग, काली पुत्री धनजी, मनीषा पुत्री लाला, संगीता पुत्री बहादुर, अनिता पुत्री विठला, लक्ष्मी पुत्री सूखा, गुड्डी पुत्री लक्ष्मण, जीवनी पुत्री केसू, काली पुत्री रंगजी, कला पुत्री भारमा को आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

जनप्रतिनिधियों से कई बार मिले, पर नहीं मिला समाधान

ग्रामीण लंबे समय से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल के लिए प्रयास कर रहे है। कई बार विभागीय अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया है लेकिन कोई राहत नहीं मिल रही है। समाजसेवी किशनलाल निनामा बताते हंै कि स्कूल बनाने ग्रामीणों ने 12 बीघा जमीन पर दान करने के लिए भी तैयार हंै।

इन 3 बेटियों से अगवा होने से ग्रामीण भयभीत

केस -1

पानीवाला गढ़ा निवासी छात्रा गुड्डी पुत्री हुका काे 3 महीने पहले इसी रास्ते जाते किसी ने अगवा कर लिया, जिसका आज तक कोई पता नहीं लगा।

केस -2

2 साल पहले घाटोल निवासी 8वीं की छात्रा पानीवाला गढ़ा में अपने मामा के घर रहकर पढ़ाई कर रही थी। रास्ते में बोलेरो जीप में सवार होकर आए कुछ बदमाश जबरन उसे अगवा कर ले गए। बाद में पुलिस ने बालिका को तलाशा और उदयपुर महिला आश्रम भेजा।

इसलिए जागी पढ़ाई में रुचि

सरकार के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सरीखे जागरुकता अभियान और बाल विवाह पर रोक के चलते इन गांवाें में बीते कुछ सालों से परिजन भी बेटियों को स्कूल भेजने में ज्यादा रुचि दिखाने लगे। इसी का नतीजा है कि पहले जहां 5वीं या 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने वाली बच्चियां अब 12वीं तक पढ़ाई करने की इच्छुक है। इसी के चलते अब 8वीं के बाद परिजन उन्हें पढ़ने पड़ोसी गांव के स्कूल भेजने लगे। लेकिन जंगल का रास्ता होने से बेटियों पर जानवरों के हमले और छेड़छाड़ की घटनाएं भी बढ़ी।

केस -3

करीब सालभर पूर्व पदमनाथ का गढ़ा की एक छात्रा को स्कूल जाते समय रास्ते से एक युवक बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया। पहले तो ग्रामीणों ने किसी जानवर के हमले का शिकार होना माना लेकिन बाद में छात्रा मिली तो परिजनों ने राहत महसूस की। तीनों की मामलों में परिजनों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। इसके पीछे शरारती युवकों का खाैफ भी माना जा रहा है।

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