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विपत्ति में साथ दे, वही सच्चा मित्र : हरिओमदास

घाटोल। सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल, उदाजी का गड़ा, घाटोल में श्री राम कथा का वाचन करते हुए लालीवाव मठाधीश हरिओम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 09, 2018, 03:50 AM IST

विपत्ति में साथ दे, वही सच्चा मित्र : हरिओमदास
घाटोल। सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल, उदाजी का गड़ा, घाटोल में श्री राम कथा का वाचन करते हुए लालीवाव मठाधीश हरिओम शरणदास महाराज ने श्रीराम मित्रता प्रसंग से आगे बताते हुए मित्रता का महत्व प्रकट किया और बताया कि मित्रता शब्द साधारण नहीं है। जो सच्चा मित्र होता है वही मित्रता शब्द का आदर्श प्रस्तुत करता है और जब मित्र के जीवन में कोई संकट आता है। तब वह हर तरह से मित्र साथ देता है और विपत्ति में मित्र का साथ नहीं छोड़ता है। महाराज ने बताया कि श्रीराम सच्चे मित्र थे। उन्होंने सुग्रीव को वचनानुसार किष्किंधा का राजपद दिलाया और पाप एवं अन्याय के प्रतीक बाली को तीर से मारा,तब बाली ने श्रीराम की शरण ली एवं श्रीराम ने देवलोक का बाली को वास दिया।

अंगद को श्रीराम सेवा की आज्ञा देकर बाली ने दिव्य लोक का गमन किया। सुग्रीव ने श्रीराम का सहयोग करते हुए अपने सभी सेनापतियों को सीताजी अन्वेषण के लिए समस्त दिशाओं में भेजा जिसमें अंगद के नेतृत्व में गए। जहां हनुमान के परामर्श जामवंत की प्रेरणा से लंका मे प्रवेश कर विभीषण के परामर्श से सीताजी का अशोक वाटिका में दर्शन पाया और अपनी थकान व भूख मिटाने में लगे इसी समय लंका दहन किया। कथा में श्रीराम द्वारा रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापना की झांकी सजाई गई जो श्रद्धालुअों के आकर्षण का केंद्र बनी बनी।

कथा में भगवान शिव की पूजा करते कलाकार।

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