Hindi News »Rajasthan »Guda Balotan» जीरे की फसल में एपिड कीट का प्रकोप, िकसान िचंतित

जीरे की फसल में एपिड कीट का प्रकोप, िकसान िचंतित

भास्कर न्यूज | गुडा बालोतान कस्बे सहित आसपास के गांवों में इन दिनों कृषि कुओं एवं नहरी सिंचाई से सिंचित रकबो में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:55 AM IST

भास्कर न्यूज | गुडा बालोतान

कस्बे सहित आसपास के गांवों में इन दिनों कृषि कुओं एवं नहरी सिंचाई से सिंचित रकबो में रबी फसल की बुवाई करने के दौरान गेहूं, रायड़ा, देशी जीरा, ईसबगोल व चने की बुवाई की गई है। हालांकि वर्तमान के दिनों में सर्दी का असर गेहूं व रायड़े की फसल के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, लेकिन देशी जीरे व ईसबगोल की फसलों के लिए दिन की गर्मी व रात की सर्दी ये मौसम का परिवर्तन कीट व्याधि को बढ़ावा देता नजर आ रही वैसे देखा जाए तो बार बार मौसम बदलने का सीधा प्रतिकूल प्रभाव रबी फसलों में जीरे व ईसबगोल पर जरूर पड़ता है।

ये तो अच्छा हुआ कि इस वर्ष पाले का इतना जोर नहीं रहा और न ही शीतलहर ने सताया। वरना जीरे व इसबगोल की फसल अब तक तो बर्बाद हो चुकी होती। इस वर्ष मौसम के मामले में देखा जाए तो किसानों की किस्मत अच्छी जरूर नजर आ रही है। लेकिन पिछले कई दिनों से दिन के समय गर्मी ने जोर पकड़ा है और रात के समय सर्द हवाएं चलने से इस बदलते मौसम के परिवेश में कीट व्याधि का असर बढ़ता दिखाई दे रहा है। गांवों के खेतों में खड़ी जीरे व इसबगोल की फसल में देशी जीरे की फसल में इन दिनों एपिड (मोयले) कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। वैसे एपिड (मोयले) कीट की दो प्रजाति पाई जाती है। एक हरा और दूसरा काला कीट होता है। जीरे की फसल हरी होने से हरे रंग का कीट जल्दी से दिखाई नहीं देता है। और इसका प्रकोप तेजी से बढऩे पर फसलें उन्नति नहीं कर पाती है। तब किसानों की ओर से ध्यान लगाकर देखने पर ये कीट पकड़ में आ जाता है। दूसरी प्रजाति काले रंग की होती है और ये जीरे के साथ साथ रायड़े की फसल का रस भी चूस लेते है। जिससे फसलों के आगे बढऩे की क्रिया थम जाती है। तथा फसलें सूखकर जलने या खराब होने की स्थिति में आ जाती है।

प्रकोप

सरकार ने सिर्फ 2013 में एक बार करवाई थी दवाई उपलब्ध, बाजारों से महंगे दामों में खरीदने को मजबूर किसान

जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने पर आती है जलने की शिकायत

जीरे की फसल में इन दिनों एपिड (मोयले) रोग के साथ साथ खेतों में सर्दी के कारण भूमि में नमी रहने एवं किसानों द्वारा अधिक सिंचाई कर देने से जड़ जलने का रोग देखने को मिल रहा है। कृषि विभाग की माने तो जीरे की फसल में जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने से जड़ जलने की शिकायत आती है। अगर खेतों की मिट्टी में सर्दी के चलते नमी देखने को मिले तो किसानों को चाहिए कि फसल की सिंचाई नहीं करे। अगर अधिक सिंचाई कर दी जाती है तो फसल को नुकसान से नही बचाया जा सकता है। इसी के साथ कृषि विभाग के अनुसार कई खेतों में खड़ी जीरे की फसल मे सफेद रोली का प्रकोप भी सामने आ रहा है। ये मौसम के अदल बदल होने से होता है। इसमें फसल पर सफेद पाउडर सा जम जाता है। जिससे फसलें उन्नति नही कर पाती है।

इनका कहना है

मौसम बदलने से जीरे की फसल सबसे पहले प्रभावित होती है। दिन में गर्मी व रात में सर्द हवाओं कारण रबी फसलों में छाछिया, झुलसा व एपिड (मोयले) जैसे रोग फैलने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में अगर रबी फसलों पर एपिड (मोयले) का प्रकोप दिखाई दे तो किसानों को चाहिए कि घुलनशील थाईरॉन पाउडर या फायोमेक्स एक एमएल प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर प्रति हैक्टर में 15 टंकी का छिड़काव करना चाहिए। - दानाराम गर्ग, सहायक कृषि अधिकारी गुड़ा बालोतान

India Result 2018: Check BSEB 10th Result, BSEB 12th Result, RBSE 10th Result, RBSE 12th Result, UK Board 10th Result, UK Board 12th Result, JAC 10th Result, JAC 12th Result, CBSE 10th Result, CBSE 12th Result, Maharashtra Board SSC Result and Maharashtra Board HSC Result Online
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Guda Balotan News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: जीरे की फसल में एपिड कीट का प्रकोप, िकसान िचंतित
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Guda Balotan

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×