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बलि प्रथा का विरोध किया, गायों को बचा गोशालाएं खुलवाई

भास्कर संवाददाता | कंवलियास मेवाड़ क्षेत्र के जैन समाज के आराध्य गुरुदेव प्राज्ञवर पन्नालाल मसा की जयंती बुधवार...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 04:05 AM IST
भास्कर संवाददाता | कंवलियास

मेवाड़ क्षेत्र के जैन समाज के आराध्य गुरुदेव प्राज्ञवर पन्नालाल मसा की जयंती बुधवार को त्याग व तपस्या के साथ मनाई जाएगी। कंवलियास में कार्यक्रम होंगे।

नानक वंश के पट्टधर आचार्य पूज्य गुरुदेव धूलचंद मसा के बाद नानक संप्रदाय के शासन संचालन की बागडोर पन्नालाल मसा प्राज्ञ के हाथों में आई। संत शिरोमणि पन्नालाल मसा क्रांतिकारी, प्रगतिशील व राष्ट्रवादी विचारों के धनी थे। महादेव भाई देसाई, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास, सांसद मुकुट बिहारी लाल भार्गव आदि राष्ट्र नेता आपसे आशीर्वाद प्राप्त करते रहते थे। तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन व राजस्थान के मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने भी गुलाबपुरा में आपकी सेवा में समुपस्थित होकर,जनता के शैक्षणिक विकास के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया था।

वे प्राणी मित्र थे। उनकी करूणा का विस्तार न केवल मानव-समाज तक बल्कि संपूर्ण प्राणी जगत के प्रति था। इसलिए जहां भी हिंसा की बात सुनते, बलि-प्रथा की चर्चा सुनते बलि-प्रथा के विरोध में खड़े हो जाते और पारस्परिक समझ से उसे बंद करवाते थे। तिलोरा, गनेहड़ा, धनोप, कोलपुर आदि गांवों में बलि प्रथा बंद करवाकर वहां शिलालेख लगवाए। गायों के प्राण बचाकर गोशालाओं का निर्माण करवाया।

आराध्य गुरुदेव प्राज्ञवर पन्नालाल मसा की जयंती त्याग व तपस्या के रूप में मनाएंगे आज, कार्यक्रम होंगे

रियासतों ने गोचर भूमि पर लगान माफ कर दिया था

गोविंदगढ़, रिंया, मेड़ास, देवलियां कलां, भिनाय, मसूदा, बनेड़ा आदि राजाओं ने अपने राज्य की सीमा में कई आगतों की घोषणा की। गोचर भूमि पर लगान माफ किया। पर्युषण, नवरात्र आदि पर्वों के दिनों में शिकार नहीं करने की प्रतिज्ञा ली। कंवलियास, आगूंचा, रिंया, मसूदा आदि स्थानों पर स्नेह और सौहार्द भाव की धारा प्रवाहित की। वृहद श्रमण-संघ के निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय रहा। पाली, सोजत,जोधपुर,सादड़ी, अजमेर आदि स्थानों पर आयोजित श्रमण-सम्मेलन में उनके सक्रिय सहयोग से प्रेम व संगठन का अभूतपूर्व वातावरण निर्मित हुआ।

भास्कर संवाददाता | कंवलियास

मेवाड़ क्षेत्र के जैन समाज के आराध्य गुरुदेव प्राज्ञवर पन्नालाल मसा की जयंती बुधवार को त्याग व तपस्या के साथ मनाई जाएगी। कंवलियास में कार्यक्रम होंगे।

नानक वंश के पट्टधर आचार्य पूज्य गुरुदेव धूलचंद मसा के बाद नानक संप्रदाय के शासन संचालन की बागडोर पन्नालाल मसा प्राज्ञ के हाथों में आई। संत शिरोमणि पन्नालाल मसा क्रांतिकारी, प्रगतिशील व राष्ट्रवादी विचारों के धनी थे। महादेव भाई देसाई, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास, सांसद मुकुट बिहारी लाल भार्गव आदि राष्ट्र नेता आपसे आशीर्वाद प्राप्त करते रहते थे। तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन व राजस्थान के मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने भी गुलाबपुरा में आपकी सेवा में समुपस्थित होकर,जनता के शैक्षणिक विकास के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया था।

वे प्राणी मित्र थे। उनकी करूणा का विस्तार न केवल मानव-समाज तक बल्कि संपूर्ण प्राणी जगत के प्रति था। इसलिए जहां भी हिंसा की बात सुनते, बलि-प्रथा की चर्चा सुनते बलि-प्रथा के विरोध में खड़े हो जाते और पारस्परिक समझ से उसे बंद करवाते थे। तिलोरा, गनेहड़ा, धनोप, कोलपुर आदि गांवों में बलि प्रथा बंद करवाकर वहां शिलालेख लगवाए। गायों के प्राण बचाकर गोशालाओं का निर्माण करवाया।

कई संस्थाओं का निर्माण किया

जन कल्याणकारी एवं धर्म साधना के प्रति उन्मुख करने वाली अनेक संस्थाओं का निर्माण किया। जिनमें श्वेतांबर स्थानकवासी जैन स्वाध्यायी संघ गुलाबपुरा, नानक जैन छात्रालय गुलाबपुरा, नानक जैन श्रावक समिति बिजयनगर, प्राज्ञ महाविद्यालय बिजयनगर, प्राज्ञ पुस्तक भंडार भिनाय, जैन विद्यालय गुलाबपुरा, वर्तमान में गांधी उमावि आदि संस्थाएं प्रमुख हैं।