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राज्यस्तर पर प्रसारित हो रहे हैं हमारे सरकारी स्कूलों के वीडियो, एजुसेट के माध्यम से प्रदेश में होता है प्रसारण

जिले के सरकारी स्कूलों में तैयार किए गए एजुकेशनल वीडियो अब प्रदेश भर में प्रसारित होने लगे हैं। हाल ही में राजकीय...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:30 AM IST
राज्यस्तर पर प्रसारित हो रहे हैं हमारे सरकारी स्कूलों के वीडियो, एजुसेट के माध्यम से प्रदेश में होता है प्रसारण
जिले के सरकारी स्कूलों में तैयार किए गए एजुकेशनल वीडियो अब प्रदेश भर में प्रसारित होने लगे हैं। हाल ही में राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय सूरेवाला व राजकीय उच्च माध्यमिक सूरांवाली के वीडियो प्रसारण के लिए चयनित हुए हैं। अभी इन स्कूलों के कुल तीन वीडियो चयनित हुए हैं लेकिन चयन के मापदंड पता लगने के बाद से सभी विषयों के वीडियो बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले हनुमानगढ़ िजले के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय रामगढ़ के प्रधानाचार्य मनोज आर्य के एजुकेशनल वीडियो को तो प्रदेश स्तर पर पुरस्कार मिला था।

मनोज आर्य अपने वीडियो में एनिमेशन का भी उपयोग करते हैं। सार्क देशों से संबंधित उनके वीडियो को स्कूलों में प्रसारण के बाद यू ट्यूब पर अपलोड किया गया। इस वीडियो को करीब 30 हजार लोग देख चुके हैं जिनमें प्रतियोगी परीक्षा�ओं में बैठने वाले अभ्यर्थी भी शामिल हैं। गौरतलब है कि प्रदेश भर के बच्चों को विषय विशेषज्ञों के वीडियो दिखाए जाते हैं ताकि उनकी शंका�ओं का समाधान हो सके। चयनित वीडियो का प्रसारण एजुसेट के माध्यम से आईसीटी थर्ड फेज के स्कूलों में किया जाता है। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हजारों बच्चे लाभांवित होते हैं। एजुसेट के माध्यम से प्रसारण के बाद वीडियो को यू ट्यूब पर भी अपलोड किया जाता है ताकि अन्य स्कूलों के टीचर्स और बच्चे भी लाभ उठा सकें।

प्रदेश भर में प्रसारित होने वाले वीडियो का चयन व प्रसारण बोध शिक्षा समिति की और से किया जाता है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का बोध शिक्षा समिति के साथ टाईअप है। समिति की �और से स्कूलों से प्राप्त वीडियो में से प्रसारण योग्य वीडियो का चयन किया जाता है। इसके बाद एडिटिंग व आवाज में आने वाली किसी भी तरह की दिक्कत को दूर कर एजुसेट के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। जानकारी के मुताबिक वीडियो के चयन का मुख्य आधार किसी विशेष पाठ को पढ़ाने के लिए अपनाया गया नया तरीका होता है। उदाहरण के लिए छोटे बच्चों को जिंगल्स और कविता�ओं के माध्यम से पढ़ाने के लिए वीडियो तैयार किए जाते हैं। बेहतर टीचिंग मेथोडोलॉजी और वीडियो वीडियो की क्वालिटी के आधार पर प्रसारण के लिए चयन किया जाता है।

कई स्कूलों में हो रहा है वीडियो पर काम चयन: शिक्षा के क्षेत्र में हनुमानगढ़ जिले में पिछले काफी समय से नवाचार हो रहे हैं। जिले के टीचर्स छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए जिंगल्स और कविता�ओं का सहारा ले रहे हैं। ऐसे ही एक वीडियो का चयन प्रदेश भर में प्रसारण के लिए हुआ है। इसके अलावा सूरेवाला स्कूल के चौथी कक्षा के लिए बनाए गए वीडियो का भी प्रसारण किया गया है। इसमें टीचर्स ने नवाचार करते हुए मॉडल्स आदि के माध्यम से विषय को समझाया है। मनोज आर्य ने सार्क देशों से संबंधित वीडियो के अलावा प्राइमरी क्लासेज के लिए त्रिभुज का परिचय वीडियो बनाया था। इसके अलावा थेल्स प्रमेय को लेकर बनाए गए उनके वीडियो को राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया गया था।

राज्य स्तर पर भी पुरस्कृत हो चुका है जिले के टीचर का बनाया हुआ एजुकेशनल वीडियो

1. पढ़ाने के लिए बेहतर टीचिंग मैथोडोलॉजी का उपयोग

2. स्कूलों की क्लासों में मॉडल्स व चार्ट आदि के माध्यम से पढ़ाई

3. एजुकेशनल वीडियो की बेहतर �’डियो-वीडियो क्वालिटी

4. वीडियो में एनिमेशन का उपयोग जोकि अभी बड़ी कंपनियां ही कर रही हैं

चयन का मुख्य आधार विशेष पाठ को पढ़ाने के लिए अपनाया गया नया तरीका होता है



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