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आज कार्टूनिस्ट की नजर से देखिए...हनुमानगढ़ में होली के रंग

भाजपा नेता जसपाल की चाल अब जनता के घरों की तरफ होने लगी है। पहनावा भी बदल कर भाजपा के रंग में रंगा है। होली के सुअवसर...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:00 AM IST
भाजपा नेता जसपाल की चाल अब जनता के घरों की तरफ होने लगी है। पहनावा भी बदल कर भाजपा के रंग में रंगा है। होली के सुअवसर को वह खोना नहीं चाहते तभी तो कोई भी मिलता है तो सामने वाले का हाल चाल बाद में पूछते हैं पहले यही सवाल होता है ‘तुस्सी दसो मैं फेर लड़ा…’ लेकिन जवाब यह भी आता है कि ‘होली ते खेड दे है लड़ दे नीं सरदार जी’।

भास्कर कार्टून स्टोरी

सियासी गलियारे

‘होली तां खेड़ दे है लड़ दे नीं सरदार जी’

जोधासिंह निवास

पुलिस को देख चेहरे के सारे रंग ही उड़ गए इनके...

पता चला कि होली वाले दिन पुलिसकर्मी जोधासिंह के घर पहुंच गए। जोधासिंह पहले तो बाहर ही नहीं आए। बाद में पुलिसवालों ने बताया कि वह तो होली खेलने आए हैं। वैसे जोधासिंह इस्तीफा देने के बाद उस आदमी को तलाश रहे हैं, जिसने सबसे पहले इस मामले को उछाला था। कह रहे हैं, उसे मैं जमकर रंग लगाऊंगा, वो भी काला।

इन कार्टून को मनोरंजन की दृष्टि से देखा जाए।

रंग और हुल्लड़ का पर्व आ गया, वो भी चुनावों से ठीक पहले। यानी नेताओं और आमजन दोनों के लिए बड़ा मौका एक-दूसरे से निपटने का और निपटाने का भी। नेता वोटरों को ढूंढ-ढूंढ कर अपने ही रंग और गुलाल मलेंगे तो वोटर भी इस फिराक में है कि इस होली पर नेताओं को ऐसा रंग लगाएं कि वह कभी साफ ही ना हो। इस होली के आते-आते कइयों के चेहरे फीके पड़े हैं तो कोई इस बार जमकर होली खेलने के मूड में है। इनमें कुछ ऐसे भी है, जिन्होंने इस होली हुड़दंग की तैयारी भी कर ली है।

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पापा आपकी तो हो (ली), भाजपा नेता हुए लाल-पीले

मंत्री डॉ. रामप्रताप सूखे रंगों से ही होली खेलते हैं लेकिन इस बार चुनावी रंग ऐसा चढ़ा है कि अभी से चुनावी बाल्टी में से पिचकारी भरते नजर आ रहे हैं। बेटा अमित भी पीछे नहीं है। वह अपने पिता से ही कहते हैं कि मुझे रंग दो....मानो उनकी इस गुहार से सुनाई पड़ता है- पापा आपकी तो हो (ली)। पिता पुत्र में होली खेलने के इस अनूठे अंदाज को देख भाजपा नेता लाल-पीले होते दिखे।

ऐसे में वहां पूर्व मंत्री चौधरी विनोद कुमार भी कांग्रेसी रंगी पिचकारी लेकर पहुंच गए और बोले-यारो सब दुआ करो! अमित को देखे चौधरी साहब का बेटा भूपेंद्र बोल पड़ा कि मेरा नंबर कब आएगा तो चौधरी जी के मुंह से वही पुरानी बात ही निकली ’भौत बढिय़ा जी भौत बढिय़ा..’।

गूंगी होली खेलेंगे, नेता जी आए तो कहेंगे ‘बोट नीं सोट देस्यां’

इस बार मायड़ भाषा प्रेमी होली तो खेलेंगे पर बोलेंगे नहीं। हालांकि वैसे भी इनकी जुबान पर तो ताला लगा है। उनका कहना है कि होली के दिन अगर कोई नेता उनके पास वोट मांगने आया तो बस बोलेंगे ‘बोट नीं सोट देस्यां। खबर ये भी है कि मायड़ भाषा प्रेमी अब बाजार में भी जाते हैं तो उन्हें होली के इन दिनों में सिर्फ राजस्थानी की मान्यता का रंग ही दिखता है। उनका कहना है कि यह रंग नेताओं को नहीं दिखता। उन्हें तो सिर्फ चुनावी रंग दिख्ता है। वैसे राजस्थानी भाषियों के मुंह पर लगे ताले की चाबी अब तक नहीं मिल पाई है। उनका यह भी कहना है कि राजस्थानी आने वाले चुनावों में ही अपना अनूठा रंग दिखाएंगे।

हनुमानगढ़ की कार्टूनिस्ट परमदीप कौर ने ये कार्टून तैयार किए। भास्कर टीम- मनोज पुरोहित/परमगीत शर्मा

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