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बीती रात को आए तेज

आंधी से गिरी कच्ची छत, दादी व दो पोतों की मौत; 6 साल पहले पक्के मकान का किया था आवेदन, कांग्रेस सरकार ने राशि नहीं दी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 07, 2018, 02:55 AM IST

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    आंधी से गिरी कच्ची छत, दादी व दो पोतों की मौत; 6 साल पहले पक्के मकान का किया था आवेदन, कांग्रेस सरकार ने राशि नहीं दी तो भाजपा ने योजना ही बदली


    बीती रात को आए तेज अंधड़ व बारिश के बीच टाउन की पारीक कॉलोनी में एक कच्चे मकान में कमरे की छत गिरने से परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मकान करीब 28 साल पुराना और कच्चा था जिसकी छत इतने वेग से गिरी कि उसमें लगे लोहे के गार्डर भी मुड़ गए। इस हादसे में दादी और उसके दो मासूम पोतों की जान चली गई। मृतका की पुत्रवधु गंभीर घायल हो गई। घायल को उपचार के लिए बीकानेर रेफर किया गया है। इस हादसे में सरकारी सिस्टम की बड़ी लापरवाही भी सामने आई। वर्ष 2012 में सीएम बीपीएल आवास योजना के तहत मकान के पुर्ननिर्माण के लिए आवेदन के बाद भी इस परिवार को सरकारी सहायता राशि नहीं मिली। ऐसे में आशियाना के साथ ही परिवार भी उजड़ गया।

    वार्ड 27 पारीक कॉलोनी निवासी बलराम भाट पीलीबंगा में फर्नीचर पॉलिश का काम करता है। गत रात्रि को उसने घर आना था लेकिन मौसम खराब होने के कारण प|ी को कॉल कर बच्चों के साथ मां को भी अपने साथ सुलाने को कहा। इस पर उसकी प|ी तन्नू (30), सास ज्ञानी देवी (70) व उसके दो बेटे पुनीत (3) और प्रदीप (5) सो गए। रात्रि को तेज अंधड़ और बारिश के बीच किसी समय कमरे की छत गिर गई। हादसे के समय चारों नींद में थे। सुबह साढ़े पांच बजे पड़ोसियों ने छत गिरी देखी तो चारों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डाक्टरों ने ज्ञानी देवी, पुनीत व प्रदीप को मृत घोषित कर दिया। तन्नू की हालत नाजुक होने पर उसे बीकानेर रेफर कर दिया गया। इससे पहले घटना की सूचना पाकर कलेक्टर दिनेशचंद जैन, एसपी यादराम फांसल, सीओ विरेंद्र जाखड़, एसडीएम सुरेंद्र पुरोहित, तहसीलदार सुभाष कड़वासरा घटनास्थल पर पहुंचे। लोगों ने परिवार को सहायता की गुहार लगाते हुए एंबुलेंस के समय पर नहीं पहुंचने पर रोष जताया। वहीं संबंधित परिवार को आवास योजना का लाभ नहीं मिलने के लिए जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर कलेक्टर ने कार्रवाई का आश्वासन दिया।

    इधर, नई खुंजा में भी गिरी छत, बाल-बाल बचे दादा-पोता

    आंधी और बारिश के बीच वार्ड नंबर 3 नई खुंजा में सुल्तान भाट के घर के कमरे की छत गिरने की जानकारी मिली है। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। सुल्तान राम और उसका पोता बाल-बाल गया। कांग्रेस नेता मनोज बड़सीवाल ने मौका देख गरीब परिवार को सांत्वना दी और प्रशासन से हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर कृष्ण सेतिया, पुसाराम जाट, विशाल बंसीवाल आदि मौजूद थे।

    हादसे से पहले इस घर में ऐसे ही खिलखिला रहा था जीवन; पूरा घर मलबे के ढेर में तब्दील, सुरक्षित बची ये दीवार और तस्वीरें

    कितनी हसरतों के साथ माता-पिता ने अपने बेटों पुनित और प्रदीप एवं उनकी दादी की तस्वीरें कमरे में लगाई थी लेकिन किसे पता था कि प्रकृति का ऐसा कहर टूटेगा और ये चेहरे सिर्फ तस्वीरों में ही नजर आएंगे। बुधवार सुबह जब लोग मलबा उठा रहे थे, तब दीवार पर सुरक्षित लटक रही इन तस्वीरों को देखकर हर किसी की नजरें रुक सी गईं। दादी और पोते के रिश्ते को बयां करती यह तस्वीरें हर किसी के दिल में दर्द की गहरी दास्तां छोड़ गई। वहां मौजूद हर शख्स नम आंखों से इन तस्वीरों को देख रहा था तो परिजन फूट-फूट कर बिलख रहे थे लेकिन सब कुछ खत्म होने के बावजूद बर्बादी के मंजर के बीच एक दीवार पर सुरक्षित बची यह तस्वीरें मानो कई सवाल खड़े कर रही थी। तस्वीरों से झांक रहे मासूम और झुर्रियों से भरे चेहरे यह सवाल कर रहे थे कि हमारी प्रशासनिक व्यवस्था इतनी लचर और खोखली क्यूं है? क्यूं गरीब का आशियाना ताश के पत्तों की तरह ढेर हो जाता है। क्यूं तिनकों की तरह बिखर जाते हैं हसंते-खिलखिलाते परिवार। ऐसे कई सवाल यह तस्वीरें मांग रही थी पर विडंबना यही थी कि इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं थे। अगर सिर्फ कुछ था तो वह था क्रंदन और पुकार, जिसे सुनकर लोग कुछ देर इकट्ठा तो जरूर हुए लेकिन कुछ देर बाद भीड़ छंट गई। चीत्कार को ओढ रहा था सांत्वना का शोर वो भी ऐसे जैसे आंधी के बाद सन्नाटा पसर जाता है।

    जिम्मेदार के बेशर्म बोल- पीएम आवास योजना का लाभ दिलवाएंगे, सवाल यह-अब उस मकान में रहेगा कौन?

    कलेक्टर- बीपीएल आवास योजना बंद, पीएम आवास योजना में दिलाएंगे: जिला कलेक्टर दिनेशचंद जैन का कहना है कि सीएम बीपीएल आवास योजना पहले बंद हो गई थी। इस कारण संबंधित परिवार को योजना का लाभ नहीं मिल सका। पीएम आवास योजना में आवेदन लेने के साथ ही वेरीफिकेशन का काम चल रहा है। इसके लिए डीएलबी ने एनजीओ को काम सौंपा है। संबंधित परिवार को मकान निर्माण के लिए नियमानुसार सहायता दिलाई जाएगी।

    आयुक्त- छह साल पहले के आवेदन का पता नहीं: नप आयुक्त राजेंद्र स्वामी का कहना है कि वर्ष 2012 में आवेदन की मुझे जानकारी नहीं हैं। अगर ऐसा है तो उस समय पात्रता पूरी नहीं होगी, तभी सहायता राशि नहीं मिली होगी। अगर किसी की लापरवाही से सहायता नहीं मिली तो इसकी जांच करा लेंगें। पीएम आवास योजना को लेकर परिषद ने सर्वे कराया है। अगर उसमें संबंधित परिवार का नाम है तो योजना गाइडलाइन मुताबिक सहायता दिलाई जाएगी।

    एसडीएम-अब आवास योजना का दिलाएंगे लाभ : एसडीएम सुरेंद्र पुरोहित का कहना है कि संबंधित परिवार की ओर से आवेदन किया गया था, इसकी जानकारी नहीं हैं। पीएम आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्र में आवेदनों का सर्वे के साथ वेरीफिकेशन कराया गया है। इसमें संबंधित परिवार को सहायता दिलाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। भविष्य में इस तरह की घटना नहीं हो इसलिए सभी कच्चे मकानों का सर्वे कराकर पीएम आवास योजना में सहायता राशि दिलाने की व्यवस्था होगी।

    आंखों देखी;सुबह जाग खुली तो देखा पड़ोसी के घर की छत गिरी हुई है, फोन किए, एंबुलेंस ही नहीं आई आती तो बच जाती और जानें

    सुबह साढ़े पांच बजे जाग होने पर घर के बाहर जमीन पर बिजली की तार टूटकर गिरी पड़ी थी। इस बीच आगे बढ़ा तो पड़ोसी बलराम के कमरे की छत गिरी देखी। आस-पास के लोगों ने छत गिरने की आवाज नहीं सुनी। रात को मौसम खराब था। बादल व बिजली गरज रही थी। ऐसे में शोर के कारण पड़ोस के मकान की छत कब गिरी, पता ही नहीं चला। छत गिरी हुई देख शोर मचाकर आसपास के लोगों को जगाया। शोर सुनकर आस-पड़ौस के लोग मौके पर इकठ्ठे हो गए। पुलिस को सूचित कर मलबे में दबे परिवार को निकालने के लिए कमरे की दीवार तोड़कर अंदर पहुंचे। इसके बाद मलबे में दबे दोनों मासूम बच्चों, उसकी मां व दादी को बाहर निकाला। पुलिस और नगरपरिषद की टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई लेकिन कई बार कॉल के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। एंबुलेंस को पहुंचने में देरी नहीं हो, इसलिए आसपास के दस से अधिक युवकों को घटनास्थल की ओर से आने वाले रास्तों पर लगाया गया लेकिन फिर भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस पर कॉलोनी में ही एक प्राइवेट एंबुलेंस से चारों को अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टर ने दादी व दोनों पोतों को मृत घोषित कर दिया। एंबुलेंस समय पर पहुंचती तो शायद गंभीर घायलों में किसी की जान बच जाती।

    ( जैसा कि बलराम भाट के पड़ौसी श्रवण राम ने बताया)

    जागा सरकारी अमला|अलसुबह हुआ हादसा, शाम को मृतकों के घर 1.60 लाख रुपए सहायता राशि का चैक देने पहुंचा प्रशासन, नप भी देगी डेढ़ लाख रुपए

    हकीकत|साढ़े चार साल से कागजों में ही बन रही आवास योजनाएं, शहर में अभी भी कच्चे घरों पर मंडरा रहा खतरा पेज-13

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