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कच्ची बस्तियों को डी-प्लान किया लेकिन नियमन दरें अधिक होने से नहीं मिल रहा लोगों को फायदा, नतीजा- शिविरों में नहीं आए आवेदन

Hanumangarh News - नगरपरिषद की ओर से शहर की कच्ची बस्तियों को डी-प्लान किए जाने के बाद भी लोगों को फायदा नहीं मिला है। इसका कारण नियमन...

Dainik Bhaskar

Jun 07, 2018, 02:55 AM IST
कच्ची बस्तियों को डी-प्लान किया लेकिन नियमन दरें अधिक होने से नहीं मिल रहा लोगों को फायदा, नतीजा- शिविरों में नहीं आए आवेदन
नगरपरिषद की ओर से शहर की कच्ची बस्तियों को डी-प्लान किए जाने के बाद भी लोगों को फायदा नहीं मिला है। इसका कारण नियमन दरें अधिक होना है। यही कारण है कि परिषद की ओर से वार्डवार शिविर लगाने के बाद भी लोगों ने आवेदन नहीं किए। ऐसे में लोगों को पट्टे जारी नहीं हो पा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में डीएलबी को पत्र लिखकर दरें कम करने का आग्रह किया गया है। वहीं विपक्ष का कहना है कि सत्तापक्ष कच्ची बस्तियों को डी-प्लान कर वाहवाही बटोर रहा है लेकिन लोगों को राहत नहीं दिलाया पाया है। दरें अधिक होने के कारण गरीब और जरूरतमंद लोग पट्टे के लिए आवेदन करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। विपक्षी पार्षदों का कहना है कि सरकार अगर वास्तव में जरूरतमंदों को पट्टे देना चाहती है तो पट्टे की दरें कम की जानी चाहिए। गौरतलब है कि गत माह परिषद की ओर शहर के विभिन्न वार्डों में शिविर लगाए गए थे। दरें अधिक होने के कारण करीब 50 लोगों ने ही आवेदन किए जबकि शिविर से फार्म अनेकों लोग लेकर गए।

नप आयुक्त राजेंद्र स्वामी का कहना है कि कच्ची बस्तियों से डी-प्लान किए गए एरिया में पट्टे के लिए दरें कम करने के लिए डीएलबी को दोबारा पत्र लिखा है। जल्द दरें कम होने उम्मीद है।

विपक्षी पार्षद अनिल खीचड़ का कहना है कि पट्टे की दरें अधिक होने के कारण लोग पट्टे से वंचित हैं। डी-प्लान कर वाहवाही बटोरने की बजाए सत्तापक्ष को दरें कम कराकर जनता को राहत पहुंचानी चाहिए। तभी संबंधित एरिया के जरूरतमंदों को पट्टे मिल सकते हैं।

नगरपरिषद की ओर से शहर की कच्ची बस्तियों को डी-प्लान किए जाने के बाद भी राहत नहीं

इस कारण कम आ रहे आवेदन

नगरपरिषद ने शहर में 15 कच्ची बस्तियों को डिनोटिफाइड (अनाधिसूचित) किया है। संबंधित एरिया में एक हजार रुपए वर्गगज की दरें तय की गई हैं। इस हिसाब से अगर कोई व्यक्ति 30 गुणा 60 साइज के मकान का पट्टा बनवाता है तो उसे करीब दो लाख रुपए परिषद को देने होंगे। जानकारों का कहना है कि डी-प्लान किए जाने से पहले कच्ची बस्ती का यही पट्टा करीब चार हजार रुपए में बन रहा था।

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कच्ची बस्तियों को डी-प्लान किया लेकिन नियमन दरें अधिक होने से नहीं मिल रहा लोगों को फायदा, नतीजा- शिविरों में नहीं आए आवेदन
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