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कला में 88.88% विद्यार्थी पास, पिछले साल से 0.68% कम रैंकिंग में 2 साल में चौथे से 18वें स्थान पर पहुंचा हनुमानगढ़

राजस्थान बोर्ड की 12वीं कक्षा के आर्ट्स संकाय के परीक्षा परिणाम में हनुमानगढ़ जिले के रिजल्ट में लगातार दूसरे साल...

Dainik Bhaskar

Jun 02, 2018, 03:00 AM IST
कला में 88.88% विद्यार्थी पास, पिछले साल से 0.68% कम रैंकिंग में 2 साल में चौथे से 18वें स्थान पर पहुंचा हनुमानगढ़
राजस्थान बोर्ड की 12वीं कक्षा के आर्ट्स संकाय के परीक्षा परिणाम में हनुमानगढ़ जिले के रिजल्ट में लगातार दूसरे साल गिरावट दर्ज हुई। जिले का रिजल्ट पिछले साल के मुकाबले 0.68 प्रतिशत गिरा तो प्रदेश में जिले की रैंकिंग भी चार स्थान गिरकर 18वें नंबर पर पहुंच गई। शुक्रवार को जारी हुए रिजल्ट में जिले में 88.88 प्रतिशत बच्चे पास हुए। पिछले साल सफलता का प्रतिशत 89.56 प्रतिशत रहा रहा था। हालांकि बीच के सालों में रिजल्ट में खासी बढ़ौतरी हुई थी लेकिन 2015-16 में 89.71 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद अब इसमें लगातार गिरावट आ रही है।

बेटियाें का परिणाम इस बार बढ़ा

साइंस व काॅमर्स के बाद बेटियों ने लड़कों को आर्टस के रिजल्ट में भी पछाड़ दिया है। जिले में 92.99 प्रतिशत बेटियां पास हुई हैं जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 84.97 प्रतिशत रहा है। खास बात यह है कि बेटियों का पास प्रतिशत इस साल पिछली बार की बजाय बेहतर हुआ है। फर्स्ट डिवीजन में भी 5028 बेटियों ने जगह बनाई जबकि महज 3230 लड़के ही फर्स्ट डिवीजन में आए। यह स्थिति तब है जबकि 8272 लड़कों के मुकाबले सिर्फ 7872 लड़कियों ने परीक्षा दी थी। इस लिहाज से परीक्षा देने वाली लड़कियों में से 63.87 प्रतिशत ने फर्स्ट डिवीजन हासिल की है।

भास्कर एनालिसिस

ऑटर्स

पिछली बार से इस बार 0.68% गिरा रिजल्ट

थर्ड डिवीजन

2018

88.88%

16144

स्टूडेंट परीक्षा में बैठे

सैकंड डिवीजन

5642

छात्राएं

छात्र

7872

परीक्षा में बैठी

फर्स्ट डिवीजन 5028

सैकंड डिवीजन 2145

थर्ड डिवीजन 146

बेटियों का जिलेभर का परिणाम

92.99%

कुल उत्तीर्ण 14349

फर्स्ट डिवीजन

8258

441

छात्र 8272

इसलिए गिरा रिजल्ट: अंग्रेजी ने किया परेशान, व्याख्याता भी नहीं

2017

89.56%

छात्राएं 7872

जिले का प्रतिशत

88.88

8272

परीक्षा में बैठे

फर्स्ट डिवीजन 3230

सैकंड डिवीजन 3497

थर्ड डिवीजन 295

छात्रों का जिलेभर का परिणाम

84.97%

1. मिशन मेरिट|शिक्षा विभाग की ओर से की गई पिछले साल मिशन मेरिट अभियान चलाया गया था। इसके तहत चुने गए मेधावी बच्चों को आवासीय सुविधा देकर कोचिंग दी गई थी। उस समय कैंप में शामिल आर्टस के सात में चार बच्चों ने 85 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए थे। मिशन मेरिट से जिले में पढ़ाई का माहौल भी बना था जबकि इस साल ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली।

2. अंग्रेजी विषय|इस साल इंग्लिश का परिणाम सबसे ज्यादा खराब रहा है। इसमें ज्यादातर बच्चों की सप्लीमेंटरी आई है। जिले में लगभग 20 प्रतिशत विद्यार्थियों की सप्लीमेंटरी आई है आैर उन्हें दुबारा परीक्षा देनी होगी। वहीं जो विद्यार्थी पास हुए हैं, उसके भी इंग्लिश में नंबर काफी कम हैं। इस साल का प्रश्नपत्र हर बार से कठिन था और उत्तर पुस्तिकाएं भी सख्ती से जांची गई हैं।

3.विद्यार्थी कठिन विषयों पर ध्यान देते हैं और हिंदी अंग्रेजी को ज्यादा वरीयता नहीं देते

4.अच्छे प्रतिशत को देखते हुए सीबीएसई बोर्ड की ओर विद्यार्थियों का रुझान बढ रहा है

5.10वीं के बाद प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला लेते हैं, इससे 12वीं में विद्यार्थी कम हुए हैं।

6. कई जगह अभी भी व्याख्याताओं के पद खाली हैं। इसके चलते खासतौर पर प्रैक्टिकल सब्जेक्ट्स में विद्यार्थियों को दिक्कत रहती है।

पांच साल का परिणाम

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