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बिना लाइसेंस की फैक्ट्री पर छापा, गंदे पानी से सस्ती कोल्डड्रिंक बना कमा रहे थे मुनाफा

भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भांभू कॉलोनी की गली नंबर 4 स्थित किराए के मकान में चल...

Dainik Bhaskar

Jun 10, 2018, 03:30 AM IST
बिना लाइसेंस की फैक्ट्री पर छापा, गंदे पानी से सस्ती कोल्डड्रिंक बना कमा रहे थे मुनाफा
भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भांभू कॉलोनी की गली नंबर 4 स्थित किराए के मकान में चल रही अवैध कोल्ड ड्रिंक फैक्ट्री पर छापा मारा। यह कार्रवाई शनिवार दोपहर एक बजे शुरू हुई जो शाम तक जारी रही। बिना लाइसेंस के चल रही इस फैक्ट्री के अंदर ही मशीनें लगाकर पेय तरल पदार्थ बनाकर बोतलों में पैक किया जाता था। इसकी जिलेभर में सप्लाई हो रही थी। मौके पर भारी मात्रा में बोतलें और पैक किए गए पेय पदार्थ, बनाकर रखे गए पेय पदार्थ और कच्चा माल बरामद किया गया है। फैक्ट्री से सभी तरह के तरल पेय पदार्थों के नमूने लेकर फैक्ट्री को सीज कर दिया गया है। नमूने गुणवत्ता जांच के लिए जयपुर भिजवाए जाएंगे। वहीं, फैक्ट्री बालाजी कोल्ड ड्रिंक्स के मालिक वेदप्रकाश पुत्र मुलखराज अरोड़ा और पवन एजेंसी के मालिक हरीशकुमार पुत्र साईंदास अरोड़ा के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई हनुमानगढ़ से डेपुटेशन पर बुलाए गए खाद्य सुरक्षा अधिकारी हरिराम वर्मा और राकेश सचदेवा ने की। सूचना पर सीएमएचओ डाॅ. नरेश बंसल भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तत्काल फैक्ट्री का निरीक्षण कर जानकारी ली और फैक्ट्री को सीज कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

दाे मंजिला भवन में चल रही थी फैक्ट्री

जिस मकान पर छापा मारा गया वह दो मंजिला बना हुआ है। भूतल पर चार कमरे और एक रसोईघर है। सभी में पैक की हुई और खाली बोतलें भरी पड़ी थी। अंदर के दो कमरों में पैकिंग मशीन लगी हुई थी। ऊपर के दो कमरों में से एक में पैकिंग की खाली बोतलें और पैक किया हुआ पेय पदार्थ स्टॉक किया हुआ था। रसोईघर में आम के फ्लेवर का पेय पदार्थ बनाकर बड़ी बाल्टी में ही छोड़ा हुआ था। उसमें से भयंकर बदबू आ रही थी। भूतल में चल रही फैक्ट्री संचालक ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी को फाइल दिखाई जो तीन साल पहले तैयार की गई थी। उन्होंने बताया कि यह फाइल सीएमएचओ कार्यालय में दी गई। एक माह बाद लाइसेंस लेने गए तब वहां मौजूद एक व्यक्ति ने फाइल ही लौटा दी और कहा कि लाइसेंस बन गया है, घर भेज देंगे। इसके बाद उन्होंने कभी लाइसेंस के बारे में पूछ पड़ताल नहीं की। फैक्ट्री संचालक ने बताया कि अब वह पहचान भी नहीं सकता कि वह व्यक्ति कौन था।

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